बालप्रहरी का 1600 वां ऑनलाइन कार्यक्रम
छोटी बच्ची ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ क्या आपने बचपन में कोई शरारत की? क्या आपको गणित विषय से डर लगता है। आपको बचपन में सबसे अधिक कौन सा विषय अच्छा लगता था। क्या आपने बचपन में सोचा था कि आप डायट के प्राचार्य बनेंगे….. आदि बाल मनोविज्ञान आधारित सवाल लगभग 2 दर्जन सवाल बहुत ही आत्मविश्वास के साथ पूछे। मजे की बात यह है कि शिवाली ने प्राचार्य जी के उत्तर से ही कई सवाल दाग दिए।
दिलीप कुमार पुरोहित. अल्मोड़ा
सरकारी स्कूलों कि शिक्षा पर लोग सवाल उठाते रहे हैं। परंतु यदि अभिभावक जागरूक हों तो बच्चे अपना परचम जरूर लहराते हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय डीडीहाट की कक्षा 5 की छात्रा शिवाली नेगी ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट के प्राचार्य भास्करानंद पांडेय का साक्षात्कार बहुत ही आत्मविशवास के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक लिया। यह साक्षात्कार उसने अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 1900 वे ऑनलाइन कार्यक्रम में लिया। छोटी बच्ची ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ क्या आपने बचपन में कोई शरारत की? क्या आपको गणित विषय से डर लगता है। आपको बचपन में सबसे अधिक कौन सा विषय अच्छा लगता था। क्या आपने बचपन में सोचा था कि आप डायट के प्राचार्य बनेंगे….. आदि बाल मनोविज्ञान आधारित सवाल लगभग 2 दर्जन सवाल बहुत ही आत्मविश्वास के साथ पूछे। मजे की बात यह है कि शिवाली ने प्राचार्य जी के उत्तर से ही कई सवाल दाग दिए।

प्राचार्य पांडेय जी ने बहुत ही सहजता के साथ बच्चे के सवालों का जबाब दिया।
खेल-खेल में पढ़ाई से संबंधित सवाल के उत्तर में प्राचार्य जी ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास खेलों के बिना नहीं हो सकता है। बच्चों को प्रतिदिन खेलने का अवसर जरूर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों से जहां बच्चों का शारीरिक विकास होता है। वहीं बच्चे खेल भावना को समझते हुए आगे बढ़ते हैं। खेलों के माध्यम से वे स्वयं में नेतृत्व करना सीखते हैं। उन्होंने कहा बच्चों को किताबी कीड़ा नहीं अपितु अपनी समझ बढ़ाते हुए शिक्षा को व्यवहार में लाना चाहिए। उन्होंने कहा हम अपने घर के किचन में ही विज्ञान के कई प्रयोग करते हैं। हम नदी में तैरते हुए भी काफी कुछ सीखते हैं। उन्होंने कहा हम खाली समय में सामान्य ज्ञान के खेल, मानचित्र का खेल के माध्यम से भी अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा देश-विदेश की राजधानियों ,प्रधामंत्री तथा राष्ट्रपति का नाम जानकर हम अपना ज्ञान जरूर बढ़ाएं। परंतु हमें अपने घर या स्कूल के कमरों की औसतन लंबाई-चौड़ाई, हमारे स्कूल में कितने बच्चे हैं, हमारे गांव/क्षेत्र में कौन-कौन से पेड़ पौधे हैं। रोटी बनाने के लिए क्या करना पड़ता है ऐसी सामान्य ज्ञान की छोटी बातें भी जाननी जरूरी हैं। आपने अपने संस्थान में क्या-क्या नवाचार किए हैं पर प्राचार्य जी ने कहा कि डायट डीडीहाट ने उत्तराखंड की लोक कथाओं पर आधारित छोटी-छोटी फिल्में बच्चों के लिए बनाई हैं। डायट डीडीहाट में नक्षत्र-ब्रहमांड को समझने के लिए नक्षत्र भवन तैयार किया गया है जो कि उत्तराखंड का पहला नक्षत भवन है। अंतिम सवाल आप समाज से क्या कहना चाहेंगे के जबाब में भास्करानंद पांडेय जी ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा अस्त्र है जो हमारे जीवन को बदल सकता है। पढ़ाई का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं, होना चाहिए। शिक्षकों को अपना कार्य नौकरी की तरह नहीं अपितु एक मिशन की तरह समाज को आगे बढ़ाने का होना चाहिए। हमें अपने अधिकारों के साथ ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी करना चाहिए। ज्ञातत्य है शिक्षा में नवाचार के लिए सन् 2019 में भास्करानंद पांडेय को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार भी मिला है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी का स्वागत करते डायट गौचर के प्राचार्य तथा चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने बालप्रहरी के प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि इस ऑनलाइन पटल पर 36 से अधिक विधाओं के माध्यम से बच्चे अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि बालप्रहरी का ऑनलाइन पटल संभवतया दुनिया का सबसे अलग पटल होगा जहां प्राथमिक,जूनियर तथा इंटर के बच्चे ही संचालन करते हैं। बच्चे अध्यक्ष बनते हैं तथा बच्चे ही अतिथि बनते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन स्वयं सेवी तौर पर बच्चों की सूची तैयार करना, संचालक तथा अतिथि का चयन करना, प्रतिभागी बच्चों को प्रशस्ति पत्र देना आयोजक मंडल का बच्चों के लिए समर्पण ही कहा जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों से कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 रटने के बजाय पाठ को समझने की बात करती है। बच्चे कक्षा में क्या, क्यों तथा कैसे जैसे सवाल करें,तर्क वितर्क करें,ऐसा वातावरण बनाए जाने की जरूरत हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि पढ़ते-पढ़ते थक जाओ तो पाठ्यक्रम से कहानी, कविता की पुस्तकें तथा बाल पत्रिकाएं पढ़ो। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। जहां बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। ऑनलाइन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व आयकर आयुक्त श्यामपलट पांडेय ने कहा कि बालप्रहरी ने ऑनलाइन सफर का 1600 वां पड़ाव पार किया है। इस विलक्षण कार्य के लिए बालप्रहरी के प्रयासों की सराहना की ही जानी चाहिए। उन्होंने कहा ऑनलाइन कार्यक्रमों के साथ ही बालप्रहरी देश के विभिन्न स्थानों में बच्चों की 5 दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन करके बच्चों को स्वैच्छिक तौर पर साहित्यिक मंच उपलब्ध कराने तथा खेल-खेल में शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। अंत में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान खंडवा,म.प्र. के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार नेगी ने सरकारी स्कूल की कक्षा 5 की छात्रा शिवाली नेगी को आत्मविश्वास के साथ साक्षात्कार लेने पर बधाई दी। ज्ञातव्य है कि शिवाली नेगी की माता हेमा नेगी राजकीय इंटर कालेज नाचनी में शिक्षिका होेते हुए अपनी बच्ची को सरकारी स्कूल में पढ़ा रही हैं। उसके पिता भूपेंद्रसिंह नेगी बाल विकास विभाग में रहकर बच्चों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हें। अंत में बालप्रहरी संपादक एवं बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने पटल को सहयोग करने वाले सभी अभिभावकों व शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साहित्यकार,शिक्षक,अभिभावक एवं बच्चे उपस्थित थे।







