रंगों ने रची सृजन की कहानी, 76 रंगोलियों में से चुनी गईं 8 उत्कृष्ट कृतियां

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जैन समाज की रंगोली प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बिखेरी कल्पना और कला की छटा, वरिष्ठ साहित्यकार ऋचा शरद अग्रवाल ने निभाई निर्णायक की भूमिका

राखी पुरोहित. जोधपुर 

जैन समाज की ओर से आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में कला, कल्पना और रंगों का खूबसूरत संगम देखने को मिला। प्रतियोगिता में 76 प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए रंगों के माध्यम से विविध भावों और विषयों को आकार दिया। किसी रंगोली में पारंपरिक भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई दी तो किसी में आधुनिक सोच और रचनात्मक कल्पना ने आकर्षित किया।

प्रतियोगिता में वरिष्ठ साहित्यकार ऋचा शरद अग्रवाल को निर्णायक के रूप में आमंत्रित किया गया। उनके सामने 76 प्रतिभागियों में से 8 उत्कृष्ट रंगोलियों का चयन करने की चुनौती थी। प्रत्येक रंगोली अपने आप में एक अलग कहानी कह रही थी, इसलिए अंतिम चयन आसान नहीं रहा।

 

रंगों की बारीकियों, डिजाइन की मौलिकता, विषय की अभिव्यक्ति, कलात्मक संतुलन और प्रस्तुति को ध्यान में रखते हुए रंगोलियों का मूल्यांकन किया गया। प्रतिभागियों ने रंगों को केवल सजावट का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि उनमें भाव, विचार और कल्पना भी उकेरी। ऋचा शरद अग्रवाल ने कहा कि रंगोली भारतीय परंपरा की ऐसी कला है, जिसमें रंगों से रचना और रचना से रिश्ते जुड़ते हैं। प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों को अपनी कला प्रदर्शित करने के साथ आत्मविश्वास और सृजनशीलता को नए रंग देने का अवसर दिया।

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