उदित भास्कर नेत्रदान अभियान : 1
नेत्रदान-महादान : किसी की जिंदगी में फिर से रोशनी लाने का संकल्प लें
दिलीप कुमार पुरोहित | जोधपुर
दुनिया की खूबसूरती को देखने के लिए आंखें प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। सूर्योदय की लालिमा, फूलों के रंग, अपनों के चेहरे, बच्चों की मुस्कान और प्रकृति के मनमोहक दृश्य हमारी आंखों के माध्यम से ही जीवन का हिस्सा बनते हैं। लेकिन जरा सोचिए, यदि किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी चली जाए, तो उसके लिए यही खूबसूरत दुनिया कैसी हो जाएगी? जो व्यक्ति अपने आसपास की दुनिया देख नहीं सकता, वही दृष्टिहीनता की कठिनाइयों को सबसे अच्छी तरह समझ सकता है। ऐसे लोगों के जीवन में उजाले की नई उम्मीद जगाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है नेत्रदान।
इसी मानवीय भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उदित भास्कर ने ‘नेत्रदान-महादान’ विशेष जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान की पहली कड़ी के माध्यम से समाज को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करने, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन कर सकता है इंसान
हम अपने जीवन में परिवार, समाज और जरूरतमंद लोगों के लिए अनेक कार्य करते हैं। लेकिन क्या ऐसा भी संभव है कि मृत्यु के बाद हमारा शरीर किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी का कारण बन जाए? नेत्रदान इसी मानवीय सोच को साकार करने का अवसर देता है। मृत्यु के बाद दान की गई आंखों के कॉर्निया का उपयोग उपयुक्त मरीजों में दृष्टि बहाल करने के लिए किया जा सकता है। कॉर्निया आंख का पारदर्शी अगला हिस्सा है, जिससे होकर प्रकाश आंख के भीतर प्रवेश करता है। यदि कॉर्निया में बीमारी या चोट के कारण गंभीर अपारदर्शिता आ जाए, तो व्यक्ति की दृष्टि प्रभावित हो सकती है। ऐसे कुछ मरीजों के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण दृष्टि वापस पाने का अवसर बन सकता है। यह समझना जरूरी है कि नेत्रदान से हर प्रकार के अंधत्व का उपचार संभव नहीं है। इसका लाभ मुख्य रूप से उन लोगों को मिल सकता है जिनकी दृष्टि कॉर्निया की समस्या के कारण प्रभावित हुई है। फिर भी, एक नेत्रदान से एक से अधिक जरूरतमंद लोगों के लिए कॉर्निया उपलब्ध कराने की संभावना हो सकती है। इस तरह एक व्यक्ति का संकल्प किसी दूसरे परिवार के जीवन में आशा का संदेश बन सकता है।
नेत्रदान को लेकर मन में न रखें धार्मिक भय
हमारे समाज में आज भी नेत्रदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और आशंकाएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि मृत्यु के बाद आंखें दान करने से अगले जन्म में आंखें नहीं मिलेंगी। कुछ लोगों को लगता है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत शरीर के किसी अंग को दान करना उचित नहीं है। वहीं कुछ परिवार इस आशंका से नेत्रदान की अनुमति नहीं देते कि इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित होगी। इन धारणाओं के कारण कई बार जरूरतमंद मरीजों तक कॉर्निया पहुंचने का अवसर छूट जाता है। वास्तव में, नेत्रदान एक मानवीय सेवा है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखों के उपयोगी ऊतक से दूसरे व्यक्ति को दृष्टि पाने में सहायता मिलना करुणा, परोपकार और मानवता की भावना को दर्शाता है।
अगले जन्म में आंखें मिलने या न मिलने जैसी धारणाओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं, लेकिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना अनेक परंपराओं में सेवा और परोपकार की भावना से जुड़ा माना जाता है। इसलिए नेत्रदान को भय या अंधविश्वास के बजाय मानव कल्याण के दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
क्या नेत्रदान से चेहरा बिगड़ जाता है?
