आस्था और अध्यात्मक का नव अध्याय…विश्व का प्रथम 109 चंदन पार्श्व पद्मावती तीर्थ, जहां है महाशक्ति की अद्भुत महिमा

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हर साल नवरात्रि पर उमड़ती है आस्था, आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति का स्थल जन-जन के बीच लोकप्रिय

विशेष रिपोर्ट : सुमनेश व्यास. जोधपुर

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विश्व का प्रथम 109 चंदन पार्श्व पदमावती तीर्थ महाशक्ति पीठ जन-जन की आस्था का केंद्र बना हुआ है। पिछले दिनों यहां नवरात्रा पर आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। जोधपुर के पार्श्व पद्मावती धाम में नवरात्रि पर अखंड हवन, 108 पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन के लिए जनता उमड़ पड़ी थी।

नवरात्रि का पावन पर्व हो  अन्य धार्मिक अवसर, वातावरण में मंत्रोच्चार की गूंज, हवन की पवित्र अग्नि और भक्ति की दिव्य ऊर्जा यहां स्फूर्त होती रहती है। श्रद्धालुओं की आस्था और भी प्रगाढ़ हो जाती है। जोधपुर के तनावड़ा स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम में ऐसा ही आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलता है। यहां नवरात्रि के अवसर पर लगातार हवन और धार्मिक साधना की जाती है। जैन धर्म की आराध्य शासन देवी माता पद्मावती की उपासना के साथ यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

पदम् विभूषित महामंडेश्वर गुरुमेया आचार्य श्री चंदन प्रभा जी महाराज सा मंदिर के निचले हिस्से में 108 पद्मावती माता के मंदिर हैं। मंदिर के ऊपरी हिस्से में 109 पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर है।
यह दुनिया का पहला 109 चंदन पार्श्व पद्मावती तीर्थ धाम है, जिसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इस धाम की सबसे विशेष बात यह है कि यहां एक ही स्थान पर स्थापित भगवान पार्श्वनाथ की 108 प्रतिमाएं हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और गहरी धार्मिक आस्था का केंद्र हैं।

जोधपुर के इस पावन धाम में भक्ति, साधना और श्रद्धा का संगम देखने को मिलता है। पिछले दिनों नवरात्रि पर हवन और साधना में यहां आस्था का दिग्दर्शन हुआ। जोधपुर के तनावड़ा क्षेत्र में स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम में नवरात्रि के पावन अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व देखने को मिला था। धाम में लगातार हवन किया गया। हवन कुंड में प्रज्वलित अग्नि, मंत्रों का उच्चारण और श्रद्धालुओं की भक्ति से पूरा  वातावरण आध्यात्मिक दिखाई दिया। नवरात्रि का पर्व शक्ति, साधना और आराधना का प्रतीक माना जाता है। पिछले दिनों श्रद्धालुओं ने यहां विशेष पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित किया। सभी ने आराध्य के समक्ष सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। पार्श्व पद्मावती धाम में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। माता पद्मावती को भगवान पार्श्वनाथ की शासन देवी के रूप में पूजा जाता है। जैन परंपरा में माता पद्मावती की आराधना का विशेष स्थान है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान इस धाम में पूजा-पाठ और साधना का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।

एक ही धाम में भगवान पार्श्वनाथ की 108 प्रतिमाएं

श्री पार्श्व पद्मावती धाम की सबसे खास विशेषता यहां स्थापित भगवान पार्श्वनाथ की 108 प्रतिमाएं हैं। एक ही परिसर में भगवान पार्श्वनाथ के अनेक स्वरूपों के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अनुभव माना जाता है। भगवान पार्श्वनाथ जैन तीर्थंकर हैं। जैन धर्म के अनुयायी उन्हें त्याग, तपस्या, अहिंसा और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाले तीर्थंकर के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। धाम में स्थापित 108 प्रतिमाएं इस धार्मिक स्थल को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतोष का अनुभव करते हैं। नवरात्रि के दौरान हवन और पूजा-अर्चना के साथ इन प्रतिमाओं के दर्शन का लाभ लिया गया। मंदिर की आध्यात्मिक छटा और धार्मिक वातावरण लोगों को कुछ समय के लिए सांसारिक व्यस्तताओं से दूर होकर भक्ति में लीन होने का अवसर प्रदान करता है।

जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र

तनावड़ा स्थित पार्श्व पद्मावती धाम केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि जैन समाज की आस्था और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ और माता पद्मावती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। धार्मिक स्थलों का महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे समाज में सद्भाव, संयम, करुणा और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा भी देते हैं। जैन धर्म की शिक्षाएं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का संदेश देती हैं। ऐसे में इस तरह के धार्मिक आयोजन लोगों को इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक शांति का संगम

श्री पार्श्व पद्मावती धाम में भारतीय संस्कृति, पूजा, साधना और आध्यात्मिक परंपराओं का समावेश देखने को मिलत है। भगवान पार्श्वनाथ की 108 प्रतिमाओं के दर्शन और माता पद्मावती की आराधना के साथ यहां श्रद्धालु धार्मिक आस्था में सहभागी बन रहे हैं। तनावड़ा स्थित यह धाम जैन समाज के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां  आस्था, अहिंसा और आत्मसंयम के संदेश के साथ यह धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति कराता है।

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