सारी पुस्तकें, पुरस्कार, परिचय, साहित्यिक उपलब्धियां, बशर्ते छिन जाए…मेरे हाथों में इतनी शक्ति रहे कि मैं कलम को थामकर चलाती रहूं : बसंती पंवार

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बात जब महिला की आती है तो उसके विषय में तो-नारी एक ऐसा दुर्ग है, जिसके भीतर पचास वर्ष रहकर भी उसका भूगोल तक नहीं समझा जा सकता अथार्थ वह बहुत कुछ छुपाने की क्षमता रखती है । जिन्दगी के कुछ ऐसे ही अध्याय मैं भी छुपाकर रखना चाहूंगी ।

आज जब मैं उस लिखे को पढ़ती हूं तो पहले तो यकीन नही नहीं होता कि यह मैंने लिखा फिर पाती हूं कि उसमें व्यंग्य भी है, कहानी भी हैै और भी बहुत कुछ है जिसे पढ़कर खूब हंसी आती है । और तरस इस बात पर आता है कि पत्र में तो मैंने तारीख लिखी मगर उस कहानी में नहीं…। और पत्र न जाने किस जहां में खो गया…।

दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर

9783414079 uditbhaskarnews@gmail.com

बियोंड द फेस : चेहरे के पीछे की कहानी…जी हां, आज से हम यह लीक से हटकर कॉलम शुरू कर रहे हैं। इसके तहत हम विशिष्ट हस्ती के साथ रूबरू होंगे। आज हमारी अतिथि हैं- श्रीमती बसंती पंवार। उनका विस्तार से परिचय प्रोग्राम के अंत में दिया है। हम पाठकों की जिज्ञासा बनाए रखते हुए सीधे मेहमान से रूबरू होते हैं।

  1. सवाल : अगर आपकी जिन्दगी पर कोई उपन्यास लिखा जाए तो उसका वो कौन-सा अध्याय होगा जिसे आप दुनिया से छिपाकर रखना चाहेंगी ?

उत्तर :  आज उम्र के जिस पड़ाव पर मैं हूं और जब पीछै मुड़कर देखती हूं तो कई अच्छी-बुरी घटनाएं…यादें…किस्से-कहानियॉं आदि कई रुपों में मेरा पीछा करते हुए नज़र आते हैं। उनको शब्द-बद्ध किया जाए तो कई उपन्यास लिखे जा सकते हैं, लेकिन सच लिखना आसान नहीं होता। जब छुपाने की बात आती है तो मेरे हिसाब से वह सभी छुपाया जाना चाहिए, जिससे किसी को तकलीफ हो, किसी का दिल दुखे, किसी का नुकसान हो, अपनों में, रिश्तों में कड़वाहट घुल जाए, बदले की…नफरत की भावना जन्म ले या कुछ और…। बात जब महिला की आती है तो उसके विषय में तो-नारी एक ऐसा दुर्ग है, जिसके भीतर पचास वर्ष रहकर भी उसका भूगोल तक नहीं समझा जा सकता अथार्थ वह बहुत कुछ छुपाने की क्षमता रखती है । जिन्दगी के कुछ ऐसे ही अध्याय मैं भी छुपाकर रखना चाहूंगी । अपनी कविता की दो पंक्तियां मेरी बात की पुष्टि करेंगी-

कैसे ढूंढ़ पाएगा कोई हमारे दर्द को

                      हमने दर्द के भीतर दर्द को छुपा रखा है…

  1. सवाल : आपने राजस्थानी साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाई । क्या कभी ऐसा क्षण आया जब बसन्ती पंवार की भीतर की स्त्री ने लेखिका से कहा हो-अब बस, मुझे भी अपने लिए जीने दो ।

उत्तर : बचपन से लिखने का शौक था। दीवारों पर लिखते-लिखते पता ही नहीं चला कि कब यहां तक पहुंच गई । अब तो लेखन और बसन्ती दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं । अगर ये कहूं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मैंने अपने लिए जीना ही अब शुरु किया है । मैंने सदैव परिवार को महत्व दिया है, खुद के लिए जीने को नहीं और आज भी मेरे लिए पहले परिवार तथा रिश्ते हैं । अब मेरे दो बहुत ही प्यारे मित्र भी हैं जिनके सहारे मैं अपने लिए जी पाती हूं और वही मुझे कुछ करने की ऊर्जा भी देते हैं । ये दोनों इतने अच्छे हैं कि मेरी इच्छा के विरुद्ध ये मेरी बात किसी को नहीं कहते । वो हैं- कागज, कलम । मेरा मन जिसमें विचारों की कलियां खिलती रहतीं हैं । कलम के सहारे कागज़ उन्हें अपने कलेजे में स्थान देकर उनका होना सार्थक कर देता है । और मैं तो यमराज जी से भी यही कहती हूं कि-