यह भी एक आम भ्रांति है कि नेत्रदान के बाद दिवंगत व्यक्ति का चेहरा बिगड़ जाता है और अंतिम दर्शन करने में परेशानी होती है। जबकि प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आंखों के उपयोगी ऊतक प्राप्त किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में चेहरे की बनावट को यथासंभव सामान्य बनाए रखा जाता है। सामान्यतः इससे अंतिम दर्शन या धार्मिक रीति-रिवाजों के निर्वहन में बाधा नहीं आती। नेत्रदान के लिए शरीर का पूरा नेत्रगोलक निकालना हर स्थिति में आवश्यक नहीं होता। प्रक्रिया में कॉर्निया या निर्धारित उपयोगी ऊतक प्राप्त किए जा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित टीम द्वारा सावधानीपूर्वक की जाती है। इसलिए परिवारों को इस विषय में अनावश्यक भय रखने के बजाय अधिकृत आई बैंक या प्रशिक्षित चिकित्सा टीम से सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
नेत्रदान के लिए मृत्यु के बाद समय बहुत महत्वपूर्ण
नेत्रदान के मामले में समय का विशेष महत्व है। सामान्यतः मृत्यु के बाद जितनी जल्दी हो सके, आई बैंक से संपर्क करना चाहिए। कॉर्निया प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए प्रायः मृत्यु के छह घंटे के भीतर संपर्क करने की सलाह दी जाती है, हालांकि वास्तविक उपयुक्तता का निर्णय संबंधित चिकित्सा टीम करती है। यदि परिवार ने पहले से नेत्रदान का संकल्प लिया है, तो मृत्यु के समय परिजनों को इसकी जानकारी होनी चाहिए। मृत्यु के बाद आई बैंक को तुरंत सूचना देने से चिकित्सा टीम समय पर पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया कर सकती है।
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान कुछ सावधानियां भी उपयोगी हो सकती हैं। दिवंगत व्यक्ति की आंखें बंद रखें और पलकों पर साफ, ठंडे पानी से हल्का नम कपड़ा रखा जा सकता है। सिर के नीचे तकिया रखकर उसे थोड़ा ऊंचा रखना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही मृत्यु का समय और स्थान बताते हुए आई बैंक से तत्काल संपर्क करना चाहिए। अंतिम निर्णय चिकित्सा टीम द्वारा लिया जाता है। यह भी ध्यान रखें कि कुछ चिकित्सकीय परिस्थितियों में नेत्रदान संभव नहीं हो सकता। इसलिए प्रत्येक मामले में आई बैंक की टीम ही उपयुक्तता का आकलन करती है।
परिवार की सहमति और जागरूकता जरूरी
नेत्रदान के लिए संकल्प लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन मृत्यु के बाद परिजनों की भूमिका भी अत्यंत आवश्यक होती है। इसलिए परिवार के सदस्यों को पहले से बताना चाहिए कि व्यक्ति ने नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की है। इससे कठिन समय में परिजन उसकी इच्छा के अनुरूप निर्णय लेने में आसानी महसूस कर सकते हैं।
समाज की संस्थाएं, धार्मिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक और जनप्रतिनिधि भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसी परिवार में मृत्यु होने पर संवेदनशीलता और सम्मान के साथ नेत्रदान की जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर बातचीत करते समय परिवार के दुख और भावनाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए।
नेत्रदान के लिए आगे आएं : राजेंद्र जैन
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जोधपुर चैप्टर के अध्यक्ष राजेंद्र जैन ने समाज के सभी वर्गों से नेत्रदान के प्रति जागरूक होने की अपील की है। उनका कहना है कि दुनिया को देखने के लिए आंखें अनमोल हैं और नेत्रदान का संकल्प लेकर तथा मृत्यु के बाद परिजनों को इसके लिए प्रेरित करके अंधत्व निवारण में सहयोग किया जा सकता है। उन्होंने सभी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से आग्रह किया है कि अपने आसपास किसी व्यक्ति के निधन पर दिवंगत के परिजनों को संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान के लिए प्रेरित करें। इस छोटे-से प्रयास से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दृष्टि पाने का अवसर मिल सकता है।
उदित भास्कर की अपील : आज ही लें नेत्रदान का संकल्प
नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा संकल्प है। यदि हम अपने जीवनकाल में नेत्रदान की इच्छा व्यक्त करें और अपने परिवार को इसकी जानकारी दें, तो मृत्यु के बाद भी किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में उजाला लाने का अवसर मिल सकता है।
उदित भास्कर के ‘नेत्रदान-महादान’ अभियान के माध्यम से सभी नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और युवाओं से अपील है कि वे इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें, सही जानकारी साझा करें और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आगे आएं। याद रखिए, जीवन रहते हम दुनिया की खूबसूरती देखते हैं, लेकिन नेत्रदान का संकल्प हमें मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया खूबसूरत बनाने का अवसर दे सकता है। आइए, नेत्रदान का संकल्प लें और किसी की जिंदगी में रोशनी लाने के इस महाअभियान का हिस्सा बनें।
नेत्रदान के लिए संपर्क करें
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जोधपुर चैप्टर
- अध्यक्ष: राजेंद्र जैन
- संपर्क नंबर: 18008891651 / 9314419846
नेत्रदान के संकल्प, प्रक्रिया और पात्रता संबंधी जानकारी के लिए आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जोधपुर चैप्टर से संपर्क करें।








