धमकी ऐसे समय में आई है जब भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोट चोरी के नाम पर आंदोलन के नाम पर लोकतंत्र में अराजग स्थिति मची हुई है। बताया जा रहा है कि भारत में इस स्थिति का चीन फायदा उठाकर मोदी सरकार पर दबाव बनाना चाहता है।
दिलीप कुमार पुरोहित. बीजिंग/दिल्ली
चीन ने भारत को धमकी दी है कि वो लद्दाख को भारत का केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता है। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोट चोरी के नाम पर आंदोलन के नाम पर लोकतंत्र में अराजग स्थिति मची हुई है। बताया जा रहा है कि भारत में इस स्थिति का चीन फायदा उठाकर मोदी सरकार पर दबाव बनाना चाहता है।
यही नहीं चीन ने लद्दाख की 28 जगहों पर अपना दावा किया है। चीन ने मंगलवार को कहा कि भारत सरकार द्वारा नाम बदलने से इन जगहों पर भारत का मालिकाना हक नहीं हो जाता। ये इलाके हमारे हैं और भारत ने इसके नाम बदले हैं। बताया जाता है कि भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्पि्रंग जैसे इलाके भी सम्मिलित हैं। यह वही इलाके हैं जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैर कानूनी बताया है।
इधर चीन की आपत्ति पर विदेश मंत्रालय ने पलटवार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है। जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।
भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जलस्रोत शामिल हैं। पहाड़-चोटियों में अतीशा गिरि, कनीष्क पीक, करुण पीर पर्वत, मार्तंड गिरि, द्रक कार्पो, जोलमोरी, रिनचेन जांगपो, साक्यश्री गिरि, मारपा लोत्सावारी, मिलारेपा कांगरी, शिव री, जोरावर पीक और महेश्वररी हैं। दर्रे-ग्लेशियर में चापचिंगल दर्रा, शचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर तथा जमीन के इलाकों में ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा शामिल है। इसी तरह घाटी-जलस्रोत में श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंट शामिल है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इन जगहों के नाम तय करके सरकारी नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी सही पहचान बताना है।
अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई
चीन की आपत्ति जताने के बाद अभी तक अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मगर भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और हमारी भूमि और स्थान हम तय करेंगे। हमें किसी की दखलअंदाजी की जरूरत नहीं। भारत ने साफ किया कि हमें डराया-धमकाया नहीं जा सकता। हम अपनी सीमाओ की रक्षा करना भी जानते हैं और हम हमारी सीमाओं का नाम भी रखने के लिए स्वतंत्र हैं।