सुनो यमराज / जब तुम आओ / मुझसे मत छीनना / मेरे कागज-कलम / बस दो मिनट मुझे दे देना / लिख दूंगी मैं तुम्हारी / तारीफ में भी कुछ पंक्तियां…./ और चल पडूंगी / हंसते-मुस्कराते तुम्हारे साथ….।

  1. सवाल : आपकी उम्र और अनुभव को देखते हुए लोग आपसे परंपराओं की रक्षा की उम्मीद करते होंगे लेकिन ऐसी कौन-सी परंपरा है जिसे आप अगली पीढ़ी के लिए खत्म होते देखना चाहेंगी ?

उत्तर :  परंपराओं की अगर बात करते हैं तो हमारे ऋषि-मुनियों ने…बुजुर्गों ने उस समय के हिसाब से जो परंपराएं बनाई, वे कुछ हद तक उचित थीं लेकिन कालांतर में उसमे स्वार्थ…अनुशासन विहीन स्वतंत्रता का भाव जुड़ता चला गया, ऐसे में कुछ परंपराएं अभिशाप बनती चली गईं । उनमें दहेज प्रथा जिसका उद्देश्य सहयोग की भावना रहा, मृत्यु भोज जिसमें दुख की घड़ी में सभी का एक साथ मिलने का भाव रहा, ये आज भी रूप बदल-बदल कर, किसी न किसी रुप में जिंदा है । ऐसी परंपराओं का अगली पीढ़ी के लिए खत्म होना ही बेहतर है।

कुछ नई संस्कृतियां, जो हमारे भारत जैसे देश के लिए अभिशाप बन रही है जैसे-पश्चिमी संस्कृति…जिसमें परिवार की, रिश्तों की, बुजुर्गों की अवहेलना…संयुक्त परिवार का बिखरना…वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या…मोबाइल संस्कृति…मर्यादाओं का हनन…फीमेल के साथ अनैतिकता…संस्कृति….संवेदनाओं-भावनाओं का हांसिए पर आना आदि का पांव पसारना भी अनुचित है इसके दुष्परिणामों को ध्यान में रख कर युवा पीढ़ी को कारगार कदम उठाने की आवश्यकता है।

  1. सवाल : आप राजस्थानी भाषा की पहली महिला उपन्यासकार के रुप में पहचानी जातीं हैं अगर आपको अपनी पहचान से ’पहली महिला’ शब्द हटाकर केवल एक इंसान के रुप में जानी जाए, तो आप चाहेंगी कि लोग आपके बारे में क्या जाने ?

उत्तर : पहली महिला उपन्यासकार होने से पहले मैं एक इंसान थी और इस वाक्य के हट जाने के बाद भी इंसान ही रहूंगी । लोगों से भी यही उम्मीद करूंगी कि वे मुझे एक साधारण महिला के रुप में पहचाने । पद…प्रतिष्ठा…पहचान आदि से पहले इंसान में इंसानियत का होना आवश्यक है । और अगर ईश्वर और बड़ों के आशीर्वाद के फलस्वरूप कुछ हासिल हो भी गया हो तो खजूर का पेड़ न बनकर फलों से लदे वृक्ष की तरह नम्र जाना चाहिए ।

पद-प्रतिष्ठा-शोहरत / सब यहीं रह जाने हैं / मन में हो करुणा / हृदय में हो प्रेम / जिसके होनेे से जग महके / जिसमें जीवित हो इंसान…

  1. सवाल :  आपने राजस्थानी में लोरियों पर पुस्तक लिखी, जब आप किसी लोरी को याद करतीं हैं तो उसमें आपको अपनी मां की आवाज़ ज्यादा सुनाई देती है, अपने बचपन की कोई अधूरी इच्छा या उस दौर की कोई ऐसी टीस, जिसे आपने कभी शब्द नहीं दिए ?

उत्तर : मां का नाम आते ही चाहे कोई भी उम्र हो, मन भीग जाता है….उस अहसास को बार-बार जीने को मन करता है । आपके इस प्रश्न पर मुझे जीवन की वो ललक याद आती जो मुझे 50 वर्ष बाद ले जाती है बचपन के उस घर में…उन गलियों में….उसे मैं एक चमत्कार और दृढ़ इच्छा शक्ति ही कहूंगी । वरना 50 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद मैं उस घर तक कैसे पहुंच पाती ? मुझे वहां कौन पहचानता ? कौन उस घर में दाखिल होने देता जो कभी का बिक चुका था मगर कुछ घंटों की खोज के बाद न केवल मैं उस घर तक पहुंची बल्कि उस घर में मुझे उतना ही मान-सम्मान और अपनत्व मिला जो एक बेटी को मिलता है ।

