जहां लक्ष्य है और उसे प्राप्त करने का निष्काम कर्म है , वहीं लक्ष्मी हैं : डॉ. पुरोहित

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11 अक्टूबर 2026 को उदित भास्कर प्राइवेट लिमिटेड के उद्घाटन अवसर पर डॉ. अरविन्द कुमार पुरोहित द्वारा दिए गए अभिभाषण के अंश

उदित भास्कर. जोधपुर

मंचस्थ विराजमान सम्मानित विभूतियों और सभागृह में उपस्थित देवियों और सज्जनों,

नमस्कार, अभिवादन, अभिनन्दन।

आज श्री दिलीप कुमार पुरोहित और श्रीमती राखी पुरोहित द्वारा आरम्भ की जा रही कंपनी के उद्घाटन के अवसर पर इस विचार , संकल्प और प्रतिष्ठान से जुड़े सभी व्यक्तियों को हार्दिक बधाई।

आज अपनी बात मुख्य रूप से दो शब्दों के माध्यम से कहना चाहूंगा – धन्यवाद और चमत्कार।

धन्यवाद श्री डी  के पुरोहित का जिन्होंने आज मुझे आमंत्रित किया , सम्मान दिया और हनुमान अंश प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के लिए चयन भी किया। वैसे मैं इन सब को मेरी अपनी कोई विशेषता या लेखन कौशल मानने के बजाय इनका मेरे प्रति स्नेह ही अधिक मानता हूँ। डी के पुरोहित मेरे अनुज समान हैं, और मुझे इनके व्यक्तित्व की कतिपय विचित्रताएं आकर्षित करती हैं, जैसे इनका स्वामी डम डम डीकानंद नाम, “मैं सृष्टा हूँ” और “रहस्यमयी संत” जैसी पुस्तकें जहाँ ये लेखक नहीं बल्कि प्रस्तुतकर्ता हैं। इनके पत्रकार और लेखक रूप के बारे में हम सभी जानते हैं।

चमत्कार की बात शुरू करें, इसके पहले शायद आप लोगों ने भी ध्यान दिया होगा कि आज सरस्वती वंदन के लिए जो तस्वीर है उसमें मां लक्ष्मी की झलक दृष्टिगोचर होती है , जो इस बात का प्रतीक है कि समृद्धि वस्तुत: सरस्वती का  लक्ष्मी रूप में अवतरण है।  अर्थात ज्ञान और विज्ञान एक टेक्नोलॉजी के रूप में लोक उपयोगी उत्पाद और उद्योग का स्वरूप लेता है। सरस्वती के उपासक ब्राह्मण और पुरोहित जब एक कंपनी की स्थापना के बारे में सोचने लगे तो मां शारदा की तस्वीर में लक्ष्मी की झलक आना स्वाभाविक है।

चमत्कार का मतलब है कुछ ऐसा अच्छा काम हो जाना जिसका कारण समझ न आये। हमने दो मुहावरे सुने हैं, चमत्कार को नमस्कार और उगते सूरज को नमस्कार। चाहे उदित भास्कर कहें या राइजिंग भास्कर, दोनों का मतलब उगता सूरज ही है।

एक अच्छी बात या चमत्कार यह दिख रहा है कि मंच पर ज़ेन जी से बेबी बूमर तक सब मौजूद हैं। मुझे पंजाबी भाषा का एक शब्द बहुत पसंद है – सरदार साहब बैठें हैं , पुत्तर , इसमें सब आ जाते हैं , बेटा , बेटी , पोता पोती , पुत्रवधु , दामाद , सब जो युवा  हैं या आपसे छोटे हैं। तो आज मंच पर दादा और पुत्तर, मौज़ूद हैं। सरदार साहब ने कहा “पगड़ी मत उतारना ” और मुझे शहीद भगत सिंह का वो गीत याद आ गया ‘ पगड़ी संभाल जट्टा ” और मैंने पगड़ी संभाल ली।

एक और चमत्कार की बात ,एक छोटी सी रश्मि कब कैसे सूर्य बन कर जगत को प्रकाशित करने लगती है, पता नहीं चलता। जैसे हनुमान अंश के मामले में हुआ। गुमनाम लोगों ने दो करोड़ से कम की लागत में एक फिल्म बनायी जो आज तीन सौ चार सौ करोड़ की कमाई का आंकड़ा छू रही है। इसे एक चमत्कार और वो भी नीम करोली बाबा की कृपा का चमत्कार मानें तो मान सकते हैं।

आज डी के साहब की टीम द्वारा एक पुस्तक ” मीरा और मोहन” का लोकार्पण भी है। भक्ति की पराकाष्ठा को स्पर्श कर चुकी मीरा और उनके आराध्य श्री कृष्ण के अलौकिक सम्बन्ध पर लोगों ने भाव चित्र लिखे हैं , जिनका साझा  संकलन  है यह पुस्तक। कृष्ण ही एक ऐसे भगवान हैं, जिनके साथ भक्त अपना सम्बन्ध खुद घोषित करता है। मीरा ने पति , राधा ने प्रेमी, द्रौपदी ने जिसे कहते हैं “इट्स कॉम्प्लिकेटेड”, श्री देवकी और श्री वासुदेव के पुत्र थे ही श्री कृष्ण , श्री यशोदा और श्री  नन्द बाबा ने पुत्र माना,, श्री बलराम ने अनुज, गोप गोपियों ने सखा, सुदामा अर्जुन ने मित्र , सांदीपनि ने शिष्य,  कंस- शिशुपाल  ने  शत्रु , यानी जिसके जो जचा  कृष्ण ने हर रिश्ता स्वीकार किया।

इस अवसर पर , अपनी बात की समापन के पहले यह निवेदन करना चाहूंगा कि मीरा तो एक ही थी, उनके जैसा होना , असंभव नहीं तो करीब करीब असंभव है। श्री कृष्ण ने अपने प्रिय अर्जुन के माध्यम से गीता में सब गृहस्थ  लोगों को निष्काम कर्म योग का मार्ग सबसे उचित बताया है जिसका अर्थ है – लक्ष्यते इति लक्ष्मी। जहां लक्ष्य है और उसे प्राप्त करने का निष्काम कर्म है , वहीं लक्ष्मी है। एक बार पुन: श्री डी के पुरोहित, श्रीमती राखी पुरोहित  और उनकी पूरी टीम को बधाई और साधुवाद। धन्यवाद, जय हिन्द।

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