स्व. श्रीमती शकुंतला जवाहर मूंदड़ा की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा 30 से, पं. विजय शंकर जी मेहता भक्ति सरिता बहाएंगे

SHARE:

30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक वेगा बाई द ओजोन होटल्स जवाहर टॉवर, शकुन मोटर्स तिराहा में होगा आयोजन, 6 अक्टूबर को प्रवचन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होंगे और पूर्णाहुति दोपहर 4 बजे होगी।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

स्वर्गीय श्रीमती शकुंतला जवाहर मूंदड़ा की पावन पुण्य स्मृति में जोधपुर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में होने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण करने का अवसर मिलेगा। कथा का वाचन परम श्रद्धेय श्री पंडित विजय शंकर जी मेहता के श्रीमुख से होगा। आयोजन से जुड़े परिवार ने धर्मप्रेमी बंधुओं, बहनों, स्नेहीजनों एवं शुभचिंतकों से परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक प्रतिदिन होगी कथा

आयोजन की शुरुआत बुधवार, 30 सितंबर 2026 से होगी और मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 तक कथा चलेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कथा का आयोजन होगा। कथा स्थल वेगा बाई द ओजोन होटल्स, जवाहर टावर, शकुन मोटर्स तिराहा, जोधपुर रखा गया है। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक वातावरण में कथा श्रवण की व्यवस्था रहेगी। आयोजन की शुरुआत 30 सितंबर को विशेष कलश यात्रा से होगी। कलश यात्रा सुबह 10:30 बजे से प्रारंभ होगी। इसी दिन से श्रीमद्भागवत कथा के सात दिवसीय कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ होगा।

कलश यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा का आह्वान

आयोजन के पहले दिन निकाली जाने वाली कलश यात्रा को भी विशेष रूप दिया गया है। कार्यक्रम विवरण में महिलाओं के लिए लाल चुंदड़ी या लाल साड़ी तथा पुरुषों के लिए पारंपरिक चोला पायजामा पहनने का उल्लेख किया गया है। इससे कलश यात्रा में धार्मिक एवं पारंपरिक रंग देखने को मिलेगा। आयोजन के समापन दिवस 6 अक्टूबर को कथा के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस दिन कार्यक्रम सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा। इसी दिन भागवत समापन एवं हवन पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। पूर्णाहुति का समय दोपहर 4 बजे निर्धारित किया गया है।

सात दिनों में भगवान के विविध स्वरूपों और प्रसंगों का वर्णन

श्रीमद्भागवत कथा के प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग प्रसंग निर्धारित किए गए हैं। कार्यक्रम की विषयवस्तु में भगवान की भक्ति, उनके विभिन्न अवतारों, भक्तों की आस्था तथा श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया गया है।

पहले दिन : कलश यात्रा और कथा का शुभारंभ

बुधवार, 30 सितंबर को सुबह 10:30 बजे कलश यात्रा के साथ आयोजन की शुरुआत होगी। महिलाओं के लिए लाल चुंदड़ी या लाल साड़ी तथा पुरुषों के लिए पारंपरिक चोला पायजामा की वेशभूषा निर्धारित की गई है। इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक कथा होगी। पहले दिन का कार्यक्रम धार्मिक आयोजन की औपचारिक शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ेगा।

दूसरे दिन : कपिल गीता और शिव सती चरित्र

गुरुवार, 1 अक्टूबर को कथा में कपिल गीता, शिव सती चरित्र एवं भरत चरित्र का वर्णन किया जाएगा। ये प्रसंग भारतीय धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं और कथा के माध्यम से इनके आध्यात्मिक एवं भक्तिपरक पक्षों को प्रस्तुत किया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु कथा के माध्यम से भगवान शिव, माता सती तथा भरत चरित्र से जुड़े प्रसंगों का श्रवण करेंगे।

तीसरे दिन : प्रह्लाद और नृसिंह अवतार

शुक्रवार, 2 अक्टूबर को जड़ भरत कथा, अजामिल प्रसंग, प्रह्लाद एवं नृसिंह अवतार से जुड़े प्रसंग रखे गए हैं। इनमें भक्त प्रह्लाद की भक्ति और भगवान नृसिंह के अवतार का प्रसंग विशेष रूप से उल्लेखित है। कार्यक्रम में इन कथाओं के माध्यम से भक्ति, आस्था और भगवान के प्रति समर्पण से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

