किसान आई रोबोटिक्स मॉडल ने दिलाया प्रथम स्थान, सड़क सुरक्षा मॉडल रहा तृतीय स्थान पर; दोनों टीमों ने जीती ₹16 हजार की पुरस्कार राशि
राखी पुरोहित. जोधपुर
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नवाचार, तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक सोच के दम पर महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, चैनपुरा के विद्यार्थियों ने इग्नाइट-26 आइडियाथॉन में शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया। लाचू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस की ओर से शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यालय की दो टीमों ने भाग लिया और दोनों ने प्रथम एवं तृतीय स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता में कुल 19 टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों की टीमों के बीच एक ही राजकीय विद्यालय की दोनों टीमों का पुरस्कार जीतना विशेष उपलब्धि रही। इस सफलता के साथ विद्यार्थियों ने साबित किया कि नवाचार और तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।

किसान आई रोबोटिक्स मॉडल को मिला प्रथम पुरस्कार
विद्यालय की एक टीम ने किसानों की समस्याओं के समाधान को ध्यान में रखते हुए ‘किसान आई’ नामक रोबोटिक्स मॉडल तैयार किया। इस मॉडल के माध्यम से विद्यार्थियों ने कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग और किसानों के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने की अपनी सोच प्रस्तुत की। निर्णायकों ने मॉडल को सराहते हुए टीम को प्रथम स्थान प्रदान किया। इसके लिए विद्यार्थियों को ₹11,000 का चेक देकर सम्मानित किया गया।
वहीं, विद्यालय की दूसरी टीम ने सड़क सुरक्षा एवं सड़क रखरखाव से संबंधित मॉडल प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने इस मॉडल के माध्यम से सड़क से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अपनी तकनीकी समझ का प्रदर्शन किया। इस टीम ने प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त करते हुए ₹5,000 की पुरस्कार राशि हासिल की। इस प्रकार विद्यालय की दोनों टीमों ने कुल ₹16,000 की पुरस्कार राशि प्राप्त की।
विकसित भारत के लक्ष्य में तकनीकी नवाचार की अहम भूमिका
संस्था प्रधान निमेश चारण ने बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों द्वारा कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखकर रोबोटिक्स मॉडल तैयार करना एक सकारात्मक पहल है। ऐसे नवाचार भविष्य में कृषि को अधिक प्रभावी बनाने और किसानों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए युवाओं को विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। विद्यार्थियों में नई सोच विकसित करने और उन्हें व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करने से देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
राजकीय विद्यालय में तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर
संस्था प्रधान चारण ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में संसाधनों और बजट की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन विद्यार्थियों की प्रतिभा, ज्ञान और नवाचार की क्षमता सीमित नहीं है। उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर मिलने पर सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर बड़े मंचों पर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कोडिंग, एप्लिकेशन डेवलपमेंट और कंप्यूटर शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि को विद्यालय में तकनीकी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
शिक्षकों के मार्गदर्शन से मिली सफलता
इस उपलब्धि में कंप्यूटर शिक्षक नीरज कुमार एवं सुश्री आत्मजा शिवा सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दोनों शिक्षकों ने विद्यार्थियों को मॉडल तैयार करने, तकनीकी अवधारणाओं को समझने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया।
संस्था प्रधान ने दोनों शिक्षकों सहित प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी तरह नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा किसी संस्थान के संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और सीखने के अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपनी कल्पनाशीलता को उपयोगी तकनीकी समाधानों में बदल सकते हैं। इग्नाइट-26 आइडियाथॉन में चैनपुरा विद्यालय की दोनों टीमों की सफलता ने न केवल विद्यालय, बल्कि राजकीय शिक्षा व्यवस्था की नवाचार क्षमता को भी नई पहचान दिलाई है।








