44 साल बाद उषा गर्ग को मिला न्याय : महापौर ने सौंपा भूखंड का पट्‌टा

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उषा गर्ग का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। महापौर प्रसन्न चंद मेहता की पहल और नगर निगम प्रशासन के प्रयासों से 44 साल पुराने भूखंड आवंटन मामले का समाधान निकला और उषा गर्ग को वैकल्पिक भूखंड का पट्टा सौंपा गया। पट्टा हाथ में आते ही उषा गर्ग भावुक हो गईं

उदित भास्कर. जोधपुर 

चार दशक से अधिक समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रही उषा गर्ग का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। महापौर प्रसन्न चंद मेहता की पहल और नगर निगम प्रशासन के प्रयासों से 44 साल पुराने भूखंड आवंटन मामले का समाधान निकला और उषा गर्ग को वैकल्पिक भूखंड का पट्टा सौंपा गया। पट्टा हाथ में आते ही उषा गर्ग भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

उपायुक्त ललित सिंह ने बताया कि कीर्ति नगर आवासीय योजना के सेक्टर-सी में वर्ष 1982-83 में उनके पति स्वर्गीय विमल स्वरूप गर्ग को लॉटरी के माध्यम से 30×60 वर्गफीट का भूखंड संख्या 49 आवंटित किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भूखंड की पूरी राशि जमा करवा दी गई थी, लेकिन मौके पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा होने और उसे एक्सचेंज डीड जारी किए जाने के कारण गर्ग परिवार को भूखंड का भौतिक कब्जा नहीं मिल सका। पति के निधन के बाद भी उषा गर्ग ने अपने अधिकार की लड़ाई जारी रखी। वह लंबे समय तक संबंधित विभागों में न्याय की गुहार लगाती रहीं। वर्ष 2023 से पहले उन्होंने जेडीए के बाहर धरना दिया और अगस्त 2025 से नगर निगम में लगातार धरने पर बैठकर अपने हक की मांग उठाती रहीं। महापौर प्रसन्न चंद मेहता, उपमहापौर विजय सिंह पंवार, नगर निगम आयुक्त राहुल जैन और उपायुक्त ललित सिंह की मौजूदगी में पट्टा सौंपे जाने का यह क्षण भावुक कर देने वाला रहा। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अपना अधिकार मिलने पर उषा गर्ग ने महापौर और नगर निगम प्रशासन का आभार जताया।

पति के सपने को पूरा करने के लिए जारी रखी लड़ाई

विमल स्वरूप गर्ग को तत्कालीन नगर सुधार न्यास, जोधपुर की ओर से कीर्ति नगर आवासीय योजना के सेक्टर-सी में भूखंड संख्या 49, आकार 30×60 वर्गफीट, आवंटित किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भूखंड की पूरी राशि जमा करवा दी गई थी, लेकिन मौके पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा होने और उसे एक्सचेंज डीड जारी किए जाने के कारण गर्ग परिवार को भूखंड का भौतिक कब्जा नहीं मिल सका।

इसके बाद विमल स्वरूप गर्ग की पत्नी उषा गर्ग ने मूल भूखंड के बदले उसी योजना में दूसरा भूखंड आवंटित करने की मांग उठाई। पति के निधन के बाद भी उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी और संबंधित विभागों के चक्कर काटने के साथ धरने का रास्ता अपनाया।

धरने से लेकर पट्टा मिलने तक जारी रहा संघर्ष

उषा गर्ग वर्ष 2023 से पहले जेडीए के बाहर धरने पर बैठीं। इसके बाद अगस्त 2025 से नगर निगम में लगातार धरना देकर अपने अधिकार की मांग करती रहीं। लंबे संघर्ष के बाद नगर निगम की बोर्ड बैठक में 10 फरवरी 2024 को प्रस्ताव पारित कर उन्हें उसी योजना में समान क्षेत्रफल और समान कीमत का वैकल्पिक भूखंड देने का निर्णय लिया गया। स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान, जयपुर की ओर से 21 अगस्त 2026 को सक्षम स्वीकृति जारी होने के बाद आवंटन की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके तहत कीर्ति नगर आवासीय योजना, सेक्टर-सी में 30×60 वर्गफीट आकार का वैकल्पिक भूखंड आवंटित कर पट्टा सौंपा गया।

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