चौथे दिन : समुद्र मंथन से श्रीकृष्ण प्राकट्य तक

शनिवार, 3 अक्टूबर को कथा में कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का समावेश किया गया है। इनमें गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम कथा तथा श्रीकृष्ण प्राकट्य उत्सव प्रमुख हैं। इस दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों तथा धार्मिक ग्रंथों में वर्णित महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन किया जाएगा। कार्यक्रम विवरण में इस दिन महिलाओं के लिए पीला रंग तथा पुरुषों के लिए पारंपरिक चोला पायजामा के साथ पीला रंग रखने का उल्लेख है।

पांचवें दिन : श्रीकृष्ण बाललीला और रुक्मिणी विवाह

रविवार, 4 अक्टूबर को कथा का केंद्र भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं रहेंगी। इस दिन श्रीकृष्ण बाललीला, मथुरा गमन, कंस वध तथा श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह उत्सव का वर्णन होगा। इस दिन महिलाओं के लिए लाल रंग तथा पुरुषों के लिए पारंपरिक चोला पायजामा के साथ लाल रंग की वेशभूषा निर्धारित की गई है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर मथुरा गमन और कंस वध तक के प्रसंग कथा को विशेष रूप से भक्तिमय बनाएंगे।

छठे दिन : राजसूय यज्ञ और सुदामा चरित्र

सोमवार, 5 अक्टूबर को कथा में राजसूय यज्ञ एवं सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। कथा के माध्यम से इस प्रसंग का श्रवण श्रद्धालुओं को कराया जाएगा।

सातवें दिन : उद्धव गीता, परीक्षित मोक्ष और पूर्णाहुति

मंगलवार, 6 अक्टूबर को कार्यक्रम सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा। अंतिम दिन उद्धव गीता, भगवान का स्वधाम गमन, परीक्षित मोक्ष एवं भागवत समापन से जुड़े प्रसंग होंगे। इसके बाद हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। पूर्णाहुति दाेपहर 4 बजे निर्धारित है। इस प्रकार सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का समापन धार्मिक विधि-विधान और हवन-पूर्णाहुति के साथ होगा।

श्रद्धालुओं से कथा आयोजन में शामिल होने का किया आह्वान

आयोजन को स्वर्गीय श्रीमती शकुंतला जवाहर मूंदड़ा की पावन पुण्य स्मृति को समर्पित किया गया है। श्री जवाहर लाल मूंदड़ा, योगेश-सारिका मूंदड़ा, वसुधा-श्रुतिशील झंवर, कनक-निलय राठी, सीमा-शरद पुंगलिया, रोहन व मिराया मूंदड़ा  ने लोगों से अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने की अपील की है। आयोजन के माध्यम से परिवार ने धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ समाजजनों को एकत्रित होकर भागवत कथा श्रवण का अवसर प्रदान किया है। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों का श्रवण कराया जाएगा। श्रीमद्भागवत कथा भारतीय धार्मिक परंपरा में भगवान की भक्ति, धर्म, आस्था और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। जोधपुर में आयोजित होने वाली यह सात दिवसीय कथा भी इन्हीं भावों के साथ आयोजित की जा रही है। 30 सितंबर को कलश यात्रा से शुरू होकर 6 अक्टूबर को हवन एवं पूर्णाहुति के साथ इसका समापन होगा। आयोजन स्थल वेगा बाई द ओजोन होटल्स, जवाहर टावर, शकुन मोटर्स तिराहा, जोधपुर रहेगा। कथा का समय अधिकांश दिनों में दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक रखा गया है, जबकि अंतिम दिन प्रवचन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होंगे और 4 बजे पूर्णाहुति होगी। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन श्रीमद्भागवत के विविध प्रसंगों को सुनने, धार्मिक वातावरण में समय बिताने और सामूहिक रूप से कथा श्रवण करने का अवसर प्रदान करेगा।

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें