ट्रिपल इंजन सरकार….75 सालों में कोई भी सरकार जोधपुर का ड्रेनेज सिस्टम नहीं सुधार पाई, क्या भाजपा बोर्ड ध्यान देगा?

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अभी जीत का जश्न मनाया जा रहा है, अच्छी बात है…। महापौर प्रसन्नचंद मेहता और उप महापौर विजय सिंह पंवार भाजपा से निर्वाचित हो चुके हैं। लेकिन अब जिम्मेदारी बड़ी है। ट्रिपल इंजन सरकार है। जोधपुर 1 इंच बारिश में हांफ जाता है। बदहाल ड्रेनेज के चलते समय-समय पर बारिश में नालों में बहकर 6 लोग मर गए थे। जयनारायण व्यास, बरकतुल्लाह खान, अशोक गहलोत जैसे मुख्यमंत्रियों का नगर आजादी के बाद 75 साल में ड्रेनेज व्यवस्था नहीं सुधार पाया। आज भी जिस शहर में बारिश में नालों में बहकर लोग मर जाते हो शर्म आती है ऐसी सरकारों पर और ऐसे निकायों पर…। समस्याएं और भी है जिसका हम यहां उल्लेख कर रहे हैं।  

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 uditbhaskarnews@gmail.com

बधाई हो। भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता महापौर और विजय सिंह पंवार उप महापौर बन गए हैं। देश में ट्रिपल इंजन सरकार है। मगर बधाई देने से हमारी औपचारिकता ही पूरी होती है। काम नहीं हो तो यह बधाई कुछ काम की नहीं। अभी तक के अनुभव खराब ही रहे हैं। चलों अभी रोना बंद करते हैं, मगर कुछ मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित कराना जरूरी है।

28 जून 2024 को राइजिंग भास्कर में हमने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसके तहत राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव के नाम पत्र लिखा गया था- मी लार्ड! जोधपुर में नालों में बहकर अब तक 6 लोग मर गए, जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करवाओ, सरकार-प्रशासन ने बेशर्मी ओढ़ रखी है , न्याय की लाज रखिए…। लेकिन उस रिपोर्ट के बाद भी शहर की ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। अब सवाल है कि आजादी के बाद से जो शहर के ड्रेनेज सिस्टम का ढर्रा बिगड़ा हुआ है उसके लिए प्रयास करके बड़ा बजट राज्य और केंद्र सरकार से आवंटित करवा कर पूरे शहर की ड्रेनेज व्यवस्था में आमूलचूल सुधार करवाया जाएगा? क्योंकि शहर वर्तमान में इस समस्या से सर्वाधिक पीड़ित है और मानसून में 1 इंच बारिश में ही शहर हांफ जाता है। यहां समय-समय पर नालों में बहकर 6 लोग मर गए हैं। किसी भी लोकतंत्र में यह शर्मनाक स्थिति है जहां ड्रेनेज के नाम पर अरबों रुपए खर्च हुए हो और फिर भी समस्या बरकरार हो। इसलिए भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार के सामने जोधपुर शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का मुद्दा महत्वपूर्ण है। अब बात करते हैं कुछ समस्याओं और मुद्दों की जिसकी ओर ध्यान देने की जरूरत है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जोधपुर के मगर पर्यटन का भट्‌ठा बिठा दिया है? पर्यटकों की सुविधा के लिए कुछ नहीं किया… 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर के ही हैं। मगर पर्यटन के नाम पर उन्होंने कुछ नहीं किया। हालात यह है कि पर्यटन सीजन में अगर एक पर्यटक शहर के छोटे-मोटे मिलाकर 10-15 ही पर्यटन स्थल घूमना चाहे तो उसे अपने व्यक्तिगत खर्च से टैक्सी करके जाना होगा या कार आदि किराए पर लेनी होगी। या कैब आदि करनी होगी। अभी तक सरकारी स्तर पर रियायती दर पर टूरिज्म विभाग की ओर से टूरिस्ट बस की भी सुविधा नहीं है। मैंने कई गाइड से बात की तो उन्होंने भी दुख जताया। मैंने अपने एक मित्र जो दैनिक भास्कर में सीनियर न्यूज एडिटर है और गाइड का काम भी करते हैं उनसे कुछ समय पहले पूछा कि मेरे रिश्तेदार जोधपुर के पर्यटन स्थल घूमना चाहते हैं कोई बस आदि चलती है क्या? तो उन्होंने कहा नहीं पुरोहित जी जोधपुर में अभी ऐसी कोई सुविधा नहीं है। टूरिस्ट सीजन में कभी कभार टूरिस्ट बस चलती है। वो भी जरूरी नहीं। अधिकतर होटल वालों की निजी व्यवस्था होती है। या फिर टूरिस्ट अपने स्तर पर टैक्सी-ऑटो या कार या कैबर आदि करके ही जाते हैं। यह है हमारे जोधपुर के हाल। वो भी तब जोधपुर के रहने वाले और जोधपुर के अपने को हितैषी बताने वाले गजेंद्र सिंह शेखावत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री हैं। पर्यटन एवं स्ंस्कृति मंत्री होने के बाद भी पर्यटन को लेकर कोई बड़ी योजना नहीं बनी। क्या पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री दस बड़े प्रोजेक्ट बता सकते हैं जिससे जोधपुर को फायदा पहुंचा हो? पहले जल शक्ति मंत्री रहे तब भी जोधपुर की प्यास नहीं बुझ पाई। आज ही राजस्थान पत्रिका में खबर थी कि पांच साल से जोधपुर में जल व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। अभी राजस्थान में सरकार भाजपा की है। केंद्र में भी भाजपा की है। अब निकाय भी भाजपा के हवाले। क्या कुछ होगा या हवा-हवाई बातें ही होगी? जल शक्ति मंत्री की भारी भरकम जिम्मेदारी होने के बाद भी गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर में आज भी जनता प्यासी मर रही है। कोई वैकल्पिक व्यवस्था और प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पाए। क्या ही अच्छा होता अगर कुछ प्राचीन जलस्रोतों का ही जीर्णोद्धार कर दिया होता। मगर भारी भरकम पद पर शेखावत पद के भार में मरते रहे और कुछ नहीं किया। अब निकाय चुनाव में प्रसन्नचंद और विजय सिंह पंवार जीते हैं। देखना यह है कि ये अपना-अपना टाइम पास करके पांच साल में चले जाते हैं या कुछ करते भी हैं।

अब कुछ समस्याएं और मुद्दे :

1- नाइट टूरिज्म :  जोधपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री के होते हुए नाइट टूरिज्म नहीं हैं। बताया गया था कि जल्द ही नाइट टूरिज्म शुरू होगा, मगर इस दिशा में काम नहीं हुआ। अभी हालत यह है कि जोधपुर में रात नौ-दस बजते ही बाजार बंद हो जाते हैं और होटलों में लोग लोक संगीत का आनंद लेने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। क्या ही अच्छा हो कि नाइट टूरिज्म के लिए कुछ किया जाए।

2-पर्यटन स्थलों के भ्रमण की सुविधा हो : सरकारी स्तर पर पर्यटकों के भ्रमण के लिए रियायती दर पर पर्यटन स्थलों के भ्रमण की सुविधा होनी चाहिए। सरकारी स्तर पर ई-रिक्शे ही रियायती दर पर हो तो बड़ा फायदा मिल सकता है।

3-बिजली-पानी आपूर्ति व्यवस्था सही हो : शहर में बिजली और पानी आपूर्ति व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। कई कॉलोनियों में समस्या विकराल है। सुबह से जब हम पोर्टल अपडेट कर रहे थे कई बार बिजली गुल हो गई। क्या बिजली हमारा अधिकार नहीं होना चाहिए। पानी की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। जब चाहे पानी की कटौती हो जाती है। आखिर सरकार पानी और बिजली नहीं दे सकती तो उससे किस बात की अपेक्षा की जाए?

4-ट्रैफिक की बदहाली : आजादी के बाद शहर का विस्तार हुआ है। आबादी बढ़ी है। वाहन बढ़े हैं। यातायात का लोड बढ़ा है। लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। क्या ट्रिपल इंजन सरकार इस ओर ध्यान देगी?

5-अतिक्रमण की समस्या : जोधपुर में अतिक्रमण की समस्या है। कई कॉलोनियों में सड़कों के दोनों और पांच-पांच फीट जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। कई भूमाफियाओं ने करोड़ों-अरबों रुपयों की जमीन पर अतिक्रमण और कब्जा कर रखा है। कई योजनाएं फर्जी और अवैध चल रही है। लेकिन अतिक्रमण हटाने की बात आती है तो ठेले वालों और दुकानों के बाहर रखा सामान हटाकर नगर निगम का अतिक्रमण निगम दस्ता दादागिरी दिखाता है। इस काम में पुलिस की मदद ली जाती है। लेकिन मोटे हाथी हमेशा बच जाते हैं। क्या इस ओर नगर निगम ध्यान देगी?

