मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव के बीच बड़ा सवाल—क्या प्रधानमंत्री कोई अप्रत्याशित कदम उठाएंगे?
अगर मध्यावि चुनाव होते हैं तो भाजपा को फायदा हो सकता है और उदित भास्कर के आकलन के अनुसार अकेली भाजपा को 379 सीटें मिल सकती हैं
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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देश की राजनीति में इन दिनों चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बहस तेज है। विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन और सत्तापक्ष के साथ बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच सोशल मीडिया पर यह अटकल भी चर्चा में है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा भंग कर मध्यावधि चुनाव की राह खोल सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान सामने नहीं आया है लेकिन चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा भंग कर पुन: नया जनादेश प्राप्त करने का कदम उठाकर एक बार फिर सबको चौंका सकते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव
अक्टूबर 2026 के शुरुआती दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई सहित कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हुए। विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष के कुछ नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है और इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूचियों को सही, अद्यतन और दोहराव से मुक्त रखने के लिए पुनरीक्षण आवश्यक है। आयोग ने पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों का भी उल्लेख किया है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी चौंकाने वाला कदम उठा सकते हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी उन्हें बधाई दी। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर यह चर्चा की जा रही है कि प्रधानमंत्री विपक्ष को अप्रत्याशित राजनीतिक चुनौती देने के लिए मध्यावधि चुनाव का रास्ता चुन सकते हैं। इस चर्चा के समर्थक इसे नए जनादेश की संभावित रणनीति के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
लोकसभा भंग करने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
भारत में लोकसभा का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष होता है, हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत इसे पहले भी भंग किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 85(2)(b) के अनुसार राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकते हैं। व्यवहार में यह प्रक्रिया संसदीय शासन व्यवस्था और मंत्रिपरिषद की सलाह से जुड़ी होती है। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद यदि समय से पहले लोकसभा भंग करने का निर्णय लेते हैं, तो उसके संवैधानिक परिणाम होंगे। इसके बाद निर्वाचन आयोग को चुनाव की प्रक्रिया और कार्यक्रम से संबंधित निर्णय लेने होंगे। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 18वीं लोकसभा का कार्यकाल 24 जून 2024 से 23 जून 2029 तक निर्धारित है। इसका अर्थ है कि सामान्य परिस्थितियों में अगला लोकसभा चुनाव 2029 तक होना है। समय से पहले चुनाव की स्थिति तभी बनेगी जब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले उसे भंग किया जाए।
क्या मध्यावधि चुनाव में भाजपा को मिल सकता है नया जनादेश?
यदि भविष्य में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनती है, तो मतदाताओं को केंद्र में नई सरकार चुनने का अवसर मिलेगा। भाजपा और उसके सहयोगी दल अपने शासनकाल के कार्यों तथा नीतियों के आधार पर जनादेश मांग सकते हैं। विपक्षी दल सरकार की नीतियों, चुनाव प्रक्रिया और दूसरे सार्वजनिक मुद्दों को लेकर मतदाताओं के सामने अपनी दलीलें रख सकते हैं। अंतिम निर्णय मतदाता ही करते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भाजपा की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नया जनादेश प्राप्त करने की रणनीति पर मंथन कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के चुनावों का कितना असर?
राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति के विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। किसी राज्य में किसी दल का बेहतर प्रदर्शन उसके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा सकता है और दूसरे दलों की रणनीति पर असर डाल सकता है। इसलिए पश्चिम बंगाल या अन्य राज्यों के चुनावी परिणामों को लोकसभा चुनाव के संभावित परिणाम का संकेत माना जा रहा है। राज्य और केंद्र के चुनावों में मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन भाजपा का हाल ही में हिंदू कार्ड और राष्ट्रीय मुद्दों पर जनता के बीच जाना उन्हें लोकप्रिय बना रहा है।
विपक्ष की मांग और सरकार की संभावित रणनीति
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का आंदोलन चुनावी संस्थाओं की भूमिका और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर केंद्रित है। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहा है, जबकि निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी और प्रशासनिक दायरे में संचालित किए जाने की बात कहता है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार के सामने राजनीतिक संवाद, आरोपों का जवाब देने और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रही शंकाओं पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने जैसे विकल्प है, लेकिन बढ़ते राजनीति तनाव में ऊर्जा खपाने की बजाय समय रहते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नया दांव खेल सकते हैं और उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही लोकसभा भंग कर नया जनादेश प्राप्त करेंगे।
18वीं लोकसभा में प्रमुख दलों की वर्तमान स्थिति
| क्रम | राजनीतिक दल | सांसद |
|---|---|---|
| 1 | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 240* |
| 2 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 98 |
| 3 | समाजवादी पार्टी (SP) | 37 |
| 4 | अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) | 28* |
| 5 | द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) | 22 |
| 6 | तेलुगु देशम पार्टी (TDP) | 16 |
| 7 | शिवसेना (एकनाथ शिंदे) | 13 |
| 8 | जनता दल (यूनाइटेड) | 12 |
| 9 | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–शरदचंद्र पवार (NCP-SP) | 8 |
| 10 | लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) | 5 |
| 11 | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) | 4 |
| 12 | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | 4 |
| 13 | वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) | 4 |
| 14 | आम आदमी पार्टी (AAP) | 3 |
| 15 | इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) | 3 |
| 16 | झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) | 3 |
| 17 | शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) | 3 |
| 18 | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) | 2 |
| 19 | CPI (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन | 2 |
| 20 | जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 2 |
| 21 | जनसेना पार्टी | 2 |
| 22 | जनता दल (सेक्युलर) | 2 |
| 23 | राष्ट्रीय लोक दल (RLD) | 2 |
| 24 | विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) | 2 |
| 25 | आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) | 1 |
| 26 | ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) | 1 |
| 27 | एआईएमआईएम (AIMIM) | 1 |
| 28 | अपना दल (सोनेलाल) | 1 |
| 29 | असम गण परिषद (AGP) | 1 |
| 30 | भारत आदिवासी पार्टी | 1 |
| 31 | हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) | 1 |
| 32 | केरल कांग्रेस | 1 |
| 33 | एमडीएमके (MDMK) | 1 |
| 34 | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-अजित पवार) | 1 |
| 35 | राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) | 1 |
| 36 | रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) | 1 |
| 37 | शिरोमणि अकाली दल (SAD) | 1 |
| 38 | सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) | 1 |
| 39 | यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) | 1 |
| 40 | जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) | 1 |
| 41 | निर्दलीय सांसद | 7** |
स्रोत: लोकसभा सचिवालय की जुलाई 2026 की संशोधित पार्टी-स्थिति पर आधारित रिपोर्ट और डिजिटल संसद की वेबसाइट
यदि मध्यावधि चुनाव होते हैं तो देश में नया जनादेश का उदित भास्कर का आकलन
| क्रम | राजनीतिक दल/समूह | 2024 में सीटें | अनुमान |
|---|---|---|---|
| 1 | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 240 | 379 |
| 2 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 99 | 54 |
| 3 | समाजवादी पार्टी (SP) | 37 | 20 |
| 4 | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | 29 | 16 |
| 5 | द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) | 22 | 12 |
| 6 | तेलुगु देशम पार्टी (TDP) | 16 | 9 |
| 7 | जनता दल (यूनाइटेड) (JD-U) | 12 | 6 |
| 8 | अन्य सभी दल एवं निर्दलीय | 88 | 47 |
| कुल | 543 | 543 |








