प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के जिस सप्लायर अली चाचा नाम सामने आया है उसको अली चाचा के अलावा अली जान, अली बाबा और अली अब गुल दाउद जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह भी जानकारी सामने आई है कि इस सप्लायर के तार जैसलमेर के भूमिगत तस्करों के साथ सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जैसलमेर के पूर्व जाबांज एसपी पंकज चौधरी ने जिस समय गाजी फकीर की फाइल खोली थी, उस समय अली अब गुल दाउद नाम के तस्कर का नाम भी सामने आया था। जाहिर है कि अली चाचा के तार तब से सामने आ चुके थे और पंकज चौधरी का राजनीतिक साजिश के चलते 48 घंटों में ट्रांसफर होने के साथ ही सारा मामला दब गया।
दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर
12 अक्टूबर को पाकिस्तानी ड्रोन से आरडीएक्स, हथियार और कारतूसों की ड्रॉपिंग मामले में नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल नजर आया। एएनटीएफ हेरोइन की सप्लाई के भ्रम में अंधेरे में तीर चलाता रहा और आरडीएक्स ड्रोन से आ गया। इस आरडीएक्स से देश में बड़ी वारदात हो सकती थी, मगर सबसे बड़ा सवाल है कि हेरोइन का इनपुट था तो आरडीएक्स, हथियार और कारतूसों की ड्रॉपिंग कैसे हो गई? क्या एएनटीएफ का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल रहा या कोई कहानी गढ़ी जा रही है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के जिस सप्लायर अली चाचा का नाम सामने आया है उसके बारे में बताया जाता है कि अली चाचा को अली जान, अली बाबा और अली अब गुल दाउद जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह भी जानकारी सामने आई है कि इस सप्लायर के तार जैसलमेर के भूमिगत तस्करों के साथ सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जैसलमेर के पूर्व जाबांज एसपी पंकज चौधरी ने जिस समय गाजी फकीर की फाइल खोली थी, उस समय अली अब गुल दाउद नाम के तस्कर का नाम भी सामने आया था। जाहिर है कि अली चाचा के तार तब से सामने आ चुके थे और पंकज चौधरी का राजनीतिक साजिश के चलते 48 घंटों में ट्रांसफर होने के साथ ही सारा मामला दब गया। ज्ञात हुआ है कि अली अब गुल दाउद नाम के तस्कर का संबंध गाजी फकीर से जुड़ा था। यही नहीं तत्कालीन कई तस्करों से भी अली अब गुल दाउद के तार जुड़े होने के संकेत मिले थे। इनमें कई तस्कर अब भूमिगत हो गए हैं और कई तस्करों ने पर्यटन और होटल व्यवसाय की ओर रुख कर लिया है। कई तस्करों के नहरी भूमि पर मुरब्बे भी हैं। हालत यह है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नागरिकता को लेकर जो शिकंजा कसा जा रहा है उसके बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में अफरा-तफरी मची हुई है। यही नहीं पाकिस्तान पार से साजिशों का दौर जारी है।
पिछले साल मई में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई थी। उसके बाद खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला था कि भविष्य में सीमा पार से मादक पदार्थों की ही नहीं आरडीएक्स की खेप भी भारत में आ सकती है। लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा एजेंसियां नहीं जागी। 12 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान के श्रीगंगानगर बॉर्डर पर पाकिस्तान ड्रोन से आरडीएक्स, हथियर और कारतूसों की ड्रॉपिंग के मामले में रिपोर्ट है कि ड्रॉपिंग की इस डील के लिए पंजाब के सुखविंदर ने जिस मोबाइल का इस्तेमाल किया वो एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के मुखबिर के जरिए उस तक पहुंचा था। उसने इसी नंबर से पंजाब के पंजाब के अलीका निवासी हैंडलर कुलवंत से बात की। उसने पाकिस्तान के अली चाचा, उर्फ अली जान उर्फ अली बाबा उर्फ अली अब गुल दाउद से डील की और ड्रॉपिंग हुई। हालांकि रिपोर्ट में बताया गया है कि एएनटीएफ के पास हेराइन की डील और ड्रॉपिंग का इनपुट था। फिर आरडीएक्स की खेप कहां से आ गई? क्या सुरक्षा एजेंसियों की चूक हुई या हेरोइन के नाम पर सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह कर देश में धमाकों की साजिश की जा रही थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में आईजी-एएनटीएफ विकास कुमार कहते हैं कि सीमा पार से आने वाला विस्फोटक देश में बहुत बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था। समय रहते सभी एजेंसियों ने मिलकर पेशेवर तरीके से इसका भंडाफोड़ किया। जबकि एजेंसियों का पेशवर रुख की बजाय लापरवाही सामने आई है। जाहिर है कि एजेंसियों के पास इनपुट ही गलत था और एजेंसियों की तैयारी पूरी नहीं थी। दैनिक भास्कर को एडीजी-एटीएस दिनेश एमएन ने बताया कि बॉर्डर पर ड्रॉपिंग के केस में पंजाब के जो दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। उनसे अभी पूछताछ चल रही है। इसमें जो भी नाम सामने आ रहे हैं, उनकी तलाश की जा रही है। यहां गौरतलब है कि मुख्य सप्लायर पाकिस्तान के अली चाचा का जिन सीमावर्ती जैसलमेर के भूमिगत तस्करों के साथ संपर्क सामने आया है, उस एंगल से जांच की ही नहीं जा रही। जबकि भारत पाकिस्तान का जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर बॉर्डर फेंसिंग होने के बाद भी संवेदनशील है और पाकिस्तान और भारत में बैठे गद्दार नई नई साजिशों को अंजाम दे रहे हैं।
गौरतलब है कि जैसलमेर के तत्कालीन एसपी पंकज चौधरी देश के गद्दारों के लिए आफत बनकर उभरे थे मगर राजनीतिक आकाओं की वजह से उनका ट्रांसफर रातों रात हो गया। यही वजह है कि देश विरोधी ताकतों और नकाबपोश एक्सपोज होने से रह गए। जरूरत इस बात कि है कि इस मामले की जांच मे पक्षकारों का संबंध जैसलमेर के भूमिगत तस्कारों से भी जोड़कर देखने की जरूरत है।
दैनिक भास्कर में 21 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट








