सितार से सुरों की बरसात…पंडित हरविंदर शर्मा के सम्मोहन में बंधे श्रोता

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पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा उस्ताद विलायत खान साहब के शिष्य हैं और वर्तमान समय में इमदादखानी घराने के प्रतिनिधि कलाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। वे पिछले लगभग 60 वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से सितार वादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

आनंद प्रकाश कल्ला. जोधपुर

थार लोक संस्कृति अध्ययन केंद्र, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध सितार वादक एवं संगीतज्ञ पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा का सितार वादन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंडित शर्मा ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ राजस्थान की लोक संस्कृति से जुड़ी मधुर लोक धुनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पंडित (डॉ.) हरविंदर शर्मा उस्ताद विलायत खान साहब के शिष्य हैं और वर्तमान समय में इमदादखानी घराने के प्रतिनिधि कलाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। वे पिछले लगभग 60 वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से सितार वादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

वे आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के टॉप-ग्रेड कलाकार हैं। भारत के अलावा उन्होंने कनाडा, रूस, दुबई, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड सहित अनेक देशों में अपनी सितार वादन प्रस्तुतियां दी हैं। संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2023 का प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

राग यमन कल्याण से शुरुआत, राग मांड की प्रस्तुति

कार्यक्रम के प्रारंभ में पंडित हरविंदर शर्मा ने राग यमन कल्याण से अपने सितार वादन की शुरुआत की। इसके पश्चात उन्होंने राग मांड की प्रस्तुति दी। शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुति के बाद उन्होंने लोक संस्कृति से जुड़ी अनेक लोक धुनों को सितार के माध्यम से प्रस्तुत किया। सितार की मधुर सुरलहरियों और लोक संगीत की भावपूर्ण धुनों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया और श्रोता मंत्रमुग्ध होकर प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर मंगलाराम बिश्नोई ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि पंडित मुकुंद क्षीरसागर रहे। कार्यक्रम के अंत में थार लोक संस्कृति अध्ययन केंद्र के निर्देशक प्रोफेसर महिपाल सिंह ने सभी अतिथियों, कलाकारों, आयोजकों एवं उपस्थित श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. गौरव शुक्ल ने किया तथा संचालन सुरेंद्र सिंह पवार ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

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