उदित भास्कर. जोधपुर
सनातन परंपरा में ब्रह्मांड के प्रथम वास्तुकार, शिल्पकार और इंजीनियर माने जाने वाले भगवान श्री विश्वकर्मा का पूजा दिवस 17 सितंबर, गुरुवार को बाईजी का तालाब स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर में श्रद्धापूर्वक मनाया गया।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया किं सभी की सुख-समृद्धि की मंगल कामनार्थ आर्य वीरेंद्र भाकरेचा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन हुआ जिसमें श्री जांगिड़ पंचायत के ज्योति स्वरुप धनेरवा सहित मंदिर कमेटी के गोपी किशन जांगिड़, प्रेमप्रकाश जायलवाल, हुकमाराम झिलोया, मिश्रीलाल कुलरिया, रामदयाल जादम, राधेश्याम दियावड़ा, गंगाराम बरड़वा, चेतन प्रकाश बरड़वा सहित मातृशक्ति विनती भाकरेचा, सुनीता शर्मा व गणमान्य समाजबंधुओं ने आहुतियां प्रदान की। आरती के पश्चात काष्ठ कला क्षेत्र में उपयुक्त होने वाले हस्त व विद्युत उपकरणों की विधिवत पूजा अर्चना की गई और प्रसाद वितरण किया गया।
आर्य वीरेंद्र भाकरेचा ने बताया कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा के साथ-साथ मशीनों, औजारों, कारखानों और वाहनों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, ताकि कार्यक्षेत्र में तरक्की और सिद्धि बनी रहे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा की साधना करने से व्यक्ति को कामों में सफलता प्राप्त होती है और खूब तरक्की होती है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने ही सोने की लंका, श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, देवताओं की इंद्रपुरी और पुष्पक विमान का निर्माण किया था। औजारों, मशीनों, वाहनों और उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद माना जाता है। इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों और औजारों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से कारोबार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और कार्यस्थल पर सदैव सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।





