जब से हम हसबैंड हुए हैं : हरसहाय हर्ष

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जब से हम हसबैंड हुए हैं

जब से हम हसबैंड हुए हैं,
अधिकारों से सस्पेंड हुए हैं।

जिद करने का अधिकार गया,
माँ-बापू का प्यार गया।
बचपन में करता था जो संग,
वो शैतानी वाला यार गया।
अब हम बिना फ्रेंड हुए हैं,
जब से हम हसबैंड हुए हैं।

जीवन भी था नया-नया,
लगते थे हम युवा-युवा।
उस दिन तक थी आजादी,
खुली-खुली थी हवा-हवा।
अब हम सेकंड हैंड हुए हैं,
जब से हम हसबैंड हुए हैं।

जिस दिन बने थे दूल्हे राजा,
उस दिन बज गया हमारा बाजा।
महका करते थे फूलों सा,
दिखते थे हम ताजा-ताजा।
रजिस्ट्रीशुदा अब लैंड हुए हैं,
जब से हम हसबैंड हुए हैं।

रचनाकार: हरसहाय_हर्ष

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