प्रिय रेजिडेंट्स! मरीजों की जिंदगी के लिए लौटिए ड्यूटी पर, आपकी सेवा ही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है

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एम्स जोधपुर के रेजिडेंट डॉक्टर्स से उदित भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित की मार्मिक अपील—दर्द को संवाद से दूर करें, हड़ताल से नहीं

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 uditbhaskarnews@gmail.com

 

एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के बीच अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। एक रेजिडेंट डॉक्टर की दुखद मृत्यु के बाद उठे सवाल गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। लेकिन इस घटना के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का सबसे बड़ा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिनका एम्स जोधपुर से इलाज और जीवन की उम्मीद जुड़ी है। ऐसे समय में उदित भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने एम्स जोधपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों से भावपूर्ण अपील की है कि वे मरीजों के हित में अपनी हड़ताल समाप्त कर पुनः चिकित्सा सेवा में लौटें।

रेजिडेंट डॉक्टर्स के नाम एक मार्मिक अपील

प्रिय रेजिडेंट डॉक्टर्स,

आप डॉक्टर हैं। आपके हाथ में केवल स्टेथोस्कोप, इंजेक्शन, ऑपरेशन के उपकरण या मेडिकल रिपोर्ट नहीं होती—आपके हाथ में किसी परिवार की उम्मीद होती है। आपके सामने आने वाला हर मरीज केवल एक केस नहीं होता। वह किसी मां का बेटा, किसी पिता की बेटी, किसी बच्चे का सहारा, किसी परिवार की उम्मीद और किसी घर की जिंदगी होता है।

हम सबको आपके साथी रेजिडेंट डॉक्टर की असमय मृत्यु का गहरा दुख है। ऐसी घटना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक झकझोर देती है। इस घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। आपकी पीड़ा, चिंता और सवालों को सुना जाना भी उतना ही जरूरी है।

लेकिन आपसे एक सवाल पूछने का अधिकार मरीजों को भी है—उनका क्या दोष है? पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन के कारण नियमित ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हुई हैं।  कल्पना कीजिए उस मरीज की, जो राजस्थान के किसी दूरदराज गांव से एम्स जोधपुर इस विश्वास के साथ आया कि यहां विशेषज्ञ डॉक्टर मिलेंगे। कोई मरीज महीनों से ऑपरेशन की तारीख का इंतजार कर रहा होगा। कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहा होगा। किसी परिवार ने इलाज के लिए खेत गिरवी रखा होगा, किसी ने रिश्तेदारों से पैसा उधार लिया होगा और किसी ने यात्रा के लिए अपनी आखिरी बचत खर्च की होगी। ऐसे मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि उपचार या ऑपरेशन टल गया है, तो उनकी चिंता कई गुना बढ़ जाती है( डॉक्टरों का आंदोलन अपनी जगह है, लेकिन मरीज की जिंदगी सबसे ऊपर होनी चाहिए।

आपकी नाराजगी को संवाद का रास्ता मिल सकता है। आपकी मांगों पर बातचीत हो सकती है। जांच चल सकती है। व्यवस्था में सुधार के लिए समिति बनाई जा सकती है। काम के घंटे, रोस्टर, रेजिडेंट वेलफेयर और सुरक्षा जैसे विषयों पर संस्थागत समाधान निकाले जा सकते हैं। लेकिन अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित होती रहे, यह स्थिति मरीजों के लिए बेहद कठिन है। इसलिए आपसे आग्रह है—हड़ताल को समाप्त करिए, ड्यूटी पर लौटिए और अपनी बात बातचीत की मेज पर रखिए। आपकी सबसे बड़ी ताकत आपकी चिकित्सा सेवा है। जिस समाज ने आपको डॉक्टर बनाया, आज वही समाज आपसे सेवा की उम्मीद कर रहा है।

मृतक डॉक्टर के परिवार के प्रति संवेदना जरूरी, जांच भी जरूरी

जिस रेजिडेंट डॉक्टर की मृत्यु हुई, उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करना पूरे समाज का दायित्व है। घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस जांच के साथ संस्थान स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने कार्य परिस्थितियों, ड्यूटी अवधि, कार्यभार और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए हैं। उनकी मांगों में मृतक के परिवार के लिए आर्थिक सहायता, संस्थागत समर्थन और रेजिडेंट प्रतिनिधित्व जैसे विषय भी शामिल बताए गए हैं। इन सभी मुद्दों पर गंभीर और संवेदनशील बातचीत होनी चाहिए। लेकिन बातचीत और चिकित्सा सेवा एक साथ चल सकती है। यही रास्ता मरीजों और डॉक्टरों दोनों के हित में है।

एम्स जोधपुर केवल एक अस्पताल नहीं, उम्मीद का बड़ा केंद्र

एम्स जोधपुर राजस्थान के साथ पश्चिमी भारत के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है। यहां केवल जोधपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज आते हैं। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट भी एम्स जोधपुर को पश्चिमी भारत की सेवा करने वाले clinical excellence centre के रूप में प्रस्तुत करती है। ऐसे संस्थान में चिकित्सकीय सेवाओं की निरंतरता केवल प्रशासनिक विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध हजारों मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य से है। इसीलिए रेजिडेंट डॉक्टरों से यह अपील किसी पक्ष के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि मरीज के पक्ष में है।

प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी के प्रयासों को भी देखना होगा

एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व में संस्थान की सेवाओं और विस्तार को लेकर कई पहलें सामने आई हैं। एम्स की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका विजन मरीज-केंद्रित चिकित्सा, शोध, शिक्षा, आउटरीच, प्रशिक्षण और तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित बताया गया है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अलग-अलग रैंकिंग में एम्स जोधपुर की स्थिति अलग रही है। NIRF 2025 में यह मेडिकल श्रेणी में 19वें स्थान पर था, जबकि India Today की 2026 मेडिकल कॉलेज रैंकिंग में इसे 8वां स्थान मिला है। इसलिए संस्थान की प्रगति को किसी एक रैंकिंग के आधार पर नहीं, बल्कि अलग-अलग मानकों और समयावधियों के संदर्भ में देखना उचित होगा। संस्थान में ओपीडी, आपातकालीन सेवाओं, जांच सुविधाओं, मशीनों, उपकरणों और उपचार की क्षमता बढ़ाने से जुड़े प्रयासों का उद्देश्य भी यही होना चाहिए कि मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा समय पर मिले।

डॉक्टरों से अंतिम आग्रह

रेजिडेंट डॉक्टर्स, आप हमारे स्वास्थ्य तंत्र की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं। आपके अधिकार महत्वपूर्ण हैं, आपकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है, आपका सम्मान महत्वपूर्ण है और आपके काम की परिस्थितियों में सुधार भी जरूरी है। लेकिन उसी तरह मरीज का इलाज भी महत्वपूर्ण है। आइए, विरोध को संवाद में बदलें। आक्रोश को समाधान में बदलें। दर्द को सेवा में बदलें। और अपने साथी डॉक्टर को ऐसी श्रद्धांजलि दें कि किसी मरीज की जिंदगी बचाने में आपका योगदान याद किया जाए। कृपया हड़ताल समाप्त करिए और ड्यूटी पर लौटिए। एम्स जोधपुर को मजबूत बनाइए, मरीजों का विश्वास बनाए रखिए।

— दिलीप कुमार पुरोहित
ग्रुप एडिटर, उदित भास्कर

एम्स जैसे संस्थानों में हड़ताल पर स्पष्ट राष्ट्रीय नीति की जरूरत

स्वास्थ्य मंत्रालय बनाए ऐसी व्यवस्था, जिसमें डॉक्टरों की आवाज भी सुनी जाए और मरीजों का इलाज भी बाधित न हो

एम्स जैसे Institute of National Importance में चिकित्सा सेवाएं देशभर के मरीजों की उम्मीद से जुड़ी होती हैं। इसलिए ऐसे संस्थानों में सामूहिक कार्यबहिष्कार या हड़ताल की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार को स्पष्ट, पारदर्शी और मरीज-केंद्रित राष्ट्रीय व्यवस्था पर विचार करना चाहिए। यह व्यवस्था ऐसी हो जिसमें रेजिडेंट डॉक्टरों की वास्तविक समस्याएं—ड्यूटी के घंटे, कार्यभार, सुरक्षा, आवास, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, रोस्टर और शिकायत निवारण—समयबद्ध तरीके से सुनी और हल की जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि विवाद की स्थिति में आपातकालीन ही नहीं, आवश्यक नियमित चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनी रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को इस विषय पर देश के सभी केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों, रेजिडेंट डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और मरीज प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कर एक समान प्रोटोकॉल तैयार करना चाहिए। इसमें यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कौन-सी सेवाएं किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं की जा सकतीं, शिकायतों के समाधान की समयसीमा क्या होगी और आंदोलन की स्थिति में वैकल्पिक चिकित्सकीय व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी। हड़ताल को केवल प्रतिबंधित करना समाधान नहीं होगा; अधिकार और मरीज के अधिकार—दोनों के बीच संतुलित कानूनी ढांचा जरूरी है। ऐसी नीति में गंभीर अनुशासनात्मक प्रावधानों के साथ प्रभावी शिकायत-निवारण और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था भी होनी चाहिए। उद्देश्य किसी वर्ग की आवाज दबाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि डॉक्टर अपनी बात मजबूती से रख सकें और मरीज इलाज से वंचित न हों।

सेवा, विस्तार और उत्कृष्टता की दिशा में एम्स जोधपुर

मरीज-केंद्रित चिकित्सा से शोध, तकनीक और आउटरीच तक—संस्थान के विजन में व्यापक विस्तार

एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व में संस्थान के विकास और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एम्स की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके विजन में मरीजों और उनके परिवारों के लिए compassionate clinical care, आधुनिक शोध, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण, आउटरीच और तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। संस्थान की प्रगति का एक महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती पहुंच है। आपके उपलब्ध संस्थागत आंकड़ों के अनुसार ओपीडी क्षमता और मरीज सेवाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है तथा वर्चुअल बेड, आपातकालीन एवं ट्रॉमा सेवाओं, जांच सुविधाओं, मशीनों और उपकरणों को बढ़ाने पर काम किया गया है। नई सुविधाओं का उद्देश्य स्पष्ट है—मरीज को जांच, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार एक ही संस्थान में अधिक सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध हो। गंभीर बीमारियों के लिए Centre of Excellence जैसी योजनाएं भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं।  NIRF 2025 की मेडिकल रैंकिंग में AIIMS जोधपुर 19वें स्थान पर था, जबकि India Today की 2026 मेडिकल कॉलेज रैंकिंग में इसे 8वां स्थान मिला। प्रो. पुरी का आधिकारिक विजन भी AIIMS जोधपुर को पश्चिमी भारत में clinical excellence का केंद्र बनाने, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की पहुंच बढ़ाने, प्रशिक्षण और शोध को मजबूत करने तथा तकनीक के माध्यम से दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है।

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