बड़े-बड़े मीडिया घरानों की राजनेताओं, ब्यूरोक्रेट, सुरक्षा एजेंसियों, ज्यूडिशियरी और माफियाओं से सांठगांठ… लोकतंत्र खतरे में, मीडिया घराने पूंजी के बल पर देश को हांक रहे

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देश के एनजीओ ने 30 साल के शोध के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गोपनीय रिपोर्ट…।

इस एनजीओ ने यहां तक आरोप लगाया है कि मीडिया घराने अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि इस एनजीओ की रिपोर्ट पर शीघ्र कार्रवाई कर देश में मीडिया घरानों पर लगाम कसी जानी चाहिए। एनजीओ ने आरोप लगाया है कि पूंजी के बल पर देश में मीडिया की माफिया संस्कृति लोकतत्र के लिए खतरा बनकर उभरी है। अगर अभी से मीडिया घरानों पर लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में देश में तख्तापलट और सुनियोजित अपराधों में खुद ये मीडिया घराने सफेदपोश की भूमिका में इतने आगे बढ़ जाएंगे कि इन्हें रोक पाना मुश्किल होगा।

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

बड़े-बड़े मीडिया घरानों पर राजनेताओं, ब्यूरोक्रेट, सुरक्षा एजेंसियों, ज्यूडिशियरी और माफियाओं से सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं। देश के एक एनजीओ की पिछले 30 साल की गहन स्टडी में यह बात सामने आई है। इस एनजीओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गोपनीय रिपोर्ट भेजी है, जिसमें आशंका व्यक्त की गई है कि लोकतंत्र खतरे में हैं। आरोप है कि मीडिया घराने अपने पूंजी के बल पर मनमानी रिपोर्ट और समाचारों से देश को हांक रहे हैं।

इस एनजीओ ने नाम न छापने की शर्त पर उदित भास्कर को बताया कि उन्होंने अपने नेटवर्क के आधार पर देश में सर्वे और शोध करवाया है। एनजीओ का दावा है कि उन्होंने कई केस स्टडी पर रिसर्च की और पिछले 30 सालों की स्टडी में सामने आया कि देश में मीडिया खुद माफिया बनकर उभरा है। आज प्रमुख मीडिया घरानों ने गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक अपना नेटवर्क फैला दिया है। इन मीडिया के संवाददाता जो आमतौर पर स्ट्रिंगर होते हैं और जिन्हें या ताे पैसे दिए नहीं जाते हैं या फिर सेंटीमीटर कॉलम पर पैसे दिए जाते हैं, लेकिन उनकी संपत्तियों की जांच करवाई जाए तो चौंकाने वाले परिणाम आएंगे। ये गरीब संवाददाता जिन्हें मीडिया से कुछ नहीं मिलता वे लाखों-करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमते हैं। कई रिपोर्टर्स ने बंगले चुना लिए हैं। इन बंगलों में लिफ्ट तक लगी है। इन कथित संवाददाताओं के खिलाफ अनेक मुकदमे दर्ज है और मीडिया के आका खुद इनसे गैर कानूनी काम करवाते हैं।

कई विख्यात मीडया घराने कुख्यात की श्रेणी में आ गए हैं। पत्रकारिता के नाम पर मीडिया घरानों की संपत्तियां बढ़ रही है और पत्रकारिता की आड़ में दूसरे कार्य और बिजनेस बढ़ रहे हैं। यही नहीं कई मीडिया घराने नियमों के बाहर जाकर सरकार और ब्यूरोक्रेट से फायदा उठा रहे हैं। इस एनजीओ ने मीडिया घरानों के बारे में विस्तार से गोपनीय रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी है ओर आग्रह किया है कि संसद में जल्द ऐसा कानून लाया जाए जिससे मीडिया के माफियाओं, राजनेताओं, ब्यूरोक्रेट और ज्यूडिशियरी के साथ संबंधों को बेनकाम करते हुए मीडिया घरानों पर लगाम कसी जाए।

आरोप : मीडिया घराने खुद अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल

इस एनजीओ ने यहां तक आरोप लगाया है कि मीडिया घराने अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि इस एनजीओ की रिपोर्ट पर शीघ्र कार्रवाई कर देश में मीडिया घरानों पर लगाम कसी जानी चाहिए। एनजीओ ने आरोप लगाया है कि पूंजी के बल पर देश में मीडिया की माफिया संस्कृति लोकतंत्र के लिए खतरा बनकर उभरी है। अगर अभी से मीडिया घरानों पर लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में देश में तख्तापलट और सुनियोजित अपराधाओं में खुद ये मीडिया घराने सफेदपोश की भूमिका में इतने आगे बढ़ जाएंगे कि इन्हें रोक पाना मुश्किल होगा। इस  एनजीओ ने आरोप लगाया है कि मीडिया घराने घटनाओं पर आंसू बहाते हैं और रिपोर्ट को अपने हिसाब से मोड़ देते हैं। जबकि मीडिया रूपी माफिया देश को अपने हिसाब से हांक रहे हैं।

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