6-रोड लाइटें : शहर की सड़कों की रोड लाइटें दुरुस्त नहीं हैं। कई मार्गों पर अंधेरा पसरा रहता है। कई कॉलोनियों और बाजारों पर लाइटों की रोशनी दीये की तरह होती है जिससे रोशनी पर्याप्त नहीं हो पाती।

7-टूटी और बदहाल सड़कें : अभी कुछ ही दिन पहले चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के कायस्थ सामुदायिक भवन की तरफ एक शोक सभा में गया तो देखा कि सड़क की दुर्दशा हो रखी है। यही हाल शहर भर की सड़कों की है। कई कॉलोनियों में तो सड़कें ही नहीं हैं। फिर किसलिए सरकारें चुनी जाती है। जब सड़कों का ही नागरिकों को हक नहीं मिल पाता। ऐसे में आए दिन दुर्घटनाएं कारित होती रहती है।

8-पुराने जलस्रोतों का रखरखाव और जीर्णोद्धार : अब निकाय से अपेक्षा रहेगी कि प्राचीन जलस्रोतों का रखरखाव और जीर्णोद्धार करवाया जाएगा। केवल वर्तमान जल प्रणाली पर भराेसा जताने की बजाय प्राचीन जलस्रोतों का रखरखाव और जीर्णोद्धार भी करवाना होगा ताकि इमरजेंसी में जल समस्या का समाधान हो सके।

9-निकाय आय बढ़ाने पर जोर : अब बोर्ड काे निकाय की आय बढ़ाने पर जोर देना होगा। साथ ही कई नई और मौलिक योजनाएं लॉन्च करनी होगी। ताकि आय बढ़ने पर उसका उपयोग शहर के विकास के लिए किया जा सके।

10-लालफीताशाही पर लगाम : नगर निगम की लालफीताशाही और अफसरों की तानााशही पर लगाम लगानी होगी।  क्योंकि छोटे से प्रमाण पत्र बनाने से लेकर हर काम में लालफीताशाही और अफसरों की मनमानी की शिकायतें सामने आती रही है। ऐसे में भाजपा सरकार से कुछ उम्मीद की जा रही है। मगर केवल उम्मीद ही कर रहे हैं। कुछ होगा तब देखेंगे।

11. सीसीटीवी : प्रमुख रास्तों और महत्वपूर्ण स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की ओर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि शहर में चोरियां और अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसे में सीसीटीवी कैमरे जगह-जगह लगाने की दिशा में सोचना होगा।

अभी जीत का जश्न है…कुछ दिन चलेगा, फिर हमारे मुद्दों पर भी सोचना सरकार…!

अभी भाजपा में जीत का जश्न है। कुछ दिन चलेगा। फिर हमारे मुद्दों पर भी सरकार सोचना। क्योंकि चुनी हुई सरकार जब अपनी जिम्मेदारी से मुंह फिर लेती है तो वह लोकतंत्र और जनादेश का अपमान होता है। लेकिन लोकतंत्र की यही सबसे बड़ी कमजोरी है कि इसमें राइट टू रिकॉल जैसी व्यवस्था नहीं है। एक बार जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद छाती पर मूंग डळते रहते हैं और कुछ नहीं करते। फिर अगली बार सरकार बदलती है और वो भी ऐसा ही करती है। हर बार जनता छली जाती है। मगर जनता भी अपने अधिकारों की प्रति जागरूक नहीं है। इसलिए लोकतंत्र में जनता हर बार छली जाती है। क्योंकि यह जनतंत्र है। यहां मुद्दे नहीं जाति, धर्म और पैसे चलते हैं। चलो, अभी बात बहुत हो गई। हम नए जनप्रतिनिधियों को शुभकामना देते हैं और उम्मीद करते हैं कि कुछ चमत्कार होगा।

28 जून 2024 को राइजिंग भास्कर में प्रकाशित खबर : 

मी लॉर्ड! जोधपुर में नालों में बहकर अब तक 6 लोग मर गए, जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करवाओ, सरकार-प्रशासन ने बेशर्मी ओढ़ रखी है, न्याय की लाज रखिए – Rising Bhaskar

मी लॉर्ड! जोधपुर में नालों में बहकर अब तक 6 लोग मर गए, जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करवाओ, सरकार-प्रशासन ने बेशर्मी ओढ़ रखी है, न्याय की लाज रखिए

 

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