कथा के दौरान गोवत्स विठ्ठल जी महाराज ने अपने मधुर एवं सुरीले भजनों से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। स्वामी श्री राजू हमारी, मीठे रस से भरियो री राधा रानी लागे और मेरे प्यारे श्याम सहित विभिन्न भजनों ने कथा पंडाल को भक्तिरस से भर दिया।
उदित भास्कर. जोधपुर
कमला नेहरू नगर स्थित भारत समन्वय धाम श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में ओम भागवत सत्संग परिवार के सान्निध्य में चल रही सात दिवसीय दिव्य श्री हनुमान कथा एवं भरत चरित्र के चौथे दिन गुरुवार को कथा पंडाल भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा। कथा में भरत जी के त्याग, तपस्या, निष्काम प्रेम और भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य समर्पण का वर्णन हुआ, वहीं गोवत्स विठ्ठल जी महाराज के मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो दिया। श्रीराम-भरत मिलन का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास परम पूज्य रामस्नेही संत श्री अर्जुन राम जी महाराज ने भरत चरित्र के माध्यम से भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने भरत जी के उस भाव को उजागर किया, जिसमें राजपाट और सुख-सुविधाओं का कोई आकर्षण नहीं था, बल्कि उनके हृदय में भगवान श्रीराम के प्रति निश्छल प्रेम और उन्हें अयोध्या वापस लाने की भावना थी।
श्रीराम और भरत जी के मिलन का प्रसंग कथा में आया तो वातावरण अत्यंत भावुक हो गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और वे प्रभु के प्रेम में डूबे नजर आए। कथा पंडाल में लगातार जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य को जीवन में कर्म करते हुए प्रभु की इच्छा और उनकी कृपा पर विश्वास रखना चाहिए। जीवन में आने वाली परिस्थितियां भी प्रभु की योजना का हिस्सा होती हैं। मनुष्य अपने स्तर पर कितना भी प्रयास करे, लेकिन किसी कार्य की पूर्णता प्रभु की इच्छा से ही होती है। इसलिए सुख-दुःख और अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखते हुए प्रभु के प्रति विश्वास और समर्पण का भाव रखना चाहिए।
कथा के दौरान गोवत्स विठ्ठल जी महाराज ने अपने मधुर एवं सुरीले भजनों से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। स्वामी श्री राजू हमारी, मीठे रस से भरियो री राधा रानी लागे और मेरे प्यारे श्याम सहित विभिन्न भजनों ने कथा पंडाल को भक्तिरस से भर दिया।
कथा के पश्चात सुंदरकांड का भी भव्य आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्री हनुमान जी महाराज का स्मरण किया और जय श्री हनुमान के जयकारों से पूरा कथा परिसर गूंज उठा। कथा, भजन और सुंदरकांड के बीच वातावरण देर तक राम-हनुमान की भक्ति में सराबोर रहा।
पंचम दिवस में होगा विशेष संत सान्निध्य
कथा का पंचम दिवस 18 सितंबर को आयोजित होगा। पंचम दिवस पर पूज्य आचार्य रामानुजाचार्य जी महाराज का आगमन होगा। आयोजन प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक चल रहा है।








