-मोदी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हुई। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने लंबे समय तक राज्य का नेतृत्व किया।
-वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां और व्यापक हुईं। इसके बाद सरकार ने विकास, डिजिटल तकनीक, आधारभूत ढांचे, जनकल्याण और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया।
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों का सफर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा सकता है। संगठन से लेकर सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक की उनकी यात्रा में सेवा, राष्ट्रहित और जनभागीदारी जैसे विचार प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचने के दौरान उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी कार्यशैली की अलग पहचान बनाई।
मोदी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हुई। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने लंबे समय तक राज्य का नेतृत्व किया। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां और व्यापक हुईं। इसके बाद सरकार ने विकास, डिजिटल तकनीक, आधारभूत ढांचे, जनकल्याण और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया।
निर्णय लेने की क्षमता ने अभूतपूर्व बनाया
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष निर्णय लेने की क्षमता भी माना जाता है। कई बड़े और दूरगामी प्रभाव वाले फैसलों ने देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। अनुच्छेद 370 से जुड़े निर्णय, कोरोना महामारी के दौरान लिए गए फैसले, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा, आत्मनिर्भर भारत और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं उनके शासनकाल की प्रमुख पहलों में शामिल रही हैं। उनकी राजनीति में ‘राष्ट्र प्रथम’ का विचार लगातार प्रमुखता से सामने आता है। वे अक्सर नागरिकों से देश के विकास में सहभागी बनने और अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते रहे हैं। इसी सोच के साथ स्वच्छता, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और जनभागीदारी जैसे अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया।
सरकारी योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाया
मोदी के नेतृत्व की एक विशेषता यह भी रही है कि उन्होंने सरकारी योजनाओं को सीधे आम नागरिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया। जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आवास और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से सरकार ने समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया। इन योजनाओं के प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस भी होती रही है, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि इन अभियानों ने सार्वजनिक चर्चा में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका को मजबूत करने पर मोदी सरकार ने विशेष ध्यान दिया। विभिन्न देशों के साथ संबंधों को विस्तार देने, वैश्विक मंचों पर भारत की भागीदारी बढ़ाने और भारतीय संस्कृति तथा योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के प्रयास हुए। इससे भारत की विदेश नीति और वैश्विक छवि पर भी व्यापक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा को केवल राजनीतिक उपलब्धियों के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह यात्रा संगठन, प्रशासन, चुनावी राजनीति, जनसंपर्क और बदलती परिस्थितियों के बीच नेतृत्व की एक लंबी प्रक्रिया भी है। उनके समर्थक उन्हें निर्णायक और विकास-केंद्रित नेता मानते हैं, जबकि उनके आलोचक कई नीतियों और निर्णयों पर सवाल भी उठाते रहे हैं। लोकतंत्र में दोनों दृष्टिकोणों का होना स्वाभाविक है। फिर भी, मोदी के सार्वजनिक जीवन की सबसे प्रमुख पहचान उनके राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संदेश से जुड़ी रही है। सेवा को संकल्प और राष्ट्र को सर्वोपरि मानने की उनकी विचारधारा ने भारतीय राजनीति में उनकी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। आने वाले वर्षों में उनके कार्यकाल और निर्णयों का मूल्यांकन इतिहास अलग-अलग दृष्टिकोणों से करेगा, लेकिन यह निश्चित है कि सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति और शासन की दिशा पर गहरा प्रभाव डाला है।







