भजन संध्या सहित होंगे अनेक धार्मिक आयोजन, भगवान को लगेगा खीर-चुरमें का भोग
उदित भास्कर. जोधपुर
भगवान विष्णु के अवतार और गुर्जर समाज के आराध्य देव भगवान श्री देवनारायण के प्रिय घोड़े लीलाधर का जन्मोत्सव भादवी छठ 17 सितंबर, गुरुवार को रातानाडा स्थित श्री देवनारायण मंदिर सहित शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। भादवी छठ को चंद्रमा षष्ठी तिथि पर होता है, जो शक्ति और विजय का प्रतीक मानी जाती है।
मंदिर व्यवस्थापक मुलाराम गुर्जर ने बताया कि मंदिर सेवक रामप्रसाद महाराज के सान्निध्य में मंदिर समिति की ओर से मनाए जाने वाले इस पर्व में भक्तजन बड़े उत्साह के साथ खीर-चुरमें का प्रसाद अपने घरों से बनाकर मंदिर लाते हैं और भगवान श्री देवनारायण के दर्शन करते हैं। इस अवसर पर मंदिर को आकर्षक फूलमंडली, रंगोली और विशेष रोशनी से सजाया जाएगा और देव प्रतिमाओं का आलोकित श्रृंगार किया जाएगा।
संध्या आरती के बाद भगवान को खीर-चुरमें का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया जाएगा और शाम 7 बजे से मध्यरात्रि तक भजन संध्या होगी। आयोजन की तैयारियों को लेकर मंदिर में मंदिर समिति के मूलाराम फारक, बाबुलाल हाकला, राजेन्द्र हाकला, दीपक हाकला, बलविंरेदर भडाणा, एडवोकेट राजेन्द्र कटारिया, किशन कटारिया, किशन कालस, मुकेश कटारिया, महेश धाभाई, शंकरलाल डोई, हरीश नागड़ी एवं नवयुवक मंडल की मेजबानी में बैठक आयोजित हुई और कार्यक्रम को सफल व भव्य बनाने का निर्णय लिया गया।
मंदिर समिति सदस्य बाबुलाल हाकला ने बताया कि यह पर्व गुर्जर समाज की आस्था, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन समाज के लोग एकत्र होकर सामूहिक पूजा करते हैं और एकजुटता का संदेश देते हैं। मंदिर सेवक रामप्रसाद महाराज ने बताया कि भादवी छठ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि नैतिकता, भाईचारे और वीरता के आदर्शों का भी संदेश देता है। भगवान श्री देवनारायण के जीवन से प्रेरित होकर लोग अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।






