औद्योगिक संस्थानों, सरकारी व गैर-सरकारी अस्पतालों और भवन निर्माण क्षेत्र के श्रमिकों को बोनस देने की मांग; श्रम विभाग से तत्काल निरीक्षण और दोषियों पर कार्रवाई का आग्रह
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
दीपावली से पहले असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बोनस भुगतान सुनिश्चित करने तथा श्रमिकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र (आर.सी.टी.यू.) ने श्रम आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों, सरकारी एवं गैर-सरकारी अस्पतालों, सरकारी विभागों और भवन निर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए श्रम विभाग से प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में श्रमिकों को नियमानुसार बोनस का लाभ दिलाने, औद्योगिक संस्थानों का निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रमुखता से शामिल है।

बोनस भुगतान को लेकर श्रमिकों की चिंता
राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों, सरकारी एवं गैर-सरकारी अस्पतालों तथा सरकारी विभागों में ठेकेदारों के अधीन कार्यरत असंगठित श्रमिकों को दीपावली से पहले बोनस का भुगतान कराने की मांग उठाई गई है।
यूनियन का कहना है कि बड़ी संख्या में श्रमिक विभिन्न संस्थानों में ठेकेदारी व्यवस्था के अंतर्गत काम करते हैं। ऐसे श्रमिकों के लिए त्योहार के समय बोनस का भुगतान आर्थिक राहत का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। परिवार की जरूरतों, घरेलू खर्चों और त्योहार से जुड़ी आवश्यकताओं के बीच बोनस मिलने से श्रमिकों को मदद मिल सकती है।
यूनियन ने बोनस अधिनियम, 1965 तथा अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित संशोधित नियम 2007 का हवाला देते हुए पात्र श्रमिकों को नियमानुसार बोनस दिलाने की मांग की है। हालांकि, किसी श्रमिक की पात्रता, बोनस की दर और भुगतान की समयसीमा का निर्धारण संबंधित कानून, लागू नियमों तथा प्रतिष्ठान की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
श्रम विभाग पर कर्तव्य में उदासीनता का आरोप
ज्ञापन में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। यूनियन प्रतिनिधियों का आरोप है कि औद्योगिक संस्थानों में श्रम कानूनों के पालन की प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण कई श्रमिक अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
यूनियन ने विशेष रूप से श्रम निरीक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थानों में नियमित और प्रभावी भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता है। संगठन का मानना है कि केवल कागजी प्रक्रियाओं के आधार पर श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं की जा सकती। इसके लिए वास्तविक परिस्थितियों की जांच, कर्मचारियों से संवाद और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक है। ये आरोप यूनियन की ओर से लगाए गए हैं।
संयुक्त जांच दल बनाकर निरीक्षण करने की मांग
राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र ने श्रम विभाग से औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग की है। यूनियन के अनुसार, ऐसे दलों के माध्यम से संस्थानों में कार्यरत श्रमिकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

संगठन चाहता है कि जांच के दौरान ठेका श्रमिकों की संख्या, उनके रोजगार से संबंधित दस्तावेज, बोनस भुगतान के रिकॉर्ड और लागू श्रम नियमों के अनुपालन की जांच की जाए। यदि किसी प्रतिष्ठान में पात्र श्रमिकों का बोनस बकाया पाया जाता है, तो नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
यूनियन ने यह भी मांग की है कि दीपावली के अवसर पर श्रमिकों के हितों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल अनियमितताओं की पहचान करना नहीं, बल्कि श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकार दिलाना भी होना चाहिए।
भवन निर्माण श्रमिकों का मुद्दा भी उठाया
ज्ञापन में भवन निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं को भी शामिल किया गया है। निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में श्रमिक अस्थायी अथवा ठेकेदारों के माध्यम से काम करते हैं। ऐसे श्रमिकों के रोजगार, मजदूरी और अन्य सुविधाओं से संबंधित मामलों में नियमानुसार निगरानी आवश्यक है।
यूनियन ने मांग की है कि भवन निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले पात्र श्रमिकों को भी लागू प्रावधानों के अनुसार बोनस का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
संगठन का जोर इस बात पर है कि श्रमिक चाहे किसी औद्योगिक इकाई में काम करता हो, अस्पताल में ठेकेदार के अधीन कार्यरत हो या निर्माण स्थल पर अपनी सेवाएं दे रहा हो, उसके अधिकारों से जुड़े मामलों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। संबंधित संस्थानों और ठेकेदारों की जिम्मेदारियों का निर्धारण लागू कानूनों के अनुसार किया जाना चाहिए।
श्रमिक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर रखीं मांगें
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, श्रमिक प्रतिनिधि मंडल ने सीटीयू के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में कॉमरेड गोपीकिशन, कॉमरेड बुजाकिशोर, कॉमरेड नदीम खान, वहीदुद्दीन, हबीबुरहमान, चांद अली रंगरेज, फिरोज खान, शेर खान, राजेन्द्र सिंह, अनवर खान, सुनील सहित अनेक श्रमिक प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधियों ने असंगठित श्रमिकों के लिए बोनस भुगतान सुनिश्चित कराने और श्रम विभाग की निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की। उनका कहना था कि श्रमिकों को उनके अधिकारों के लिए बार-बार संघर्ष करने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। विभागीय स्तर पर समय रहते कार्रवाई होने से विवादों को कम किया जा सकता है।
यूनियन ने श्रम आयुक्त से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित संस्थानों की जांच कराने तथा पात्र श्रमिकों को बोनस दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
क्षेत्रीय संयुक्त श्रम आयुक्त ने कार्रवाई का आश्वासन दिया
ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्रीय संयुक्त श्रम आयुक्त की मौजूदगी का भी प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है। यूनियन के अनुसार, क्षेत्रीय संयुक्त श्रम आयुक्त ने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
श्रमिकों को समय पर लाभ दिलाना बड़ी चुनौती
दीपावली जैसे त्योहार से पहले बोनस भुगतान की मांग असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण विषय है। हालांकि, बोनस का अधिकार प्रत्येक श्रमिक के मामले में लागू कानून और उसकी पात्रता पर निर्भर करता है। इसलिए श्रम विभाग के लिए जरूरी है कि वह शिकायतों की जांच करते समय संबंधित दस्तावेजों, रोजगार की प्रकृति और लागू प्रावधानों को ध्यान में रखे।
यदि किसी प्रतिष्ठान में बोनस भुगतान में अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार उसका समाधान किया जाना चाहिए। वहीं, जहां श्रमिकों की शिकायतें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाई जातीं, वहां स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा।
राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। संगठन की प्रमुख मांग है कि असंगठित क्षेत्र के पात्र श्रमिकों को दीपावली से पहले बोनस का लाभ दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और श्रम कानूनों के अनुपालन की निगरानी मजबूत की जाए।