वैसे तो इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती हां बचपन के एक इच्छा जरूर थी कि मैं डॉक्टर बन कर लोगों की दिलोजान से सेवा करूं…कुछ ऐसा गाऊं जिससे लोगों को सुकून मिले क्योंकि मैं बचपन में अक्सर कहा करती थी कि मैं डॉक्टर और लता मंगेशकर बनूंगी…मेरी इस बात पर सभी हंसते थे । वैसे टर तो फिर भी साथ रहा क्योंकि मैं मास्टर तो बन ही गई ।

कुछ बातों को शब्द नहीं दिए जा सकते उन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है । कुछ मजबूरियां…हमारा पुरुष प्रधान समाज…महिलाओं का लेखन…बंदिशे आदि कई कारण महिला लेखिकाओं के सामने होते हैं ।

बहुत कुछ कह देने के बाद भी / बहुत कुछ कहना / शेष रह जाता है / बहुत कुछ लिख देने के बाद भी / बहुत कुछ लिखना / शेष रह जाता है…

  1. सवाल :  आप व्यंग्यकार हैं क्या कभी आपने अपने ही जीवन, अपने ही किसी निर्णय या अपनी किसी कमजोरी पर ऐसा व्यंग्य लिखा है, जिसे पढ़कर सबसे ज्यादा हंसी भी आई हो और अपने ऊपर सबसे ज्यादा तरस भी ?

उत्तर :  व्यंग्य हमारे चारों ओर बिखरे हैं । दिन में कई बार हमारा व्यंग्यात्मक शब्दों से सामना होता है । वैसे तो मेरे सभी व्यंग्य चाहे हिन्दी में हो अथवा राजस्थानी भाषा में सभी हास्य व्यंग्य है । अपनी कमजोरी या किसी निर्णय पर तो व्यंग्य नहीं लिखा । हां वैसे तो कई घटनाएं हैं जो कभी हंसाती है तो कभी रुलाती भी है, एक बात अवश्य साझा करना चाहूंगी-बात 1961-1962 की रही होगी, तब हमारे घर में आटे के पीपे में एक चूहा मर गया…उस घटना को मैंने ’ऊंदरा’ नामक शीर्षक से राजस्थानी में लिखा और उसके साथ एक पत्र लिखकर भैया के ससुराल, भाभीजी को भेज दिया । आज जब मैं उस लिखे को पढ़ती हूं तो पहले तो यकीन नही नहीं होता कि यह मैंने लिखा फिर पाती हूं कि उसमें व्यंग्य भी है, कहानी भी हैै और भी बहुत कुछ है जिसे पढ़कर खूब हंसी आती है । और तरस इस बात पर आता है कि पत्र में तो मैंने तारीख लिखी मगर उस कहानी में नहीं…। और पत्र न जाने किस जहां में खो गया…।

  1. सवाल :  सत्तर वर्ष से अधिक की उम्र में आपने यूट्यूब को अपना मंच बनाया । क्या यह तकनीक से दोस्ती है, समय के साथ चलने की जिद है या भीतर बैठी उस लड़की की पुकार, जो आज भी दुनिया को कुछ नया सुनाना चाहती है ?

उत्तर :  देखिए सीखने की कोई उम्र नहीं होती । इंसान कहीं से कुछ भी सीख सकता है । यह   प्रक्रिया जीवन से मृत्यु पर्यन्त चलती ही रहती है । मुझे कुछ नया, हर नया सीखने की जिज्ञासा बचपन से ही रही है और आज भी है । पता नहीं क्या, कितना अपने भीतर समेट लेना चाहती हूं । उसे सिर्फ अपने तक ही सीमित नहीं रखना चाहती, सभी से साझा भी करना चाहती हूं । मुझे खुशी होती है जब मैं कुछ नया सीख कर उसका उपयोग करती हूं । यह सब इसलिए कर पाती हूं क्योंकि समय के साथ चलना चाहती हूं । कुछ ऐसा जो मेरे न रहने पर भी रहे क्योंकि जन्मना…बड़े होना…शादी…फिर बच्चे…उनकी शादियां…फिर बुढ़ाना और मर मर जाना…पीछे क्या? टनटन गोपाल…।

  1. सवाल : कल्पना कीजिए कि एक दिन आपकी सारी पुस्तकें, पुरस्कार, परिचय और साहित्यिक उपलब्धियां आपसे छिन जाएं, तब आपके पास ऐसा क्या बचेगा, जिसके सहारे आप खुद को फिर से बसन्ती पंवार कह सकेंगी ?

