डॉ. लक्ष्मीकांत जोशी साहित्य सम्मान आशा शर्मा को, जेन जी और राजनीति के सरोकार के स्वर मुखरित

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सृजना की ओर से होटल घूमर में आयोजित हुआ साहित्यिक समारोह, पाठक प्रतिनिधि के रूप में हंसराज सोनी ने पाठकीय दृष्टि से अपनी बात रखी 

डॉ. अरुण कुमार पुरोहित. जोधपुर 

घूमर होटल के मारवाड हाॅल में आयोजित एक भव्य साहित्यिक समारोह में सृजना संस्था का डॉ. लक्ष्मीकांत जोशी साहित्य सम्मान बीकानेर की लेखिका आशा शर्मा को उनके कहानी संग्रह आगेती खेती के लिए प्रदान किया गया। मंच पर साहित्य जगत की मशहूर हस्तियां उपस्थित थी। अध्यक्षता उमादे उपन्यास के लेखक डॉ. फतेह सिंंह भाटी ने की। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश से पधारे प्रसिद्ध चिंतक और साहित्यकार सुधेन्दु ओझा थे।

सम्मानित लेखिका आशा शर्मा मंच के केंद्र, बल्कि समारोह के केंद्र में थी। वहीं एक नयापन भी देखने को मिला। पाठक प्रतिनिधि के रूप मे हंसराज सोनी भी थे, जिन्होंने एक पाठक की दृष्टि से बहुत सारगर्भित बातें कही।

सृजना की अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्य नेत्री सुषमा चौहान ने अपने मृदु व्यक्तित्व और प्रांजल भाषा सहित अतिथियों का स्वागत किया। सृजना के सचिव डॉ. हरीदास व्यास ने, जो एक बहु आयामी साहित्यकार और आलोचक होने के साथ एक विलक्षण मंच संचालक भी हैं, पूरे प्रोग्राम के रथ को अपनी वाणी की रश्मियों से संचालित किया। उन्होंने अपनी बात भी संचालन की विधा में रखते हुए कही और उसी माध्यम से वक्ताओं को बोलने के सुर दिये।

समारोह में दो स्वर प्रमुख रूप से उभरे। एक जेन जी और दूसरा साहित्य के राजनीतिक सरोकार। जहाँ सम्मानित लेखिका आशा शर्मा और पाठक प्रतिनिधि हंसराज सोनी ने कहानियों के माध्यम से युवा पीढी की सोच और चिंताओं पर बात की, वहीं मुख्य अतिथि ओझा और अध्यक्ष डॉ.  भाटी ने साहित्य और राजनीति के इतिहास और वर्तमान पर विचार व्यक्त किये। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि डॉ. लक्ष्मीकांत जोशी के व्यक्तित्व के अनुरूप ही यह सम्मान समारोह एक साहित्य का ऑर्केस्ट्रा था, जिसके संचालक रहे डॉ. हरीदास व्यास और जिसमें उत्कृष्ट साहित्य कारों की स्वर लहरियाँ बही।

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