भरत जी के प्रेम, त्याग और समर्पण ने दिया श्री सीताराम भक्ति का संदेश
उदित भास्कर. जोधपुर
कमला नेहरू नगर स्थित भारत समन्वय धाम श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में ओम भागवत सत्संग परिवार के सान्निध्य में चल रही सात दिवसीय दिव्य श्री हनुमान कथा एवं भरत चरित्र के पंचम दिवस शुक्रवार को कथा पंडाल भक्ति, भाव और संत सान्निध्य से सराबोर रहा। इस अवसर पर पूज्य आचार्य रामानुजाचार्य जी महाराज एवं मध्यप्रदेश से पधारे परम पूज्य संत स्वामी श्री समानंद गिरि जी महाराज का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ। दोनों संतों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
कथा व्यास परम पूज्य रामस्नेही संत श्री अर्जुन राम जी महाराज ने पंचम दिवस पर भरत चरित्र के समापन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भरतजी के जीवन में दिखाई देने वाले प्रेम, त्याग, तपस्या, निष्काम भावना और भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य समर्पण को कथा का मुख्य संदेश बनाया। भरतजी के चरित्र के माध्यम से बताया गया कि सच्ची भक्ति में अधिकार की इच्छा नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण और उनके चरणों में प्रेम ही सर्वोपरि है।
महाराज श्री ने भरतजी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यदि सीता-राम के प्रेमरूपी अमृत से परिपूर्ण श्री भरतजी का जन्म न हुआ होता तो यम, नियम, शम और दम जैसे कठिन साधनों का आचरण कौन करता। अपने निर्मल यश से दुःख, संताप, दरिद्रता और दम्भ जैसे दोषों का नाश कौन करता और कलियुग में तुलसीदास जैसे जीव को हठपूर्वक श्रीराम के सम्मुख कौन लाता। भरतजी का चरित्र केवल भाई के प्रेम का उदाहरण नहीं, बल्कि त्याग, वैराग्य, मर्यादा और निष्काम भक्ति का अनुपम आदर्श है।
इस अवसर पर पूज्य आचार्य रामानुजाचार्य जी महाराज एवं परम पूज्य संत स्वामी श्री समानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य से कथा का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक गहन हो गया। शनिवार को भरत चरित्र का समापन होने के बाद अब श्री हनुमान चरित्र का शुभारंभ होगा। कथा व्यास श्री अर्जुन राम जी महाराज द्वारा भगवान श्री हनुमानजी के जन्म, बाल चरित्र, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, सेवा, शक्ति और समर्पण से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। आयोजन प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक चल रहा है।








