कवयित्री : नीलम व्यास स्वयसिद्धा
जीवन भार नहीं समझो तुम,
भारत नाम करो तुम रोशनl
कर्म करो नित भारत के हित,
अन्न विकास करो जग पोषण l
दीपक के सम पावन होकर,
दीन सहाय मिटे तम शोषण l
यौवन ओज बढ़ाकर के तुम,
दुश्मन शीश झुके कर घोषण l
हो जयकार सदा नव भारत
वीर जवान लहूँ बहता ज़ब l
सैनिक रक्त बहा खुश हो नित,
वीर प्रसूत धरा हुलसे तब l
भोर दिवाकर पूजा रहा नित,
भारत मातु निहाल हुई अब l
प्राण गवाकर आहुत हो सिर,
भारत मंगल गान सुनो सबl
भारत भाग्य करो तुम रोशन,
वीर जवान मिटा तन पावन l
हो जय हो जयकार करें हम,
दीन गरीब मिले सुख भावनl
पालन हार बनो तुम दीनन ,
सेवक हो जन के सुध लावन l
भूख मिटे ज़ब भोजन दो तुम,
नीर बहे अब ना बन सावन l l