उत्तर :  सारी पुस्तकें…पुरस्कार…परिचय…साहित्यिक उपलब्धियां बशर्ते छिन जाए । मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि कोई मेरे भीतर के शब्द…मेरी भावनाएं…मेरी संवेदनाएं…मेरे अहसास…आत्मविश्वास…मेरी कलम…मेरा कागज़ न छीने…मेरे हाथों में इतनी शक्ति रहे कि मैं कलम को थामकर चलाती रहूं अगर ऐसा होगा तो एक नहीं, कई बसन्ती फिर से जी उठेंगी।

  1. सवाल : आपने अपनी रचनाओं में समाज, संस्कृति और परंपराओं की जगह दी लेकिन क्या कोई ऐसा सामाजिक सच, जिसे आपने बहुत करीब से देखा, महसूस किया मगर उस पर खुलकर लिखना उस समय संभव नहीं हुआ ?

उत्तर :  मेरी रचनाओं में महिला, समाज, संस्कृति, परंपराएं, संघर्ष आदि सभी कुछ है । ऐसे कई सच भी हैं जिन्हें बहुत करीब से महसूस किया…देखा…जिया भी है । ऐसा नहीं है कि लेखिकाएं नहीं लिखतीं लेकिन कुछ के लिए लिखना मुश्किल होता है । जैसा कि मैं पहले भी कह चुकी हूं कि हर सच लिखना संभव नहीं होता । बहुत कुछ लिखते भी हैं मगर उसे कल्पना की मीठी सी चासनी में डुबोकर…।

  1. सवाल : अगर आज की बसन्ती पंवार को अपने जीवन के शुरुआती दौर वाली बसन्ती से केवल एक चाय की प्याली के दौरान मुलाकात करने का अवसर मिले, तो आप उनसे क्या पूछेंगी और उन्हें कौन-सी एक बात बताकर विदा करेंगी ?

उत्तर : यह बहुत ही प्यारा और भावुक कर देने वाला सवाल है जो बचपन के उस भोले से…मासूम से समय में ले जाता है जिसे कभी भूलाया नहीं जा सकता । आपके इस सवाल पर मुझे एक गाना याद आ रहा है जिसे मैं अक्सर गुनगुनाती हूं – याद न जाए बीते दिनो की…जा के न आए जो दिन…दिल क्याूं बुलाए उन्हें…दिन जो पखेरु होते पिंजरे में मैं रख लेती…। बचपन में जब हमसे पूछा जाता था कि क्या बनना है तो सोचते थे कि हम बड़े कब बनेंगे लेकिन जब आज कोई पूछे तो झट से कह देंगे कि हमें तो बच्चा बनना है । जानते है कि बचपन वाला रविवार अब कभी लौटकर नहीं आएगा फिर भी मन उसके लिए मचलता है।

मेरे बचपन की बसन्ती मुझे मिल जाए तो मैं उसे कसकर गले लगा लूंगी और पूछूंगी कि बता मेरा ऐसा क्या गुनाह था ? तुम मुझे ऐसे तनहा छोड़कर क्यों चली गई ? और गई तो गई एक बार पीछे मुड़कर भी नहीं देखा कि तेरा प्रतिरुप कैसा है ? तू तो बहुत भोली और नादान थी फिर इतनी निष्ठुर कैसे हो गई ? आदि आदि।  वो मिल जाए और मैं उसे विदा कर दूं ! हरगिज नहीं…कभी भी नहीं…।  परंतु सत्य से मुंह भी तो नहीं मोड़ा जा सकता । मेरी कुछ पंक्तियां सुनिए-

              मगज जे प्रिंटर हुवतौ तो खयालां रा

              प्रिंटआउट निकाळ लेवता…

              मन जे ब्लूटूथ हुवतौ तो भावनावां रौ

              ट्रांसफर कर देवता…

              धड़कन जे पेनड्राइव हुवती तो जिनगाणी रौ

              बैकअप कर लेवता….

              जिनगाणी जे कम्प्यूटर हुवती तो बालपणौ

              री-स्टार्ट कर लेवता….

              बालपणौ जे री-स्टार्ट हुय जावतो तौ

              सगळै झमेलां सूं किनारौ कर लेवता...

एक बार पुनः आप सभी का हार्दिक आभार…धन्यवाद जो आपने मुझे इतना मान दिया । आपने जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उन सभी की सफलता के लिए संपूर्ण प्रकृति आपका सहयोग करे…धैर्य…कुशलता…विश्वास….अटूट बने रहें । ऐसी ही शुभकामनाओं…मंगल कामनाओं के साथ ढेरों आशीर्वाद…।  जय भारत…जय राजस्थान…जय राजसथानी।

(उपरोक्त सभी फोटो विभिन्न सम्मान व पुरस्कारों के।)

(दोहिती की शादी में पूरे परिवार के साथ।)

(उदित भास्कर कार्यालय में श्रीमती बसंती पंवार का सम्मान करते राखी पुरोहित।)

श्रीमती बसंती पंवार : एक परिचय

नाम:- बसन्ती पंवार। जन्म:- 5 फरवरी 1953 (बसन्त पंचमी), बीकानेर। माता-पिता:- स्व. श्रीमती रूकमा देवी , स्व. श्री राणालाल पंवार। शिक्षा:- एम. ए. (राजस्थानी भाषा), बी. एड. व्यवसाय:-“निरामय जीवन’’ एवं ’’केन्द्र भारती’’ मासिक पत्रिका जोधपुर के प्रकाशन विभाग कार्यालय में (अवैतनिक) कार्यरत, रिटायर्ड वरिष्ठ अध्यापिका । राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर की भूतपूर्व सदस्य। जुड़ाव:- महिलाओं की साहित्यिक संस्था “सम्भावना’’ की अध्यक्ष एवं अन्य संस्थाओं की सक्रिय सदस्य । राजस्थानी भाषा में प्रकाशित कृतियां- 1 .’‘सौगन‘’-1997, (दूसरा संस्करण-2022)। 2 ’’अैड़ौ क्यूॅं ?’’-2012 (दो उपन्यास)। 3 .’’जोऊं एक विस्वास’’-2018 (कविता संग्रह)। 4. ’’नुवौ सूरज’’-2017 (कहानी संग्रह)। 5. ’’खुशपरी’’-2022 (बाल कहानी संग्रह)। 6. ’’धरणी माथै लुगायां’’-2022 (हिन्दी से राजस्थानी में अनूदित काव्य संग्रह)। 7. ’’इंदरधनख’’ (संपादित गद्य संग्रह)-2022. 8. ’’हूंस सूं आभै तांई’’ (अनुवाद हिन्दी से राजस्थानी में-संस्मरणात्मक निंबध)-2023. 9. ’’राधा रौ सुपनौ’’ (कहानी संग्रह)-2023. 10 ’’चूंटिया भरुं ?’’ (व्यंग्य संग्रह)-2023. 11. ’’कमाल रौनक रौ’’ (बाल कहानी संग्रह)-2023. 12. “हालरियौ हुलरियौ” (बाल लोरी संग्रह) -2025. 13. “म्हैं बावळी” (काव्य संग्रह) -25 (महाराज मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित)। 14. हारूंली तो नीं (पद्मजा शर्मा की पुस्तक- हारुंगी तो नहीं का राजस्थानी भाषा में अनुवाद ) – 2026. 15. “कुंकूं पगलिया” पेली पोथी -2026. 16. “राजस्थानी भाषा या हरावळ : कमला कमलेश” (मनोग्राफ) प्रेस में। राजस्थानी भाषा में प्रकाशनाधीन कृतियाँ- 1. उपनिषद का राजस्थानी भाषा में अनुवाद। 2. हिन्दी से राजस्थानी शब्दकोष। 3. रचनावां म्हारी सिरजणहार (हिन्दी से राजस्थानी में अनुवाद)। 4. बाल कविता संग्रह। 5. “परदेस में रैवास कर हिन्दी री सेवा” (संस्मरण का अनुवाद)। हिन्दी भाषा में प्रकाशित कृतियां- 1. ’’कब आया बसंत’’-2016 (कविता संग्रह)। 2. ’’नाक का सवाल’’-2019 (व्यंग्य संग्रह)। 3. ’’नन्हे अहसास’’-2019 (काव्य संग्रह)। 4. ’’तलाश ढाई आखर की’’-2023 (कहानी संग्रह)। 5. ’’फाॅर द सेक ऑफ नोज’’ ’’नाक का सवाल’’ का अंग्रेजी में अनुवाद-2022. 6. ’’अपना अपना भाग्य’’ (राजस्थानी आत्मकथा का हिन्दी में अनुवाद)-2023. 7. ’’संस्कारों की सौरभ’’ (पत्र शैली में बाल निबंध । पं. जवाहरलाला नेहरु, बाल साहित्य अकादमी, राजस्थान द्वारा प्रकाशित)-2023. 8. “बचा रहे धरती का ऑंचल” (प्रकृति काव्य) -2024. 9. “अहसासों की दुनिया” (काव्य संग्रह) – 2025. 10. “अनुकृति -2025 (बसन्ती पंवार पर साहित्यक अंक), अनुकृति प्रकाशन, जयपुर. 11. “कागज़ पर रोया चॉंद” (काव्य संग्रह) प्रेस में। 