नवोदय सबरंग साहित्य परिषद : अनुराधा-नरेंद्र अडवानी की मेजबानी में काव्य गोष्ठी में खूब जमा रंग

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जयपुर से आए विशेष मेहमान शैलेंद्र ढड्‌ढा की रचनाओं के साथ 15 रचनाकारों और गायकों की प्रस्तुति ने गोष्ठी में रस घोला, संचालन अशफाक अहमद फौजदगार ने किया, अनुराधा अडवानी ने आभार जताया…।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

9783414079 uditbhaskarnews@gmail.com

शब्द-शब्द बोल उठे और अर्थों ने नए आयाम दिए और साथ में कहानी और संगीत की बौछार हुई तो गोष्ठी का आनंद ही कुछ और नजर आया। नवोदय सबरंग साहित्य परिषद की ओर से द्विमासिक काव्य गोष्ठी और संगीत की महफिल श्रीमती अनुराधा-नरेंद्र अडवानी की मेजबानी में इनकम टैक्स पावटा सी रोड स्थित सभाकक्ष में आयोजित हुई।

गोष्ठी में 15 रस-मर्मज्ञ उपस्थित थे। जयपुर से आए विशेष मेहमान शैलेंद्र ढढ्ढा विशिष्ट अतिथि थे। शुभारंभ संयोजिका श्रीमती अनुराधा अडवानी ने स्मृतिशेष एनके मेहता की तंजोमिज़ाज की बेहतरीन कविता- “सिक्का” की पुरअसर पंक्तियां-“चले जा रहे हैं, चले जा रहे हैं, हम किन रास्तों पे चले जा रहे हैं” से किया। तत्पश्चात ओमप्रकाश गोयल ‘सायर’ ने-“ये प्यार है सनम जी, बढ़ता है धीरे-धीरे’, अब्दुल रहीम सांखला ने- ‘ग़मों का शिकवा नहीं करते” तथा रजा मोहम्मद ने-“जिनको चाहा था पूजा था उनको” से किया।

उसके बाद नए गजलकार रोशन अली ‘कौसर’ ने अपना कलाम-“नाम उल्फत का सभी लेते हैं” पेश किया। कार्यक्रम की एकमात्र कवयित्री डॉ.दीपा परिहार की ग़जल के अनूठे शेर-‘बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल, सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल” को श्रोता देर तक गुनगुनाते रहे। दिलीप पुरोहित ने राजस्थानी कविता-“बागां रा मुरझाया फूल”सुनाई।

अशफाक अहमद फौजदार ने कार्यक्रम का सफल संचालन करने के साथ ही “दोस्तो वो भी मुकद्दर का सिकंदर है तो सही” सुनाकर वाहवाही लूटी। हंसराज बारासा’हंसा’ ने “सादगी में ही जब शराफ़त का रंग हो” सुनाई। पत्रकार व कहानीकार मिश्रीलाल पंवार ने अपनी चर्चित कहानी-“नंदिनी” का पाठ कर उपस्थित समूह में त्याग और संवेदना का सैलाब भर दिया।

असरार आहिल ने मीरा भक्ति को शब्द दिए 

जाने-माने गजलकार असरार ‘आहिल’ ने मीरा-भक्ति पर अपनी नवीनतम रचना के अंश-“जिसके शीशों में हर ओर है मोहन ही मोहन” सुनाकर सबको भक्तिमय कर दिया। अतिथि कवि शैलेन्द्र ढढ्ढा ने तीन रचनाएं सुनाई, उनकी पंक्ति “दीन है वो कवि, जो कविता को नए शब्द नहीं दे पाता” ने कवि- समुदाय को झकझोर दिया। श्याम गुप्ता ‘शान्त’ ने मनुष्य के अवमूल्यन की रचना-‘फर्क’ व विशुद्ध हास्य रचना-‘ ये फोनवा भी कैसे-कैसे’ सुनाकर कक्ष में हास्य का संचार कर दिया। गायक असगर अली ने फिल्मी गीत-“कहां तक मन को छलेंगे ये अंधेरे” सुनाया। अंत में चिकित्सक व गायक डॉ. महेंद्र जैन ने प्रसिद्ध पार्श्वगायक तलत महमूद के गीत “जलते हैं जिसके लिए” तथा “तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी” परोसकर सबको भाव-विभोर कर दिया।
ढाई घंटे तक चले इस शानदार कार्यक्रम के अंत में संयोजिका व मेजबान श्रीमती अनुराथा अडवानी ने सभी कवि, शायर, कलमकार एवं गायकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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