जब जीवन के रथ की लगाम हमने श्रीकृष्ण को सौंप दी, कर्म हमारा धर्म है, दिशा श्रीकृष्ण की और परिणाम उनकी इच्छा
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

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कभी-कभी जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं, जब सामने कई रास्ते होते हैं, लेकिन मंजिल का रास्ता दिखाई नहीं देता। ऐसे समय में मनुष्य यदि अपने अहंकार को छोड़कर स्वयं को ईश्वर के हवाले कर दे, तो भीतर से एक नई शक्ति जन्म लेती है। हमारी पत्रकारिता और मीडिया की यह यात्रा भी कुछ ऐसी ही कहानी है। वर्ष 2022 में शुरू हुआ उदित भास्कर आज एक नए रूप में हमारे सामने है। इसके साथ उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड का गठन हमारे लिए केवल एक कारोबारी उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित एक नए कर्मपथ का आरंभ है।
2022 में देखा था एक सपना
वर्ष 2022 में जब हमने उदित भास्कर न्यूज पोर्टल की शुरुआत की थी, तब हमारे मन में एक छोटा-सा सपना था। सपना था कि पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई जाए, डिजिटल मीडिया की बदलती दुनिया में अपने लिए एक स्थान बनाया जाए और आने वाले समय में अपनी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी स्थापित की जाए। उस समय शायद हमें भी यह अंदाजा नहीं था कि यह छोटा-सा प्रयास आने वाले वर्षों में हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण यात्रा का हिस्सा बन जाएगा। धीरे-धीरे पत्रकारिता हमारे लिए केवल पेशा नहीं रही। यह समाज को देखने, समझने और उससे संवाद करने का माध्यम बनती चली गई। शब्द हमारे साथी बने और समाचार हमारे कर्म का माध्यम।
इसी यात्रा के दौरान हमारा झुकाव भगवान श्रीकृष्ण की ओर निरंतर बढ़ता गया। श्रीकृष्ण को पढ़ते हुए, समझते हुए और उनके जीवन-दर्शन पर मनन करते हुए यह अनुभूति गहरी होती गई कि जीवन भी एक महाभारत है। हर व्यक्ति के सामने अपने-अपने प्रश्न हैं, अपने संघर्ष हैं और अपने निर्णयों के कुरुक्षेत्र हैं। और तब हमें लगा कि यदि जीवन का रथ चलाना ही है तो उसकी लगाम अपने अहंकार के हाथों में रखने के बजाय श्रीकृष्ण को सौंप देना ही बेहतर है।
जब कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया, तब श्रीकृष्ण को सारथी बनाया
जीवन में ऐसे भी क्षण आए, जब आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। योजनाएं थीं, इच्छाएं थीं, सपने थे, लेकिन परिस्थितियां अपने अनुसार चल रही थीं। ऐसे समय में हमने अपने भीतर एक निर्णय लिया—अब जीवन के रथ की चिंता हम अकेले नहीं करेंगे। हमने अपने आपको श्रीकृष्ण के हवाले कर दिया। हमने मन ही मन कहा कि हे कृष्ण! रथ आपका है, सारथी भी आप हैं और दिशा भी आपकी होगी। हम केवल आपके रथ पर बैठे कर्म करते रहेंगे। शायद यही वह क्षण था, जब जीवन को देखने का हमारा नजरिया बदलने लगा। श्रीकृष्ण ने गीता में कर्म का संदेश दिया। उन्होंने अर्जुन को परिस्थितियों से भागने के लिए नहीं कहा, बल्कि अपने कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। हम भी उसी भावना को अपने जीवन में उतारने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे हाथ में कर्म है। परिणाम हमारे हाथ में नहीं। हमारी जिम्मेदारी प्रयास करना है। फल देना श्रीकृष्ण का कार्य है।
उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड : सपने का पहला औपचारिक कदम
भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा और अपनी टीम के सहयोग से हमने उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया है। हमारे लिए यह कंपनी केवल कागज पर बना हुआ एक कॉरपोरेट ढांचा नहीं है। यह वर्षों से देखे गए एक सपने का पहला औपचारिक स्वरूप है। आज हमारे पास दो न्यूज पोर्टल हैं—राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर। ये दोनों हमारे लिए केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि हमारे सपनों का संसार हैं। इन दोनों के माध्यम से हम समाज से संवाद करना चाहते हैं, सकारात्मक विचारों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और पत्रकारिता को अपनी जिम्मेदारी के रूप में निभाना चाहते हैं।
हमारा मूल मंत्र
कर्म हमारा — दिशा श्रीकृष्ण की। प्रयास हमारा — परिणाम श्रीकृष्ण का। रास्ता हमारा — सारथी श्रीकृष्ण। हम जल्दबाजी में नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
मीडिया से आगे : वेलनेस और जीवनशैली के क्षेत्र में भी कदम
उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड का कार्यक्षेत्र केवल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। हम आने वाले समय में वेलनेस, हेल्थ, योग और नेचुरोपैथी जैसे क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। फिलहाल हमारा पहला और प्रमुख कदम मीडिया के क्षेत्र में है। इसके बाद समय और परिस्थितियों के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार की दिशा में काम किया जाएगा। हम भविष्य को लेकर कई सपने देखते हैं। कई योजनाएं मन में हैं। लेकिन इस समय उन योजनाओं की कोई आधिकारिक घोषणा करना उचित नहीं समझते। समय आने पर जो कुछ होना होगा, वह स्वयं सामने आएगा। हमारा विश्वास है कि यदि श्रीकृष्ण ने किसी कार्य की प्रेरणा दी है, तो उसकी घोषणा का उचित समय भी वही तय करेंगे। हमारा काम केवल उस समय तक अपने कर्म को जारी रखना है।
आठ-दस साल महत्वपूर्ण : मंजिल से अधिक महत्वपूर्ण है निरंतर चलना
हम जानते हैं कि कोई भी बड़ा मुकाम एक दिन में हासिल नहीं होता। एक पौधा लगाकर अगले दिन उससे वृक्ष बनने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उसे मिट्टी चाहिए, पानी चाहिए, धूप चाहिए, समय चाहिए और सबसे बढ़कर धैर्य चाहिए। ठीक उसी तरह हम भी अपने इस प्रयास को समय देना चाहते हैं। आने वाले आठ-दस वर्षों में एक ऐसा मुकाम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने का हमारा विश्वास है, जहां राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर अपनी एक अलग पहचान बना सकें। हम बड़े दावे नहीं करना चाहते। हम केवल इतना कहना चाहते हैं कि हम चलते रहेंगे। कदम छोटा हो सकता है, लेकिन रुकना नहीं है। गति धीमी हो सकती है, लेकिन दिशा नहीं बदलनी है।
गीता से मिली जीवन-दृष्टि
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” हमारे लिए इस भाव का अर्थ है—कर्म करते रहो, परिणाम की चिंता श्रीकृष्ण पर छोड़ दो। यही भावना हमारी नई यात्रा की आधारशिला है।
राइजिंग भास्कर की यात्रा और अब उदित भास्कर की नई शुरुआत
राइजिंग भास्कर पिछले चार वर्षों से अधिक समय से आपसे संवाद कर रहा है। आपने उसे अपना स्नेह दिया, उसे पढ़ा, सराहा और अपनी जुबान पर स्थान दिया। आज उसी यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ रहा है—उदित भास्कर। उदित भास्कर को हम नए सिरे से लॉन्च कर रहे हैं। यह न्यूज पोर्टल कल ही नए रूप में तैयार हुआ और आज ही हमें इसके लॉगिन-पासवर्ड प्राप्त हुए हैं। इसलिए हमारे पास वह समय नहीं था, जिसमें हम इसकी कोई बड़ी या भव्य शुरुआत कर पाते। लेकिन शायद हर शुरुआत भव्य हो, यह जरूरी भी नहीं। कभी-कभी शुरुआत साधारण होती है और यात्रा असाधारण बन जाती है। आज हम इसे पूरे उत्सव के साथ नहीं, बल्कि पूरे विश्वास के साथ शुरू कर रहे हैं।