12. “छिपकली रोबोट” (राजस्थानी वैज्ञानिक कथाओं का अनुवाद) प्रेस में। हिन्दी में प्रकाशनाधीन कृतियां- 1. ’’प्यार की तलाश में प्यार’’ (उपन्यास)। 2. “बहुत गड़बड़ है रे बाबा” (व्यंग्य संग्रह)। 3. बाल कहानी संग्रह। राजस्थानी और हिन्दी की पत्र-पत्रिकाओं / साझा संकलनों में कहानियां, कविताएं, लेख, व्यंग्य, लघुकथाएं, संस्मरण, पुस्तक समीक्षा आदि का लगातार प्रकाशन। आकाशवाणी जोधपुर, जयपुर दूरदर्शन से वार्ता, कहानी, कविता, व्यंग्य आदि का प्रसारण । राजस्थानी भाषा के ’’आखर’’ कार्यक्रम (जयपुर) में और जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर, राजस्थानी विभाग के ’गुमेज’ कार्यक्रम में भागीदारी। विशेष-राजस्थानी भाषा की पहली महिला उपन्यासकार, पहली लोरीकार एवं दूसरी व्यंग्यकार । हिन्दी लेखक परिवार और साहित्य टीवी के यूट्यूब चैनल पर स्वर कलाकार। दो बार महामहिम राज्यपाल द्वारा (चैन्नई के राज्यपाल महामहिम राज्यपाल श्रीमान सुरजीत सिंह बरनाला और राजस्थान के राज्यपाल महामहिम श्रीमान हरिभाऊ किशनराव वागड़े के कर कमलों द्वारा पुरस्कृत ।)। राजस्थान विश्व विद्यालय, जयपुर से शोधार्थी सुमन वर्मा द्वारा *बसन्ती पंवार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर पीएचडी हो रही है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से पुरस्कृत उपन्यास के राजस्थानी भाषा में अनुवाद का कार्य, केन्द्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा सौंपा गया है । साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका *अनुकृति संपादक-डॉ. जयश्री शर्मा । जुलाई – सितम्बर 2025 का विशेषांक (बसन्ती पंवार पर केन्द्रित)। यूट्यूब पर me basant नाम से चेनल । पुरस्कार और सम्मान : 1. ‘राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर’ से ’’सौगन‘’, राजस्थानी उपन्यास पर ’‘सांवर दैया पेली पोथी पुरस्कार’’ -1998. 2. पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलांग मेघालय की तरफ से ’‘डा. महाराजा कृष्ण जैन स्मृति सम्मान ’’-2011. 3. तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी चैन्नई और तमिलनाडु बहुभाषी लेखिका संघ चैन्नई की तरफ से ‘‘साहित्यसेवी सम्मान’’-2011 (चैन्नई के राज्यपाल महामहिम सुरजीत सिंह जी के कर कमलों द्वारा)। 4. ’आकाश गंगा चेरीटेबल ट्रष्ट’ लूणकरणसर, बीकानेर से सम्मान-2011. 5.’‘नवोदय सबरंग साहित्यकार परिषद’’ जोधपुर से ’‘बेस्ट स्टोरी राइटर’’ सम्मान -2011. 6. ’‘जगमग दीपज्योति ‘मासिक पत्रिका अलवर की तरफ से ’’श्रीमती नवनीत गांधी स्मृति’’ सम्मान-2013. 7. बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, जोधपुर से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोज्य कवयित्री
सम्मेलन में सम्मान-2014. 8. ’मरूगुलशन’ त्रेमासिक पत्रिका के 75 वें अंक के लोकार्पण समारोह में सम्मान-2014. 9. लाॅयनेस क्लब जोधपुर द्वारा कवयित्री सम्मेलन में सम्मान-2015.
10. ‘सर्जनात्मक संतुष्टि संस्थान ’द्वारा प्रो. प्रेम शंकर श्रीवास्तव स्मृति पर आयोज्य कार्यक्रम में मरूगुलशन में प्रकाशित ’’नारी संवेदना’’ रचना पर ’’गुणवंती सम्मान’’-2015. 11. न्यू ऋतंभरा साहित्य मंच कुम्हारी, जिला दुर्ग -छ. ग. द्वारा न्यू ऋतंभरा मुंशी प्रेमचंद एवं साहित्य अलंकरण-2015. 12. महिमा प्रकाशन -छ.ग. द्वारा ’’त्रिवेणी साहित्य सम्मान’’-2015. 13. ‘डाॅ. नृसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्य प्रतिभा पुरस्कार’’-2016. 14. बृजलोक साहित्य-कला-संस्कृति अकादमी, फतेहाबाद (आगरा) उ. प्र. द्वारा ’‘श्रेष्ठ साहित्य साधिका सम्मान-2017. 15. ’’वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान’’ (रजत पदक )-2017. 16. ’’षब्द निष्ठा सम्मान’’ (अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता अजमेर)-2017. 17. ’’दिव्यतूलिका साहित्यायन’’ सम्मान-2017 (ग्वालियर, मध्य प्रदेश). 18. ’’षब्द निष्ठा सम्मान’’ (अखिल भारतीय व्यंग्य प्रतियोगिता अजमेर)-2018. 19. ’’महादेवी वर्मा सम्मान’’(साहित्य कला एवं संस्कृति संस्थान, हल्दीघाटी नाथद्वारा)-2018. 20. ’’पत्र लेखन सम्मान’’(डाॅ. सूरज सिंह नेगी, सनातन प्रकाशन, जयपुर)-2019. 21. साहित्य क्षेत्र में सतत् सराहनीय योगदान हेतु ’’मधेषवाद के प्र. नेता गजेन्द्रनारायण सिंह सम्मान’’-2019 (नेपाल भारत मैत्री वीरांगना फाउंडेशन, काठमांडौ रौतहट, नेपाल से)। 22. ’’मत प्रेरणा सम्मान’’-2019 (निखिल पब्लिशर्स, आगरा, उत्तर प्रदेश)। 23. राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) द्वारा ’’पं. मुखराम सिखवाल स्मृति रा. साहित्य सृजन पुरस्कार’’ (14 सितम्बर 2019)। 24. स्टोरी मिरर द्वारा ’’लिटरेरी केप्टिन’’ सम्मान-2019. 25. ’’अखिल भारतीय मां की पाती बेटी के नाम’ प्रतियोगिता-2019, सम्मान (जिला प्रसाशन एवं महिला अधिकारिता, बून्दी द्वारा)। 26. अखिल हिन्दी साहित्य सभा (अहिसास) नासिक (महाराष्ट्र) द्वारा पुस्तक-’’नाक का सवाल’’ पर ’’साहित्य श्री’’ सम्मान-2019. 27.’’क्रान्तिधरा अरान्र्तष्ट्रीय साहित्य साधक सम्मान’’(क्रान्तिधरा मेरठ, साहित्यिक महाकुम्भ-2019 में )। 28. ’’आध्यात्मिक काव्यभूषण’’ की मानद उपाधि-2019 (भारतीय संस्कृति एवं भाषा प्रचार परिषद करनाल (हरियाणा) तथा कलमपुत्र काव्य कला मंच मेरठ उ. प्र. (भारत) द्वारा हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में आयोजित कार्यक्रम में। 29. ’’अग्निशिखा गौरव रत्न’’ सम्मान (साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए, अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच मुम्बई द्वारा ) – 2019. 30. ’’मैना देवी पांड्या स्मृति राजस्थानी लेखिका पुरस्कार-2019 (नेम प्रकाशन, नागौर, डेह). 31. ’’चौपाल साहित्य रत्न सम्मान’’-राष्ट्रीय कवि चौपाल, शाखा-दौसा (राजस्थान)-2020. 32. ’’नव सृजन कला प्रवीर्ण अवार्ड’’-छत्रपति प्रशिक्षण संस्थान (रजि.) कानपुर (उ. प्र.) द्वारा-2020. 33. ’’शब्द तरंग सम्मान’’- सुशील निर्मल फाउंडेशन, आणि शब्दांगण कला साहित्य सांस्कृतिक परिषद, वसई (महाराष्ट्र) द्वारा-2020. 34. ’’शब्द निष्ठा सम्मान’’ (श्रेष्ठ समीक्षक)-2020. 35. ’’मनांजलि साहित्य सम्मान’’ (मनांजलि मंच, चण्डीगढ़)-2020. 36. ’’नव सृजन कला प्रवीण अवार्ड’’-2020 छत्रपति प्रशिक्षण संस्थान (रजि.) कानपुर द्वारा । 37. ’’श्रेष्ठ साहित्यकार सम्मान’’-2020 साहित्यागार जयपुर द्वारा । 38. जैमिनी अकादमी पानीपत (हरियाणा) द्वारा विभिन्न सम्मान- 2020, 21, 22. 39. ’’विशिष्ट साहित्यकार सम्मान’’ अदबी उड़ान साहित्यिक संस्था द्वारा-2021. 40. ’’भामाशाह सम्मान’’ लायंस क्लब इंटरनेशनल द्वारा-2021. 41. ’’लोक साहित्य रत्न सम्मान’’ (अवनि सृजन साहित्य कला, मंच इंदौर, म.प्र. द्वारा)-2021. 42 .’’मायड़ भाषा सेवा सम्मान’’ विश्व मायड़ भाषा दिवस 21 फरवरी 2021, महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश, बाबा रामदेव शोधपीठ, राजस्थानी विभाग और इंटेक चेप्टर की ओर से सम्मान-2021. 43. ’’राजस्थली सम्मान’’-2021 (श्रीडंूगरगढ़, बीकानेर)
