WHO के अनुसार विश्व में हर 10 में से 1 मरीज को स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान रोकी जा सकने वाली हानि होती है। इसी को रोकने के लिए 2019 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने 17 सितंबर को इस दिवस के रूप में घोषित किया था।
उदित भास्कर. जोधपुर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आह्वान पर प्रतिवर्ष 17 सितंबर को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का मुख्य विषय है – “गैर-संक्रामक बीमारियों के लंबे इलाज में मरीज की सुरक्षा” और नारा है “जीवन के लिए सुरक्षित देखभाल!”
महात्मा गांधी चिकित्सालय की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तेज कंवर ने बताया कि आज हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) में मरीज को वर्षों तक दवा, जांच और अस्पताल के संपर्क में रहना पड़ता है, ऐसे में दवा में त्रुटि, संक्रमण और निदान में देरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
WHO के अनुसार विश्व में हर 10 में से 1 मरीज को स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान रोकी जा सकने वाली हानि होती है। इसी को रोकने के लिए 2019 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने 17 सितंबर को इस दिवस के रूप में घोषित किया था।
महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तेज कंवर ने बताया कि मरीज सुरक्षा के लिए 4 मंत्र जरूरी हैं

1. सही पहचान – हर प्रक्रिया से पहले मरीज की सही पहचान।
2. हाथों की स्वच्छता – प्रत्येक मरीज को छूने से पहले और बाद में हैंड हाइजीन, इससे 50% संक्रमण रोके जा सकते हैं।
3. दवा सुरक्षा – 5 Rights – सही मरीज, सही दवा, सही खुराक, सही समय, सही तरीका का पालन।
4. सहभागिता – मरीज को उसकी बीमारी और दवा के बारे में पूरी जानकारी देना।
उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ मरीज के सबसे करीब होता है, इसलिए हमारा दायित्व केवल इंजेक्शन लगाना नहीं, बल्कि मरीज का सुरक्षा कवच बनना है। सतत निगरानी, स्पष्ट संवाद और किसी भी Near Miss त्रुटि को तुरंत रिपोर्ट करना ही सच्ची सेवा है। रोगी सुरक्षित है, तभी स्वास्थ्य प्रणाली पर विश्वास सुरक्षित है l






