जेएनवीयू की थिएटर सेल में डॉ. हितेंद्र गोयल लिखित नाटक के 3 दिन में होंगे चार शो।
नाटक ‘आखिरी श्रोता’ में बदलते मानवीय संबंधों, संवाद के संकट और व्यक्ति के भीतर बढ़ती खामोशी को केंद्र में रखा गया है। नाटक यह सवाल भी उठाता है कि आधुनिक जीवन में जब व्यक्ति लगातार अकेला पड़ता जा रहा है, तब उसकी बात सुनने वाला आखिर कौन है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) की थिएटर सेल स्टूडियो में 19 से 21 सितंबर तक समकालीन रंगमंच का अभिनव प्रयोग देखने को मिलेगा। थिएटर सेल की ओर से डॉ. हितेंद्र गोयल लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘आखिरी श्रोता’ का मंचन किया जाएगा। तीन दिनों में इसके चार शो होंगे। खास बात यह है कि एक ही नाटक को तीन अलग-अलग रंगभाषाओं और प्रस्तुति शैलियों में मंचित किया जाएगा।
नाटक ‘आखिरी श्रोता’ में बदलते मानवीय संबंधों, संवाद के संकट और व्यक्ति के भीतर बढ़ती खामोशी को केंद्र में रखा गया है। नाटक यह सवाल भी उठाता है कि आधुनिक जीवन में जब व्यक्ति लगातार अकेला पड़ता जा रहा है, तब उसकी बात सुनने वाला आखिर कौन है।
थिएटर सेल के निदेशक डॉ. हितेंद्र गोयल के अनुसार, नाटक में अकेले पड़ते मनुष्य, संबंधों के बीच बढ़ती खामोशी और संवाद के पीछे छिपे तनाव को ऐसी रंगभाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें अभिनय के पारंपरिक स्वरूपों के साथ नए और नवाचारी अभिनय आयामों का प्रयोग किया गया है।
रिहर्सल से प्रस्तुति तक पूरी प्रक्रिया सेल में विकसित
डॉ. गोयल ने बताया कि नाटक की लेखन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी पाठ-प्रक्रिया स्टूडियो में रंगकर्मियों के साथ की गई। इस दौरान पात्र, संरचना, संवाद और मंचीय भाषा पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद नाटक को मंच पर उतारने का निर्णय लिया गया।
‘आखिरी श्रोता’ की विशेषता केवल एक नाटक का मंचन नहीं, बल्कि उसके सृजन से लेकर प्रस्तुति तक की पूरी प्रक्रिया को थिएटर सेल स्टूडियो के भीतर विकसित करना है। करीब ढाई महीने के अभ्यास के बाद नाटक ने मंचीय आकार लिया है। इस प्रस्तुति में वरिष्ठ रंगकर्मी बीएम व्यास, रंग अभिनेत्री अनुराधा आडवाणी, भरत वैष्णव, मनोहर सिंह, उमेद भाटी, भानु पुरोहित और ओमप्रकाश लखारा सहित थिएटर सेल के रंगकर्मी भाग ले रहे हैं।
तीन दिनों में होने वाले चारों शो दर्शकों को नाटक की अलग-अलग प्रस्तुति शैलियों से रूबरू कराएंगे। थिएटर सेल का यह प्रयोग दर्शकों के लिए एक ही कथ्य को अलग-अलग रंगमंचीय दृष्टिकोण से देखने और समझने का अवसर भी देगा।








