बोरखेड़ा पुलिस की दबिश में 9 लोग पकड़े गए, ₹92,060 नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त; कार्रवाई के पीछे साजिश के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
के.डी. अब्बासी
कोटा। बोरखेड़ा थाना पुलिस की जुआ खेलने वालों के खिलाफ कार्रवाई में दैनिक भास्कर के पत्रकार पंकज मित्तल सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किए जाने का मामला चर्चा में है। पुलिस के अनुसार, बजरंग नगर स्थित आदित्य आवास के मकान नंबर 184 में जुए का फड़ चलने की सूचना पर दबिश दी गई। मौके से पुलिस ने 92 हजार 60 रुपये नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त किए हैं।
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। यदि पत्रकार को लगातार पुलिस के खिलाफ खबरें लिखने के कारण निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, तो इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध पुलिस कार्रवाई के विवरण से यह साबित नहीं होता कि गिरफ्तारी किसी साजिश के तहत की गई या पत्रकारिता के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दी दबिश
पुलिस के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को बोरखेड़ा थानाधिकारी सीआई अजीत बगडोलिया पुलिस जाप्ते के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि बजरंग नगर स्थित आदित्य आवास के मकान नंबर 184 में कुछ लोग ताश के पत्तों पर रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं।
सूचना के आधार पर पुलिस ने राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के प्रावधानों के तहत तलाशी वारंट प्राप्त किया। इसके बाद पुलिस टीम ने मकान पर दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, मकान के ड्राइंग रूम में नौ व्यक्ति जुआ खेलते मिले।
इन 9 लोगों के नाम पुलिस कार्रवाई में शामिल
पुलिस के अनुसार, मौके से पकड़े गए व्यक्तियों में शामिल हैं:
1. श्रीपुल गर्ग, निवासी बजरंग नगर।
2. लोकेश पीपलानी, निवासी आदित्य आवास, बोरखेड़ा।
3. पूरण पीपलानी, निवासी विज्ञान नगर।
4. हिमांशु नंदवानी, निवासी विज्ञान नगर।
5. जयप्रकाश मेघवाल, निवासी दादाबाड़ी।
6. संजीव विजय, निवासी छावनी।
7. अमित पीपलानी, निवासी आदित्य आवास, बोरखेड़ा।
8. पंकज मित्तल, निवासी छावनी, गुमानपुरा।
9. अकील अहमद, निवासी डडवाड़ा।
₹92,060 नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मौके से 92 हजार 60 रुपये नकद और 312 ताश के पत्ते जब्त किए हैं। मामले में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पत्रकार की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच जरूरी
पत्रकार पंकज मित्तल की गिरफ्तारी को लेकर यदि यह आरोप सामने आ रहा है कि वे लगातार पुलिस के खिलाफ खबरें लिख रहे थे और इसी वजह से उन्हें साजिश के तहत निशाना बनाया गया, तो इस पहलू की भी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। एक तरफ पुलिस का कहना है कि कार्रवाई जुआ खेलने की सूचना के आधार पर की गई, वहीं दूसरी तरफ यदि पत्रकार को प्रतिशोध के तहत फंसाने का आरोप है, तो संबंधित साक्ष्यों की जांच जरूरी है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पत्रकार का पक्ष, पुलिस का आधिकारिक बयान और उपलब्ध साक्ष्य सामने आना आवश्यक है।
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ का सवाल: क्या यह केवल जुआ खेलने के आरोप में की गई सामान्य पुलिस कार्रवाई है, या इसके पीछे पत्रकारिता से जुड़ा कोई विवाद भी है? इस सवाल का जवाब निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।