परिस्थितियों ने अचानक श्रीगणेश करवाया
इसी बीच हमारे वरिष्ठ साथी श्री सुमनेश जी व्यास की धर्मपत्नी श्रीमती सुमन व्यास का आकस्मिक निधन हो गया। यह हम सभी के लिए अत्यंत दुखद और अप्रत्याशित समय है। अचानक परिस्थितियां बदल गईं। श्री सुमनेश जी व्यास स्वाभाविक रूप से इस कठिन समय में अपने परिवार के साथ हैं। हमारे अन्य वरिष्ठ साथी श्री आनंद प्रकाश कल्ला भी उनके साथ जुड़े होने के कारण व्यस्त हो गए। ऐसे में उदित भास्कर की शुरुआत उस तैयारी के साथ नहीं हो सकी, जैसी हम चाहते थे। लेकिन जीवन भी तो श्रीकृष्ण की ही लीला है। मनुष्य अपनी योजनाएं बनाता है और समय अपनी गति से आगे बढ़ता है। इसलिए आज हम इसे पूर्ण तैयारी के बजाय पूर्ण विश्वास के साथ शुरू कर रहे हैं। बहुत जल्द हमारी पूरी टीम के साथ हम आपसे व्यवस्थित रूप से रूबरू होंगे।
हमारी टीम : अकेले सपने नहीं चलते
कोई भी यात्रा अकेले पूरी नहीं होती। उदित भास्कर और राइजिंग भास्कर की इस यात्रा में कई लोगों का सहयोग और स्नेह हमारे साथ है। तकनीकी क्षेत्र में मेरे छोटे भाई श्री दिलीप केसानी का सहयोग हमें निरंतर मिलता रहेगा। मेरी धर्मपत्नी श्रीमती राखी पुरोहित के समर्पण, सहयोग और शुभकामनाओं के बिना हमारी यह यात्रा अधूरी है। उन्होंने हर कठिन और अनिश्चित परिस्थिति में साथ खड़े होकर इस सपने को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारी टीम के वरिष्ठ साथी श्री सुमनेश जी व्यास और श्री आनंद प्रकाश कल्ला का मार्गदर्शन भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम मानते हैं कि संस्था व्यक्ति से बड़ी होती है और टीम किसी भी सपने को वास्तविकता में बदलने की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होती है।
हमारी टीम की भावना
एक व्यक्ति का सपना शुरुआत कर सकता है, लेकिन एक टीम ही उसे मुकाम तक पहुंचा सकती है। इसलिए हमारा प्रयास रहेगा कि राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर को टीम भावना, विश्वास और निरंतर सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाए।
श्री सुरेश जी राठी के प्रति आभार
इस अवसर पर हम अपने आदरणीय भाईसाहब श्री सुरेश जी राठी का विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहते हैं। जीवन में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी प्रेरणा हमारे भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने में मदद करती है। श्री सुरेश जी राठी हमारे लिए ऐसे ही प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनकी प्रेरणा और शुभकामनाओं के बिना शायद हम जीवन में कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं पाते। हम उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। एक बड़े भाई की तरह उनका स्नेह और शुभकामनाएं हमें हमेशा मिलती रही हैं। हमारी यह नई यात्रा भी उनके आशीर्वाद और शुभकामनाओं के साथ आगे बढ़े—यही हमारी कामना है।
अब रोज आपसे होगा संवाद
राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर के माध्यम से हम आने वाले समय में आपसे रोज मुखातिब होंगे। दोनों प्लेटफॉर्म के कंटेंट को लेकर बहुत जल्द व्यवस्थित रूप से काम शुरू किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि दोनों पोर्टल अपने-अपने स्वरूप में पाठकों के लिए उपयोगी, विश्वसनीय और सार्थक सामग्री लेकर आएं। इसके साथ ही राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर नाम से हमारे यू-ट्यूब चैनल भी आगे की यात्रा का हिस्सा होंगे। हमारा उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे