अदालतों के चक्कर और मुकदमों की लंबी प्रक्रिया से मिल सकती है मुक्ति, मीडिएशन बनेगा विवादों के समाधान का नया रास्ता

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जोधपुर में 22 नवंबर को विशेष जागरूकता सेमिनार, पूर्व न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी और मीना कोठारी देंगे जानकारी; आमजन के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

देश में न्यायालयों में लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या और न्याय पाने के लिए वर्षों तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया के बीच मीडिएशन (मध्यस्थता) विवादों के समाधान का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आया है। पारिवारिक विवाद हों, वैवाहिक मतभेद, तलाक के मामले, संपत्ति विवाद, चेक अनादरण या व्यापारिक लेन-देन से जुड़े मामले, आपसी बातचीत और प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से इनका समाधान निकालने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसी महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से जोधपुर में 22 नवंबर को एक विशेष निःशुल्क जागरूकता सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।

वर्ष 2023 में संसद द्वारा मीडिएशन अधिनियम बनाए जाने के बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी दिशा में पूर्व न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी एवं श्रीमती मीना कोठारी की पहल पर यह सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार जोधपुर में निजी स्तर पर इस विषय को लेकर इस तरह का आयोजन संभवतः पहली बार किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि हर विवाद का समाधान न्यायालय में लंबी मुकदमेबाजी के माध्यम से ही निकालना आवश्यक नहीं है। कई मामलों में बातचीत, समझौते और मध्यस्थता के जरिए भी विवाद का समाधान संभव है।

क्या है मीडिएशन और कैसे करता है काम?

मीडिएशन का सामान्य अर्थ मध्यस्थता है। इसमें विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है। इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित मध्यस्थ यानी समाधानकर्ता दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं और उनके बीच आपसी सहमति बनाने में मदद करते हैं।

इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष को विजेता और दूसरे को पराजित घोषित करना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान तलाशना है जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें। इसमें विवाद के मूल कारणों को समझकर आपसी सहमति से समझौते तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है।

डॉ. विनीत कोठारी के अनुसार किसी भी प्रकार के सिविल मुकदमों अथवा विवादों में प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से समझौता वार्ता की जा सकती है। संबंधित पक्ष न्यायालय से जुड़े मीडिएशन सेंटर अथवा निजी मीडिएशन सेंटर में आपसी बातचीत के माध्यम से समझौता करार कर सकते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत न्यायालय से डिक्री प्राप्त की जा सकती है।

न्यायालयों पर मुकदमों का भार कम करने में मददगार

देश के न्यायालयों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। मुकदमों की लंबी प्रक्रिया के कारण पक्षकारों को समय, धन और मानसिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। कई बार छोटे विवाद भी वर्षों तक चलते रहते हैं। ऐसे में मीडिएशन न्यायिक व्यवस्था के लिए सहयोगी माध्यम साबित हो सकता है।

यदि विवाद से जुड़े पक्षकार आपसी सहमति से समाधान निकाल लेते हैं तो उन्हें लंबी अदालती प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे न्यायालयों का समय भी बचेगा और गंभीर अथवा ऐसे मामलों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा जिनमें न्यायिक निर्णय आवश्यक है।

मीडिएशन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसे केवल मुकदमा शुरू होने से पहले ही नहीं, बल्कि मुकदमा न्यायालय में पहुंचने के बाद भी अपनाया जा सकता है। यहां तक कि मुकदमे के विभिन्न चरणों में भी आपसी समझौते की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। इसका अर्थ है कि यदि किसी मामले में दोनों पक्ष बाद में भी समझौते के लिए तैयार होते हैं तो समाधान का रास्ता खुल सकता है।

पारिवारिक और वैवाहिक विवादों में भी उपयोगी

समाज में पारिवारिक विवादों और वैवाहिक मतभेदों के मामले लगातार चर्चा में रहते हैं। कई बार पति-पत्नी के बीच उत्पन्न विवाद समय के साथ गंभीर रूप ले लेते हैं और मामला तलाक तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि भावनात्मक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

मीडिएशन के माध्यम से संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिल सकता है। प्रशिक्षित मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने और सहमति की संभावनाएं तलाशने में मदद करते हैं।

आयोजकों के अनुसार तलाक एवं पारिवारिक विवादों के मामलों में भी मीडिएशन की प्रक्रिया उपयोगी हो सकती है। इसका उद्देश्य जहां संभव हो, विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना है। हालांकि किसी भी समाधान के लिए संबंधित पक्षों की इच्छा और सहमति महत्वपूर्ण होती है।

संपत्ति और चेक अनादरण के मामलों में भी विकल्प

मीडिएशन का दायरा केवल पारिवारिक विवादों तक सीमित नहीं है। संपत्ति से जुड़े विवाद, चेक अनादरण के मामले और अन्य सिविल मुकदमों में भी मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशा जा सकता है।

