खेजड़ली मेले की पूर्व संध्या पर पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए अखिल भारतीय विश्नोई कमांडो फोर्स की ओर से नई सड़क स्थित राजीव गांधी मूर्ति पर हुआ कार्यक्रम
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
खेजड़ली मेले की पूर्व संध्या पर पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए नई सड़क स्थित राजीव गांधी मूर्ति के पास इतिहास और बलिदान की गौरवगाथा एक बार फिर दीपों की रोशनी से जीवंत हो उठी। अखिल भारतीय विश्नोई कमांडो फोर्स के तत्वावधान में आज खेजड़ली मेले की पूर्व संध्या पर 363 दीपक जलाकर महान पर्यावरण शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पुखराज खेड़ी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए बताया कि आज से लगभग 296 वर्ष पूर्व माँ अमृता देवी विश्नोई के ओजस्वी नेतृत्व में भक्त-प्रवर व पर्यावरण प्रेमियों ने हंसते-हंसते हरे पेड़ों से चिपककर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, लेकिन पेड़ों को कटने नहीं दिया।
अमृता देवी के उस ऐतिहासिक कथन—
“सिर सांटे रूख रहे, तो भी सस्तो जान”

—और गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान के वचनों को साक्षात चरितार्थ करते हुए कुल 363 लोगों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था।
इन्हीं अमर शहीदों के चरणों में नमन करने और उनके अदम्य साहस को याद करने के लिए आज अखिल भारतीय विश्नोई कमांडो फोर्स तथा विभिन्न पर्यावरण प्रेमियों ने नई सड़क, राजीव गांधी मूर्ति के पास एकत्रित होकर 363 दीप प्रज्वलित किए और शहीदों को याद किया। यह आयोजन समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रकृति प्रेम का एक प्रेरणादायी संदेश छोड़ गया है। किशन ऐकलखोरी, श्रीराम सौऊ, भरत खेड़ी, सुभाष जाणी, दिनेश भवाद, रामनिवास धोरू, पुनाराम उदाणी, सम्पत, हिराराम भादु, बुधाराम, रामनिवास हाणिया, महिपाल सौऊ, प्रकाश बिश्नोई, खानुराम देवासी, जयराम, इन्द्रजीत, शंकर भादु, रमेश भादु, अशोक लभुवाणी, सुरेश जांगु, विजय शर्मा, एडवोकेट (पर्यावरण प्रेमी)
महिला वर्ग शिवभोली शोभारानी, शारदा बिश्नोई, एडवोकेट भंवरी कालीराणा, विधा बैनीवाल, प्रियंका गौड़, निरमा भादु, वर्षा गोदारा, रोशनी गायणा, सजना, सरोज, सुमन बिश्नोई आदि ने भाग लिया।








