अध्यात्म, कला और जीवन मूल्यों से ओत-प्रोत कार्यक्रम का डूडी फार्म, झंवर रोड पर हुआ समापन
राखी पुरोहित. जोधपुर
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शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा 11 से 14 अक्टूबर तक भव्य ‘चैतन्य देवियों की झांकी’ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उल्लास के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। डूड़ी फार्म, झंवर रोड पर सजी इस अलौकिक झांकी ने शहरवासियों को अध्यात्म, कला और जीवन मूल्यों का अनूठा और गहरा अनुभव कराया।

चार दिनों तक चले इस आयोजन के अंतिम दिन भी झांकी में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। माँ लक्ष्मी, माँ दुर्गा, माँ काली, माँ सरस्वती और माँ करणी सहित नव-देवियों के सजीव स्वरूपों के दर्शन कर हर कोई भाव-विभोर हो गया। इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें प्लास्टर या काष्ठ की मूर्तियों के स्थान पर नियमित राजयोग मेडिटेशन और ध्यान साधना करने वाली बहनों व कन्याओं ने देवियों के सजीव स्वरूप प्रस्तुत किए। उनकी अद्वितीय स्थिरता, एकाग्रता और तेज आभा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
11 अक्टूबर को आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में शहर के कई गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि: महामण्डलेश्वर स्वामी ज्ञानस्वरूपआनंद महाराज, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी (IRS), श्रीमती इंडिया इंटरनेशनल सिद्धि जौहरी, पूर्व महापौर वनीता सेठ, भाजपा नेता वरुण धाणदिया, कांग्रेस जिला अध्यक्ष ओंकार वर्मा, डॉ. सुगंधा गोयल, डॉ. बिंदु टेक, पार्षद वैभव पुरोहित, पार्षद भानुकुमार सत्यानी, व्यवसायी मनीष धारीवाल, योग गुरु गजेंद्र सिंह परिहार और योग गुरु रेखा पंवार उपस्थित रहे।

संस्था प्रतिनिधि: सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी शील दीदी, ब्रह्माकुमारी फूल दीदी, मीनू दीदी और शुचि दीदी ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। नशा मुक्ति और संस्कारों पर लघु नाटिका : झांकी के दौरान प्रस्तुत की गई सामाजिक सुधार और नशा मुक्ति पर आधारित लघु नाटिका मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इसके माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया गया कि यदि हम बेटियों के साथ-साथ बेटों को भी घर में उचित नैतिक संस्कार दें, तो समाज में आपराधिक प्रवृत्तियों को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी शील दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ‘झांकी’ का वास्तविक और गहरा अर्थ “स्वयं के भीतर झांकना” है। हमें इन पर्वों के माध्यम से अपने भीतर की बुराइयों और विकारों को देवियों के चरणों में समर्पित कर सात्विक जीवन अपनाना चाहिए।आयोजकों ने बताया कि देवियों के अस्त्र-शस्त्र केवल बाह्य प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह हमारे मन में छिपी नकारात्मकता और अहंकार रूपी ‘महिषासुर’ का वध करने की आंतरिक प्रेरणा देते हैं।
नारी सशक्तिकरण और सकारात्मक समाज निर्माण के इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए, ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा आगामी 16 अक्टूबर से जोधपुर में निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन कोर्स का शुभारंभ किया जा रहा है। यह चार दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन जोधपुर वासियों के मन में आत्म-अवलोकन, नारी सम्मान और एक सशक्त जीवन शैली अपनाने की गहरी प्रेरणा छोड़ गया है।








