डीआईजी एवं नोडल अधिकारी कम्युनिटी पुलिसिंग पंकज चौधरी आईपीएस ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को दिए आवश्यक निर्देश : कालिका यूनिट और कम्युनिटी पुलिसिंग की सक्रिय भूमिका; डार्क स्पॉट, पार्किंग, भीड़ और देर रात घर वापसी पर विशेष फोकस
दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर
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नवरात्र और गरबा उत्सव में उमंग के साथ सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। महिलाओं, युवतियों और बच्चियों की सुरक्षित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस ने गरबा आयोजनों में कालिका यूनिट और कम्युनिटी पुलिसिंग के बेहतर उपयोग पर जोर दिया है। डीआईजी एवं नोडल अधिकारी कम्युनिटी पुलिसिंग पंकज चौधरी, आईपीएस ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को केवल गरबा पंडाल तक सीमित रखने के बजाय पार्किंग, प्रवेश-निकास द्वार, पंडाल के पीछे के रास्तों, डार्क स्पॉट और कार्यक्रम के बाद घर लौटने वाले मार्गों तक विस्तार देने पर जोर है। आयोजकों से पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी, महिला हेल्प डेस्क, सुरक्षा गार्ड और वालंटियर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है।
भीड़ में सादी वर्दी में महिला पुलिस की नजर
गरबा आयोजनों में सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भीड़ के बीच महिलाओं को होने वाली परेशानी की पहचान करने में सहायक हो सकती है। विभिन्न राज्यों में विशेष महिला पुलिस दस्तों और तकनीकी निगरानी के प्रयोगों से मिले अनुभवों को भी सुरक्षा व्यवस्था में उपयोगी माना गया है।
असली चुनौती : गरबा खत्म होने के बाद की सुरक्षा
जयपुर में गरबा आयोजकों से मिले फीडबैक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक देर रात सुरक्षित घर वापसी रहा। कार्यक्रम समाप्त होने पर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बाहर निकलने, पार्किंग क्षेत्र में भीड़, सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता और सुनसान रास्तों को लेकर महिलाओं ने चिंता जताई। इसलिए पंडाल के बाहर भी पुलिस पेट्रोलिंग और वालंटियर्स की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी गई है। आयोजकों ने भीड़ में धक्का-मुक्की, बिना अनुमति फोटो या वीडियो बनाने, छेड़छाड़ तथा महिलाओं को असहज महसूस होने की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए महिला हेल्प डेस्क और त्वरित सहायता टीम की जरूरत बताई है। नाबालिग प्रतिभागियों के लिए अभिभावक संपर्क व्यवस्था और अलग निगरानी का सुझाव भी दिया गया।
पुलिस के साथ समाज भी बने सुरक्षा का सहयोगी
कम्युनिटी पुलिसिंग का मूल उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच सहयोग को मजबूत करना है। नवरात्र जैसे बड़े आयोजनों में आयोजक, सुरक्षा कर्मचारी, वालंटियर, अभिभावक और आम नागरिक भी सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकते हैं। समय पर सूचना देना और संदिग्ध अथवा असहज स्थिति की जानकारी पुलिस तक पहुंचाना सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को प्राथमिकता : पंकज चौधरी
“गरबा और नवरात्र उत्सव के दौरान महिलाओं एवं बच्चियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। पुलिस के साथ आयोजक, वालंटियर और आमजन भी सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। सभी जिलों में कालिका यूनिट और कम्युनिटी पुलिसिंग का बेहतर उपयोग किया जाए, ताकि उत्सव का माहौल सुरक्षित, सकारात्मक और सहज बना रहे।”
गरबा सुरक्षा के 10 गोल्डन रूल्स
1. हेल्पलाइन नंबर रखें तैयार
आपात स्थिति में 112 पर पुलिस सहायता ली जा सकती है। जरूरी नंबर मोबाइल में सेव रखें।
2. प्रवेश-निकास की जानकारी पहले लें
पंडाल में पहुंचते ही मुख्य प्रवेश, निकास, महिला हेल्प डेस्क और पुलिस सहायता केंद्र का स्थान जान लें।
3. मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें
देर रात कार्यक्रम होने पर मोबाइल की बैटरी पर्याप्त रखें और जरूरी संपर्क नंबर उपलब्ध रखें।
4. समूह में घर लौटें
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद संभव हो तो परिवार या मित्रों के समूह के साथ घर लौटें।
5. सुनसान रास्तों से बचें
मुख्य और रोशनी वाले मार्ग का उपयोग करें। जरूरत होने पर पुलिस सहायता लें।
6. बच्चों पर रखें विशेष नजर
नाबालिग बच्चों के साथ अभिभावक लगातार संपर्क में रहें और उनके पास अभिभावक का मोबाइल नंबर रखें।
7. असहज स्थिति को नजरअंदाज न करें
छेड़छाड़, पीछा करने या किसी अन्य परेशानी की स्थिति में तुरंत सुरक्षा टीम या पुलिस को सूचना दें।
8. बिना अनुमति फोटो-वीडियो पर सतर्क रहें
किसी व्यक्ति द्वारा असहज तरीके से फोटो या वीडियो बनाए जाने पर कार्यक्रम की सुरक्षा टीम को तुरंत जानकारी दें।
9. पार्किंग में भी रहें सावधान
वाहन पार्क करने के बाद सुनसान स्थान पर अकेले न जाएं। रोशनी वाले रास्ते और भीड़ का उपयोग करें।
10. सुरक्षा में सहयोग करें
पुलिस, आयोजकों और वालंटियर्स द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी स्वयं कार्रवाई करने के बजाय संबंधित सुरक्षा कर्मियों को दें।
संदेश साफ है : उत्सव भी, सुरक्षा भी
डीआईजी पंकज चौधरी ने कहा कि नवरात्र और गरबा केवल नृत्य और उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता का अवसर भी है। पुलिस की मुस्तैदी + आयोजकों की जिम्मेदारी + कम्युनिटी की भागीदारी = सुरक्षित उत्सव। यही समन्वय महिलाओं और बच्चियों के लिए नवरात्र को अधिक सहज, सुरक्षित और सकारात्मक बना सकता है।