44. ’’हिन्दी साहित्य मनीषी’’ मानद उपाधी-2021 (साहित्य मण्डल, नाथद्वारा). 45.. अन्तर्राष्ट्रीय महिला मंच द्वारा ’’राजस्थान कवयित्री सम्मान’’-2022. 46. ’’मीरा बाई स्मृति सम्मान’’(अन्तर्राष्ट्रीय महिला मंच द्वारा)-2022. 47. ’’माणक अलंकरण’’ पुरस्कार–2022. 48. ’’कादम्बरी’’ पुरस्कार-2023 (जबलपुर, म. प्र.). 49. ’’बाल साहित्य सृजक सम्मान’’-2023 (पं.जवाहरलाल नेहरु बाल साहित्य अकादमी, राजस्थान द्वारा). 50. ’’द्वारका प्रसाद सक्सेना स्मृति पुरस्कार’’ (अनुवाद पर)-2024 (हिन्दी लेखिका संघ, म. प्र. भेपाल द्वारा). 51. ’’रामवचनसिंह आनंद बाल साहित्य शिखर सम्मान’’-2024 (हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली दरभंगा, बिहार द्वारा) 52. विभिन्न कार्यक्रमों में डिजीटल / ऑनलाइन सम्मान । 53. “साहित्य अर्चन” पुरस्कार-2024 ( नाक का सवाल-व्यंग्य संग्रह पर (साहित्य अर्चन मंच, नागपुर, महाराष्ट्र). 54. “सावित्री चौधरी खूमसिंह साहित्य पुरस्कार”-2024 ( चूंटिया भरूं ? व्यंग्य संग्रह पर । प्रयास संस्थान, चूरु द्वारा) 55. ” निर्मला समृति अनुवाद साहित्य सम्मान “-2024 (राजस्थानी आत्मकथा-आप आप रा भाग के हिन्दी अनुवाद “अपना अपना भाग्य” पर । (निर्मला स्मृति साहित्यिक समिति, चरखी दादरी, हरियाणा से)। 56. “बाल साहित्य भूषण” की मानद उपाधि-2025 “संस्कारों की सौरभ” पत्र शैली में निबंध पर (साहित्य मंडल, नाथद्वारा से)। 57. “नारी शक्ति सम्मान”-2025 (गायत्री देवी एवं द संस्कृति फाऊंडेशन, जोधपुर से)। 58. “लाल बहादुर शास्त्री सम्मान”-2025 (मगसम-मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच, दिल्ली)। 59. गंगा अधिकारी स्मृति बाल कहानी (सांत्वना) पुरस्कार-2025 (बाल प्रहरी / बाल साहित्य संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड)। 60. ” मारवाड़ गौरव सम्मान “-2025 (मारवाड़ सिविल सोसाइटी, जोधपुर)। 61. “अखिल भारतीय बाल साहित्य वैद्य बीरबल दास शिखर पुरस्कार-25” (मातुश्री विद्यादेवी बाल साहित्य शोध एवं विकास संस्थान, सिरसा, हरियाणा) 62. “कमला कमलेश राजस्थानी भाषा साहित्य पुरस्कार”-2025 (ज्ञान भारती संस्थान, कोटा द्वारा, चूंटिया भरूं ? व्यंग्य संग्रह पर)। 63. “अखिल भारतीय अनुराग साहित्य सेवा सम्मान-2025” (लालसोट, दोसा । अपना अपना भाग्य-अनुवाद ) (राजस्थान के राज्यपाल महामहिम श्री हरिभाऊ किशनराव वागड़े के कर कमलों द्वारा)। 64. “सम्पर्क श्री सम्मान”-2026, साहित्यिक अवदान हेतु (जयपुर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था- सम्पर्क साहित्य संस्थान, जयपुर द्वारा)। 65. ” मातृभाषा रत्न ” मानद उपाधि सम्मान-21 फरवरी 2026 (शब्द प्रतिभा बहु क्षेत्रिय सम्मान फाउंडेशन, नेपाल द्वारा)। 66. संभवम् सम्मान -2026 (आगरा की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं शैक्षिक संस्था संभवम् द्वारा)। 67. प्रो. रामगोपाल गुप्ता हिन्दी भाषा संस्मरण पुरस्कार-2026 (हिन्दी पुस्तकालय समिति, डीग द्वारा)

बसन्ती पंवार :  ’विष्णु’, 90, महावीरपुरम, चौपासनी फनवल्र्ड के पीछे, जोधपुर -342008 (राज.)। मोबाइल : -9950538579

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