साथ जुड़ने वाला व्यक्ति कुछ लेकर जाए—कोई उपयोगी जानकारी, कोई सकारात्मक विचार, कोई प्रेरणा या जीवन को देखने का कोई नया दृष्टिकोण। हम घोषणा से ज्यादा कर्म पर विश्वास करते हैं। भविष्य में हमें बहुत कुछ करना है। कई विचार हैं। कई योजनाएं हैं। कई सपने हैं। लेकिन अभी हम उनके बारे में आधिकारिक घोषणा नहीं करना चाहते। क्योंकि हमने जीवन से यह सीखा है कि हर विचार को घोषणा की जरूरत नहीं होती। कुछ विचारों को समय चाहिए, कुछ को साधना चाहिए और कुछ को मौन में विकसित होने देना चाहिए। जब समय आएगा, श्रीकृष्ण स्वयं उस दिशा का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हम उस समय उस पथ पर आगे बढ़ जाएंगे।
हम जल्दबाजी नहीं करेंगे। हम रुकेंगे नहीं। हम निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे। हम अपने कर्म से पीछे नहीं हटेंगे। हम परिणाम श्रीकृष्ण पर छोड़कर निरंतर आगे बढ़ेंगे। यह केवल कंपनी नहीं, एक साधना है। उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड हमारे लिए केवल एक कंपनी नहीं है। यह हमारे लिए एक साधना है। यह उस विश्वास का परिणाम है कि यदि मनुष्य ईमानदारी से अपने कर्म के रास्ते पर चलता रहे तो परिस्थितियां धीरे-धीरे उसके पक्ष में रास्ता बनाती हैं। पत्रकारिता हमारे लिए केवल समाचार लिखना नहीं है। शब्दों के माध्यम से समाज से संवाद करना है। मीडिया हमारे लिए केवल व्यवसाय नहीं है। यह जिम्मेदारी है। और जीवन हमारे लिए केवल उपलब्धियां हासिल करने का नाम नहीं है। यह एक यात्रा है—जहां हर मोड़ पर कुछ सीखना है, हर परिस्थिति में स्वयं को बेहतर बनाना है और हर सफलता के बाद भी विनम्र बने रहना है। श्रीकृष्ण ही हमारे जीवन रथ के सारथी। आज जब उदित भास्कर की यह नई शुरुआत हो रही है, तब हम अपने जीवन के उस निर्णय को फिर दोहराना चाहते हैं—हमने अपने जीवन रथ की लगाम श्रीकृष्ण को सौंप दी है। अब हमें केवल अपने कर्म पर ध्यान देना है। रास्ता कठिन होगा तो चलेंगे। रास्ता लंबा होगा तो धैर्य रखेंगे। कहीं रुकावट आएगी तो उससे सीखेंगे। कहीं सफलता मिलेगी तो उसे श्रीकृष्ण का प्रसाद मानेंगे। क्योंकि जब सारथी श्रीकृष्ण हों तो रथ की गति से अधिक महत्वपूर्ण विश्वास होता है। हम जानते हैं कि हमारे हाथ में केवल कर्म है। फल हमारे हाथ में नहीं। इसलिए हम कर्म करते रहेंगे और फल की चिंता श्रीकृष्ण पर छोड़ते रहेंगे। नई सुबह की ओर उदित भास्कर नाम अपने आप में एक संदेश है। उदय का अर्थ है—नई शुरुआत। हर रात के बाद सुबह आती है। हर अंधकार के बाद प्रकाश आता है। हर ठहराव के बाद गति आती है। और हर नए संकल्प के साथ जीवन में एक नया अध्याय शुरू होता है। आज उदित भास्कर उसी नई सुबह का प्रतीक बनकर आपके सामने है। राइजिंग भास्कर के साथ हमारी अब तक की यात्रा को आपका जो प्रेम मिला, वही प्रेम और आशीर्वाद हम उदित भास्कर के लिए भी चाहते हैं। हम आपके सामने किसी बड़े दावे के साथ नहीं, बल्कि एक विनम्र संकल्प के साथ आए हैं। हम चलेंगे। निरंतर चलेंगे। अपनी पूरी क्षमता से कर्म करेंगे। और अपनी यात्रा की लगाम श्रीकृष्ण के हाथों में सौंपकर आगे बढ़ते रहेंगे।
श्रीकृष्ण को समर्पण
हे श्रीकृष्ण,
हमारे पास सपने हैं, लेकिन दिशा आपकी हो।
हमारे पास शब्द हैं, लेकिन उनमें सत्य और सार आपका हो।
हमारे पास कर्म करने की शक्ति है, लेकिन अहंकार न आए।
हमारे सामने रास्ते हों, लेकिन सही मार्ग आप दिखाएं।
हम आगे बढ़ें, लेकिन आपकी इच्छा के अनुरूप बढ़ें।
राइजिंग भास्कर और उदित भास्कर की यह यात्रा आपके चरणों में समर्पित है। आप सारथी बने रहें, हम कर्म करते रहें। जय श्रीकृष्ण।