संपत्ति के बंटवारे, लेन-देन, आपसी दावों और अन्य नागरिक विवादों में कई बार पक्षकारों के बीच बातचीत की गुंजाइश होती है। यदि दोनों पक्ष विवाद को समाप्त करने के लिए तैयार हों तो प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

इससे न केवल मुकदमेबाजी का खर्च और समय बच सकता है, बल्कि विवाद के कारण खराब हुए आपसी संबंधों को भी सुधारने का अवसर मिल सकता है।

व्यापारिक और कमर्शियल विवादों में भी महत्वपूर्ण भूमिका

व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ कारोबारियों और कंपनियों के बीच भुगतान, अनुबंध, साझेदारी और अन्य व्यावसायिक मामलों को लेकर विवाद भी उत्पन्न होते हैं। ऐसे विवादों के कारण कारोबार प्रभावित होता है और पक्षकारों का समय कानूनी प्रक्रिया में खर्च होता है।

मीडिएशन के माध्यम से कमर्शियल अथवा व्यापारिक विवादों का समाधान भी तलाशा जा सकता है। यह प्रक्रिया मुकदमा न्यायालय में जाने से पहले या मुकदमा शुरू होने के बाद भी अपनाई जा सकती है।

व्यापारिक क्षेत्र में इसका महत्व इसलिए भी है कि कई बार कारोबारी विवादों को आपसी समझौते से समाप्त करना दोनों पक्षों के व्यावसायिक हित में होता है। विवाद का शीघ्र समाधान होने से कारोबारी गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

मीडिएशन डिक्री और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी भी मिलेगी

सेमिनार में इस बात की जानकारी भी दी जाएगी कि मीडिएशन सेंटर में समझौता होने के बाद न्यायालय से डिक्री प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या होती है और इसके क्या कानूनी प्रभाव होते हैं।

आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मीडिएशन के माध्यम से हुए समझौते के आधार पर न्यायालय से डिक्री प्राप्त की जा सकती है तथा ऐसी डिक्री के विरुद्ध अपील आदि का प्रावधान नहीं होता। इस विषय में सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

सरदार स्कूल के पूर्व छात्रों की पहल, समाज को जागरूक करने का प्रयास

इस विशेष सेमिनार का आयोजन सरदार स्कूल के पूर्व छात्रों के एक समूह की ओर से समाजसेवा के उद्देश्य से किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि आम नागरिकों को मीडिएशन की प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण वे कई बार सीधे मुकदमेबाजी के रास्ते पर चले जाते हैं। यदि लोगों को समय रहते मध्यस्थता के विकल्प की जानकारी मिले तो अनेक विवादों का समाधान अपेक्षाकृत सरल तरीके से संभव हो सकता है।

सेमिनार में पूर्व न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी, श्रीमती मीना कोठारी एवं श्री शांतिलाल जी मुथा मुख्य वक्ता होंगे। ये वक्ता मीडिएशन की उपयोगिता, इसकी प्रक्रिया और विभिन्न प्रकार के विवादों में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी देंगे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को अपने सवाल पूछने का अवसर भी मिलेगा और संबंधित वक्ता उनके प्रश्नों के उत्तर देंगे।

22 नवंबर को सरदारपुरा में होगा आयोजन

यह जागरूकता सेमिनार रविवार, 22 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगा।

कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:

  • दिनांक: 22 नवंबर 2026, रविवार।
  • समय: प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक।
  • स्थान: ZMK टावर्स, 680 सी, 11वीं सी रोड, विजय स्टोर के पास, सरदारपुरा, जोधपुर।
  • प्रवेश शुल्क: पूर्णतः निःशुल्क।
  • पंजीकरण: उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन करके निःशुल्क पंजीकरण कराया जा सकता है।
  • संपर्क कार्यालय: 74138 39322।

आम नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है सेमिनार

मीडिएशन को लेकर आयोजित यह सेमिनार केवल कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी नागरिकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो किसी पारिवारिक, संपत्ति, व्यापारिक या अन्य सिविल विवाद से जुड़े हैं अथवा इस प्रक्रिया को समझना चाहते हैं।

न्यायालय में मुकदमा करना कई बार आवश्यक होता है, लेकिन जहां कानून और परिस्थितियां आपसी समझौते की अनुमति देती हैं, वहां मध्यस्थता एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकती है। जरूरत इस बात की है कि आम नागरिक इस व्यवस्था को समझें और विवादों के समाधान के उपलब्ध विकल्पों के बारे में जागरूक हों।

जोधपुर में आयोजित होने वाला यह निःशुल्क सेमिनार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल है। यदि इस माध्यम के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ती है तो भविष्य में विवादों के समाधान के साथ-साथ न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का भार कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

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