श्री भरत चरित्र एवं श्री हनुमान चरित्र कथा : भाई के प्रति प्रेम और अटूट समर्पण का वर्णन

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अंतिम दिवस हनुमान चालीसा की शेष चौपाइयों का विस्तृत भावार्थ समझाया गया और इस प्रकार श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा के संपूर्ण अर्थ एवं उसमें निहित जीवन-संदेश को सरलता से समझा।

उदित भास्कर. जोधपुर 

कमला नेहरू नगर स्थित भारत समन्वय धाम श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में ओम भागवत सत्संग परिवार के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय दिव्य श्री भरत चरित्र एवं श्री हनुमान चरित्र कथा का रविवार को भव्य समापन हुआ। कथा व्यास परम पूज्य रामस्नेही संत श्री अर्जुन राम जी महाराज ने कथा के माध्यम से हनुमानजी के अद्भुत बल, प्रेम, भक्ति, सेवा और प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य समर्पण के साथ ही भरतजी के त्याग, तपस्या, भाई प्रेम और श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का भावपूर्ण वर्णन किया।

अंतिम दिवस हनुमान चालीसा की शेष चौपाइयों का विस्तृत भावार्थ समझाया गया और इस प्रकार श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा के संपूर्ण अर्थ एवं उसमें निहित जीवन-संदेश को सरलता से समझा। कथा के दौरान हनुमानजी के चरित्र के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से उनके बल के साथ उनकी विनम्रता, प्रेम और भक्ति के भावों को भी सामने रखा गया।

कथा में श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव विशेष रहा कि सामान्यतः लोग रामायण का श्रवण तो करते हैं, लेकिन उसके किसी एक चरित्र को इतनी गहराई से समझने का अवसर कम ही मिल पाता है। इस आयोजन में भरत चरित्र और हनुमान चरित्र को विस्तार से समझाया गया, जिससे अनेक भक्तों के लिए इन दोनों महान चरित्रों के त्याग, प्रेम, भक्ति और समर्पण को इतने विस्तार से सुनने-समझने का विशेष अवसर मिला।

अंतिम दिवस भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में पहुंचे। जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।कथा के समापन के पश्चात सभी भक्तों के लिए प्रसाद एवं भोजन की व्यवस्था की गई। भक्तों ने प्रेम और आत्मीयता के साथ एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और सात दिवसीय आयोजन के समापन को आनंद एवं भक्ति के साथ मनाया।

सात दिनों तक चले इस दिव्य आयोजन में श्रद्धालुओं को हनुमानजी की भक्ति और भरतजी के त्याग एवं समर्पण से जुड़े अनेक प्रेरणादायी प्रसंग सुनने को मिले। आयोजन के दौरान अनेक साधु-संतों का सान्निध्य भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही सुंदरकांड एवं अन्य भक्तिमय कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जिसका श्रद्धालुओं ने भरपूर आनंद लिया। पूरे सात दिनों तक कथा पंडाल भक्ति, संगीत और संतवाणी से सराबोर रहा।

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